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Ayodhya News: 50-50 की टुकड़ियों में जलाभिषेक के लिए भेजे जाएंगे शिवभक्त
Sun, 02 Aug 2026 11:54 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 02 Aug 2026 11:54 PM IST
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अयोध्या। सावन के पहले सोमवार पर अयोध्या में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने नागेश्वरनाथ मंदिर में विशेष सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की व्यवस्था की है। अनुमान है कि सोमवार को तीन लाख से अधिक शिवभक्त अयोध्या पहुंचेंगे।
श्रद्धालुओं को 50-50 की टुकड़ियों में नागेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक और दर्शन के लिए भेजा जाएगा। इसके लिए राम की पैड़ी से मंदिर तक सात स्थानों पर बैरियर लगाए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था की कमान अर्धसैनिक बलों के जवान संभालेंगे, जबकि विभिन्न स्थानों पर मजिस्ट्रेट भी तैनात रहेंगे।
श्रद्धालु सरयू में स्नान के बाद नागेश्वरनाथ और क्षीरेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक करेंगे तथा रामलला, हनुमानगढ़ी, कनक भवन और दशरथ महल सहित प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन करेंगे।
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सात चरणों में नियंत्रित की जाएगी श्रद्धालुओं की आवाजाही
भीड़ का सबसे अधिक दबाव नागेश्वरनाथ और क्षीरेश्वरनाथ मंदिर पर रहने की संभावना है। इसी को देखते हुए राम की पैड़ी से नागेश्वरनाथ मंदिर तक बैरिकेडिंग कर सात चरणों में श्रद्धालुओं की आवाजाही नियंत्रित की जाएगी। महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की गई है।
प्रशासन की तैयारी है कि सुबह चार बजे से ही दर्शन और जलाभिषेक की प्रक्रिया शुरू करा दी जाए, ताकि भीड़ का दबाव नियंत्रित रखा जा सके। सरयू में जलपुलिस के साथ एसडीआरएफ की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं को गहरे पानी में स्नान करने से रोका जा रहा है। भीड़ नियंत्रण के लिए घाटों पर भी बैरीकेडिंग की गई है।
सावन के पहले सोमवार को लेकर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। नागेश्वरनाथ मंदिर और आसपास के क्षेत्र में अर्धसैनिक बल, पुलिस एवं पीएसी के जवान तैनात रहेंगे। श्रद्धालुओं को चरणबद्ध तरीके से समूह में आगे भेजा जाएगा। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की लगातार निगरानी की जाएगी, ताकि सभी श्रद्धालु सुरक्षित और सुगमता से जलाभिषेक कर सकें।
-चक्रपाणि त्रिपाठी, एसपी सिटी
सावन सोमवार पर ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
अयोध्या। सावन माह का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल्यानंदन वर्धन ने सावन सोमवार पर शिव पूजन की विधि और शुभ मुहूर्त की जानकारी दी है।
उन्होंने बताया कि प्रातः स्नान कर भगवान शिव का जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद तिल के तेल से दीपक जलाकर फल, पुष्प, धतूरा, बेलपत्र, सुपारी और नारियल अर्पित करें। पूरे पूजन के दौरान श्रद्धापूर्वक ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करना अत्यंत शुभ माना गया है। कौशल्यानंदन के अनुसार, पूरे दिन शिव पूजन किया जा सकता है, लेकिन शुभ मुहूर्त में जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है।
पूजन का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:19 बजे से 05:01 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक
प्रदोष काल (संध्या पूजा): शाम 06:26 बजे से रात 07:56 बजे तक
घाटों से हटे तख्त-छप्पर, पुरोहितों ने जताई नाराजगी
अयोध्या। सावन के पहले सोमवार से ठीक पहले अयोध्या के प्रमुख घाटों पर प्रशासन की कार्रवाई से पुरोहित समाज में नाराजगी बढ़ गई है। नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने नयाघाट समेत अन्य घाटों पर पुरोहितों के बैठने के लिए लगाए गए तख्त और अस्थायी छप्परों को हटाना शुरू कर दिया है।
