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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: मनमानी रोकने को लागू किया गया डिजिटल सिस्टम, एक क्लिक में दिखेगा हर भुगतान का हिसाब
Sun, 09 Aug 2026 08:32 AM IST
Bhupendra Singh
नितिन मिश्र, अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
नितिन मिश्र, अमर उजाला नेटवर्क, अयोध्या
Published by: Bhupendra Singh
Updated Sun, 09 Aug 2026 08:32 AM IST
सार
राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद के बाद ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था में बड़ा बदलाव हुआ है। ट्रस्ट अब ईआरपी सिस्टम से हर भुगतान की निगरानी करेगा। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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राम मंदिर का दृश्य और दर्शन को जाते श्रद्धालु।
- फोटो : ट्रस्ट
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विस्तार
अयोध्या स्थित राम मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अपनी वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
इसी क्रम में राम मंदिर ट्रस्ट ने ईआरपी सिस्टम लागू कर दिया गया है। ईआरपी (एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) प्रणाली एक आधुनिक डिजिटल प्रबंधन प्रणाली है, जिसके माध्यम से ट्रस्ट की खरीद प्रक्रिया, टेंडर, बिल, भुगतान, स्टॉक, अनुबंध, लेखा और अन्य प्रशासनिक कार्य एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित किए जाएंगे।
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प्रत्येक भुगतान का पूरा डिजिटल ट्रेल उपलब्ध रहेगा, जिससे भविष्य में ऑडिट और सत्यापन की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी होगी। ट्रस्ट के अधिकारी भी किसी भी तरह के वित्तीय लेन-देन की स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे। सूत्र बताते हैं कि नई व्यवस्था में खरीद और भुगतान प्रणाली को भी प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है।
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इसी क्रम में राम मंदिर ट्रस्ट ने ईआरपी सिस्टम लागू कर दिया गया है। ईआरपी (एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग) प्रणाली एक आधुनिक डिजिटल प्रबंधन प्रणाली है, जिसके माध्यम से ट्रस्ट की खरीद प्रक्रिया, टेंडर, बिल, भुगतान, स्टॉक, अनुबंध, लेखा और अन्य प्रशासनिक कार्य एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संचालित किए जाएंगे।
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पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन दर्ज रहेगी
इससे किसी भी भुगतान की शुरुआत से लेकर अंतिम स्वीकृति तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन दर्ज रहेगी। हर स्तर पर उसकी निगरानी संभव होगी। ईआरपी प्रणाली लागू होने के बाद बिना आवश्यक अनुमोदन, डिजिटल रिकॉर्ड और निर्धारित प्रक्रिया के कोई भी बिल भुगतान के लिए आगे नहीं बढ़ सकेगा।
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प्रत्येक भुगतान का पूरा डिजिटल ट्रेल उपलब्ध रहेगा, जिससे भविष्य में ऑडिट और सत्यापन की प्रक्रिया भी अधिक प्रभावी होगी। ट्रस्ट के अधिकारी भी किसी भी तरह के वित्तीय लेन-देन की स्थिति ऑनलाइन देख सकेंगे। सूत्र बताते हैं कि नई व्यवस्था में खरीद और भुगतान प्रणाली को भी प्रतिस्पर्धी बनाया जा रहा है।