राम मंदिर चढ़ावा चोरी: ट्रस्ट ने पहली बार सोने-चांदी का कराया सत्यापन, महंत नृत्यगोपाल दास से मिले चंपत राय
राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बीच ट्रस्ट ने पहली बार सोने-चांदी का भौतिक सत्यापन कराया है। अंतरिम महासचिव कृष्ण मोहन ने आभूषणों व अन्य कीमती वस्तुओं का मिलान कराया। उधर, चंपत राय ने महंत नृत्यगोपाल दास से मुलाकात की। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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रामनगरी अयोध्या स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पारदर्शिता की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव डॉ. कृष्ण मोहन ने शनिवार को पहली बार एसबीआई के लॉकर में सुरक्षित रखी गई सोने-चांदी की ईंटों, बहुमूल्य आभूषणों और अन्य कीमती वस्तुओं का विस्तृत भौतिक सत्यापन कराया। इस दौरान लॉकर में रखी प्रत्येक वस्तु की वीडियोग्राफी भी कराई गई।
सुबह करीब 10 बजे शुरू हुई यह प्रक्रिया देर शाम तक चली। डॉ. कृष्ण मोहन पूरे दिन बैंक में मौजूद रहे और लॉकर में सुरक्षित रखी गई प्रत्येक वस्तु की गुणवत्ता, मात्रा और अभिलेखों का बारीकी से मिलान किया।
नवगठित एसआईटी ने नए सिरे से पड़ताल शुरू की
इस दौरान ट्रस्ट के चार्टर्ड अकाउंटेंट चंदन राय और जगदीश आफले भी मौजूद रहे। गौरतलब है कि राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े चोरी प्रकरण की जांच के लिए नवगठित एसआईटी ने नए सिरे से पड़ताल शुरू की है। शुरुआती जांच में श्रद्धालुओं की ओर से दान में दिए गए सोने-चांदी और बहुमूल्य आभूषणों के रखरखाव एवं अभिलेखों को लेकर भी सवाल उठे थे। श्रद्धालुओं ने दान की स्थिति को लेकर जानकारी मांगी थी।
चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद पहली बार ट्रस्ट अध्यक्ष से मिले चंपत राय
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से सक्रियता बढ़ाते हुए शनिवार को राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास से मुलाकात की। महासचिव पद से इस्तीफा देने के बाद ट्रस्ट अध्यक्ष से उनकी यह पहली औपचारिक भेंट मानी जा रही है, जिसने रामनगरी के धार्मिक और सामाजिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।चंपत राय इन दिनों चातुर्मास का पालन कर रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने साधु-संतों और धर्माचार्यों से मिलने तथा उनका आशीर्वाद लेने का अभियान शुरू किया है। इसकी शुरुआत शनिवार को ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास से मुलाकात के साथ हुई। इसके बाद उन्होंने अयोध्या के विभिन्न प्राचीन मठों और जातीय मंदिरों में जाकर महंतों एवं संत-धर्माचार्यों से भेंट की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
सूत्रों के अनुसार, मुलाकातों के दौरान धार्मिक विषयों, चातुर्मास की परंपरा तथा रामनगरी के आध्यात्मिक वातावरण पर चर्चा हुई। राजनीतिक और धार्मिक विश्लेषकों की नजर में चंपत राय की यह सक्रियता कई संकेत देती है। चढ़ावा प्रकरण और महासचिव पद से इस्तीफे के बाद वे लंबे समय तक सार्वजनिक गतिविधियों से दूर रहे थे।