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Ayodhya News: पूर्व पार्षद सहित 17 लोगों पर धोखाधड़ी और मकान हड़पने की प्राथमिकी का आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 15 Mar 2026 09:27 PM IST
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अयोध्या। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने पूर्व पार्षद मुरारी सिंह यादव सहित 17 लोगों के विरुद्ध धोखाधड़ी और मकान हड़पने के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश जमीन की हेराफेरी कर फर्जी बैनामा कराने और दूसरे के मकान पर कब्जा करने के आरोप में दिया गया है। अदालत ने कोतवाली नगर पुलिस को तीन दिन के भीतर रिपोर्ट दर्ज कर सूचित करने का निर्देश भी दिया है।
पीड़िता मनोरमा सिंह ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर मुरारी सिंह यादव सहित 17 लोगों पर कूटरचित दस्तावेज बनाने और फर्जी बैनामा के आधार पर उनका मकान हड़पने का आरोप लगाया था। मनोरमा सिंह नाका हनुमान गढ़ी, कोतवाली नगर की निवासी हैं। उन्होंने बताया कि उनके पति राजकुमार सिंह ने सन् 1963 में किसुन लाल से जमीन का बैनामा लिया था। पति की मृत्यु के बाद से वह अपने परिवार के साथ उसी मकान में रह रही हैं। 30 जुलाई 2025 को उनके मकान पर कब्जा करने का प्रयास किया गया, जिसके बाद उन्हें धोखाधड़ी का पता चला। जानकारी मिली कि दूसरे स्थान की जमीन को उनके मकान की चौहद्दी दिखाकर फर्जी बैनामा कराया गया था। पीड़िता ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन कहीं सुनवाई न होने पर उन्होंने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत का रुख किया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधांशु शेखर उपाध्याय ने मामले की प्रारंभिक जांच के बाद यह आदेश पारित किया।
पीड़िता मनोरमा सिंह ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि आरोपियों ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इन दस्तावेजों के आधार पर एक ऐसी जमीन का बैनामा कराया गया, जिसकी चौहद्दी उनके मकान से संबंधित नहीं थी। इस फर्जीवाड़े का उद्देश्य उनके पैतृक मकान पर अवैध कब्जा करना था। पूर्व पार्षद मुरारी सिंह यादव के साथ विजय प्रताप सिंह, नीलू, मीनू सिंह, हेमंत कुमार, सुदामा सिंह, सुमित कुमार, इंद्र कुमार, किरन देवी, शंकर लाल, आनंद प्रताप, जय सिंह, विनीता, संदीप और नीरज सहित कुल 17 लोग इस मामले में आरोपी हैं।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधांशु शेखर उपाध्याय ने कोतवाली नगर पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। पुलिस को आदेश दिया गया है कि वह तीन दिन के भीतर इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करे। प्राथमिकी दर्ज करने के बाद अदालत को इसकी सूचना देना भी अनिवार्य है। यह आदेश पीड़िता की शिकायत पर प्रारंभिक जांच के बाद दिया गया है, जिसमें धोखाधड़ी के गंभीर आरोप हैं।
स्थायी लोक अदालत में 289 लंबित वाद, अब सप्ताह में तीन बैठकें
अयोध्या। स्थायी लोक अदालत में लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के निर्देश जारी किए गए हैं। अब प्रत्येक सप्ताह में तीन बैठकें आयोजित की जाएंगी।
स्थायी लोक अदालत के पीठासीन अधिकारी मनोज कुमार शुक्ला ने बताया कि बैठकें प्रत्येक सप्ताह सोमवार, मंगलवार और बुधवार को होंगी। अदालत में कुल 289 वाद लंबित हैं, जिनके शीघ्र निस्तारण के लिए यह कदम उठाया गया है। प्रत्येक बैठक में कम से कम पांच केसों को प्रभावी संचालन के लिए लिया जाएगा। यदि बैठक के दिन अवकाश होता है, तो अगले कार्यदिवस को बैठक आयोजित करना अनिवार्य होगा।
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पीड़िता मनोरमा सिंह ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रार्थना पत्र प्रस्तुत कर मुरारी सिंह यादव सहित 17 लोगों पर कूटरचित दस्तावेज बनाने और फर्जी बैनामा के आधार पर उनका मकान हड़पने का आरोप लगाया था। मनोरमा सिंह नाका हनुमान गढ़ी, कोतवाली नगर की निवासी हैं। उन्होंने बताया कि उनके पति राजकुमार सिंह ने सन् 1963 में किसुन लाल से जमीन का बैनामा लिया था। पति की मृत्यु के बाद से वह अपने परिवार के साथ उसी मकान में रह रही हैं। 30 जुलाई 2025 को उनके मकान पर कब्जा करने का प्रयास किया गया, जिसके बाद उन्हें धोखाधड़ी का पता चला। जानकारी मिली कि दूसरे स्थान की जमीन को उनके मकान की चौहद्दी दिखाकर फर्जी बैनामा कराया गया था। पीड़िता ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की थी, लेकिन कहीं सुनवाई न होने पर उन्होंने अधिवक्ता के माध्यम से अदालत का रुख किया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधांशु शेखर उपाध्याय ने मामले की प्रारंभिक जांच के बाद यह आदेश पारित किया।
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पीड़िता मनोरमा सिंह ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि आरोपियों ने मिलकर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इन दस्तावेजों के आधार पर एक ऐसी जमीन का बैनामा कराया गया, जिसकी चौहद्दी उनके मकान से संबंधित नहीं थी। इस फर्जीवाड़े का उद्देश्य उनके पैतृक मकान पर अवैध कब्जा करना था। पूर्व पार्षद मुरारी सिंह यादव के साथ विजय प्रताप सिंह, नीलू, मीनू सिंह, हेमंत कुमार, सुदामा सिंह, सुमित कुमार, इंद्र कुमार, किरन देवी, शंकर लाल, आनंद प्रताप, जय सिंह, विनीता, संदीप और नीरज सहित कुल 17 लोग इस मामले में आरोपी हैं।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधांशु शेखर उपाध्याय ने कोतवाली नगर पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं। पुलिस को आदेश दिया गया है कि वह तीन दिन के भीतर इस मामले में प्राथमिकी दर्ज करे। प्राथमिकी दर्ज करने के बाद अदालत को इसकी सूचना देना भी अनिवार्य है। यह आदेश पीड़िता की शिकायत पर प्रारंभिक जांच के बाद दिया गया है, जिसमें धोखाधड़ी के गंभीर आरोप हैं।
स्थायी लोक अदालत में 289 लंबित वाद, अब सप्ताह में तीन बैठकें
अयोध्या। स्थायी लोक अदालत में लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के निर्देश जारी किए गए हैं। अब प्रत्येक सप्ताह में तीन बैठकें आयोजित की जाएंगी।
स्थायी लोक अदालत के पीठासीन अधिकारी मनोज कुमार शुक्ला ने बताया कि बैठकें प्रत्येक सप्ताह सोमवार, मंगलवार और बुधवार को होंगी। अदालत में कुल 289 वाद लंबित हैं, जिनके शीघ्र निस्तारण के लिए यह कदम उठाया गया है। प्रत्येक बैठक में कम से कम पांच केसों को प्रभावी संचालन के लिए लिया जाएगा। यदि बैठक के दिन अवकाश होता है, तो अगले कार्यदिवस को बैठक आयोजित करना अनिवार्य होगा।