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Ayodhya News: दिगंबर अखाड़ा से तीन पीढ़ियों का रिश्ता निभा रहे योगी

Sat, 15 Aug 2026 12:10 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Sat, 15 Aug 2026 12:10 AM IST
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A Yogi maintaining a three-generation-long association with the Digambar Akhada.
अयोध्या। मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ का अयोध्या के दिगंबर अखाड़े से रिश्ता केवल औपचारिक या धार्मिक नहीं, बल्कि तीन पीढ़ियों से चली आ रही गुरु परंपरा, वैचारिक निकटता और आत्मीय संबंधों का प्रतीक है। शुक्रवार को ब्रह्मलीन महंत रामचंद्र दास परमहंस की पुण्यतिथि पर दिगंबर अखाड़े पहुंचकर योगी आदित्यनाथ ने इस विरासत को एक बार फिर जीवंत कर दिया।
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गोरक्षपीठ और दिगंबर अखाड़े का संबंध राम जन्मभूमि आंदोलन के संघर्ष काल से जुड़ा रहा है। इसकी नींव गोरक्षपीठ के पूर्व पीठाधीश्वर महंत दिग्विजयनाथ ने रखी, जिन्होंने अयोध्या के संत समाज के साथ मिलकर राम जन्मभूमि आंदोलन को वैचारिक आधार दिया। उनके उत्तराधिकारी महंत अवेद्यनाथ और दिगंबर अखाड़े के महंत रामचंद्र दास परमहंस इस आंदोलन के दो प्रमुख स्तंभ बने। आंदोलन के दौरान जब भी महंत अवेद्यनाथ अयोध्या आते, उनका ठिकाना दिगंबर अखाड़ा ही होता था। दोनों संतों के बीच केवल आंदोलन का नहीं, बल्कि गहरी आत्मीयता का संबंध था।
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उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज भी हर वर्ष परमहंस रामचंद्र दास की पुण्यतिथि पर दिगंबर अखाड़ा पहुंचते हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने इस परंपरा को नहीं टूटने दिया। यही कारण है कि उनका यह दौरा केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि तीन पीढ़ियों से चले आ रहे आध्यात्मिक और वैचारिक रिश्ते की निरंतरता के रूप में देखा जाता है।
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व्यक्तिगत संबंधों को भावुक होकर सीएम ने किया याद
मुख्यमंत्री ने परमहंस रामचंद्र दास महाराज के साथ अपने व्यक्तिगत संबंधों को भी भावुक होकर याद किया। उन्होंने बताया कि जब वे लखनऊ जाते थे तो उन्हें उनके पूज्य गुरुदेव महंत अवेद्यनाथ विशेष रूप से निर्देश देते थे कि अयोध्या होकर जाना और परमहंस महाराज का आशीर्वाद लेकर ही आगे बढ़ना। परमहंस जी जब गोरखपुर आते थे, तो गोरक्षपीठ के दरवाजे उनके लिए हमेशा खुले रहते थे। यह केवल गुरुजनों का सम्मान नहीं, बल्कि एक ऐसे पारिवारिक रिश्ते का प्रमाण था, जो वर्षों की श्रद्धा, विश्वास और अपनत्व से बना था।
पूछते थे, बेटा, राम मंदिर का निर्माण होगा न?
मुख्यमंत्री ने परमहंस रामचंद्र दास जी महाराज की सादगी और राम मंदिर निर्माण के प्रति उनके संकल्प को याद करते हुए कहा कि अंतिम समय तक उनके मन में केवल एक ही ध्येय था- अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण। उन्होंने कहा कि परमहंस महाराज अंतिम दिनों में भी उनसे पूछते थे, बेटा, राम मंदिर का निर्माण होगा न? और उनके लिए बीमारी या व्यक्तिगत कष्ट से ज्यादा महत्वपूर्ण राम मंदिर का निर्माण था।


जो वचन दिया, उसे अंतिम समय तक निभाया
योगी ने कहा कि परमहस महाराज ने जो वचन दिया, उसे अंतिम समय तक निभाया। सरकारें आती-जाती रहीं, लेकिन कोई सरकार उन्हें डिगा नहीं सकी। उन्होंने 1990 के राम जन्मभूमि आंदोलन का जिक्र करते हुए कहा कि रामभक्तों पर गोली चलाए जाने के बाद भी परमहंस महाराज ने रामभक्तों के स्मारक का संकल्प लिया और उसे पूरा करके दिखाया।
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