पुरोहितों का कहना है कि हर वर्ष सावन मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए घाटों पर बैठने और पूजा-पाठ कराने के लिए अस्थायी छप्पर लगाए जाते हैं। उनका कहना है कि छप्पर हटने से न केवल उन्हें बैठने में कठिनाई होगी, बल्कि पूजा-अर्चना कराने आने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। आरोप लगाया कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के तख्त और छप्पर हटाए जाने से उनकी दैनिक आजीविका प्रभावित होगी।
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श्रद्धालुओं को 50-50 की टुकड़ियों में नागेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक और दर्शन के लिए भेजा जाएगा। इसके लिए राम की पैड़ी से मंदिर तक सात स्थानों पर बैरियर लगाए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था की कमान अर्धसैनिक बलों के जवान संभालेंगे, जबकि विभिन्न स्थानों पर मजिस्ट्रेट भी तैनात रहेंगे।
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श्रद्धालु सरयू में स्नान के बाद नागेश्वरनाथ और क्षीरेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक करेंगे तथा रामलला, हनुमानगढ़ी, कनक भवन और दशरथ महल सहित प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन करेंगे।
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सात चरणों में नियंत्रित की जाएगी श्रद्धालुओं की आवाजाही
भीड़ का सबसे अधिक दबाव नागेश्वरनाथ और क्षीरेश्वरनाथ मंदिर पर रहने की संभावना है। इसी को देखते हुए राम की पैड़ी से नागेश्वरनाथ मंदिर तक बैरिकेडिंग कर सात चरणों में श्रद्धालुओं की आवाजाही नियंत्रित की जाएगी। महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की गई है।
प्रशासन की तैयारी है कि सुबह चार बजे से ही दर्शन और जलाभिषेक की प्रक्रिया शुरू करा दी जाए, ताकि भीड़ का दबाव नियंत्रित रखा जा सके। सरयू में जलपुलिस के साथ एसडीआरएफ की तैनाती की गई है। श्रद्धालुओं को गहरे पानी में स्नान करने से रोका जा रहा है। भीड़ नियंत्रण के लिए घाटों पर भी बैरीकेडिंग की गई है।
सावन के पहले सोमवार को लेकर व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई है। नागेश्वरनाथ मंदिर और आसपास के क्षेत्र में अर्धसैनिक बल, पुलिस एवं पीएसी के जवान तैनात रहेंगे। श्रद्धालुओं को चरणबद्ध तरीके से समूह में आगे भेजा जाएगा। सुरक्षा और यातायात व्यवस्था की लगातार निगरानी की जाएगी, ताकि सभी श्रद्धालु सुरक्षित और सुगमता से जलाभिषेक कर सकें।
-चक्रपाणि त्रिपाठी, एसपी सिटी
सावन सोमवार पर ऐसे करें भगवान शिव की पूजा
अयोध्या। सावन माह का प्रत्येक सोमवार भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित कौशल्यानंदन वर्धन ने सावन सोमवार पर शिव पूजन की विधि और शुभ मुहूर्त की जानकारी दी है।
उन्होंने बताया कि प्रातः स्नान कर भगवान शिव का जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद तिल के तेल से दीपक जलाकर फल, पुष्प, धतूरा, बेलपत्र, सुपारी और नारियल अर्पित करें। पूरे पूजन के दौरान श्रद्धापूर्वक ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करना अत्यंत शुभ माना गया है। कौशल्यानंदन के अनुसार, पूरे दिन शिव पूजन किया जा सकता है, लेकिन शुभ मुहूर्त में जलाभिषेक करने का विशेष महत्व है।
पूजन का शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:19 बजे से 05:01 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक
प्रदोष काल (संध्या पूजा): शाम 06:26 बजे से रात 07:56 बजे तक
घाटों से हटे तख्त-छप्पर, पुरोहितों ने जताई नाराजगी
अयोध्या। सावन के पहले सोमवार से ठीक पहले अयोध्या के प्रमुख घाटों पर प्रशासन की कार्रवाई से पुरोहित समाज में नाराजगी बढ़ गई है। नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने नयाघाट समेत अन्य घाटों पर पुरोहितों के बैठने के लिए लगाए गए तख्त और अस्थायी छप्परों को हटाना शुरू कर दिया है।
पुरोहितों का कहना है कि हर वर्ष सावन मेले के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए घाटों पर बैठने और पूजा-पाठ कराने के लिए अस्थायी छप्पर लगाए जाते हैं। उनका कहना है कि छप्पर हटने से न केवल उन्हें बैठने में कठिनाई होगी, बल्कि पूजा-अर्चना कराने आने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। आरोप लगाया कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के तख्त और छप्पर हटाए जाने से उनकी दैनिक आजीविका प्रभावित होगी।