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राम मंदिर चढ़ावा चोरी: गोपाल राव से जिम्मेदारी छिनी, गिर सकती है गाज; सवाल- हर कार्रवाई में देरी पर देरी क्यों
Mon, 29 Jun 2026 03:14 PM IST
Bhupendra Singh
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ
Published by: Bhupendra Singh
Updated Mon, 29 Jun 2026 03:14 PM IST
सार
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले में गोपाल राव पर भी गंभीर आरोप लगे हैं। वह तीन दिन से अयोध्या में नहीं हैं। उनके दिल्ली बुलाए जाने की चर्चा है। गोपाल राव निर्माण सहायक हैं। वह बैठकों में शिरकत करते हैं। आगे पढ़ें पूरी खबर...
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राम मंदिर में दान की राशि के गबन की जांच जारी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राम मंदिर के निर्माण सहायक गोपाल राव से फिलहाल पूरी जिम्मेदारी ले ली गई है। जल्द उन पर गाज गिर सकती है। उनसे भी इस्तीफा लिया जा सकता है। जब से पुलिस ने कार्रवाई शुरू की है तब से गोपाल राव अयोध्या में नहीं है। उनको दिल्ली बुलाए जाने की चर्चा है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में गोपाल राव का नाम लगातार चर्चा में है। वह भले ही निर्माण सहायक हों लेकिन मंदिर प्रबंधन के प्रत्येक कार्य में उनकी भूमिका रहती थी। कुल मिलाकर चंपत और अनिल मिश्रा के साथ गोपाल राय हर एक निर्णय में शामिल रहते थे। वह ट्रस्ट की बैठक में भी शामिल होते थे। गोपाल के साथ उनके रिश्तेदार सोम पर भी कई आरोप लगे हैं। यहां तक कि सीधे तौर पर भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
सूत्रों के मुताबिक आरोपियों की गिरफ्तारी और चंपत-अनिल के इस्तीफे के बाद गोपाल राव से भी जिम्मेदारी छीन ली गई है। जल्द इसको लेकर बयान जारी हो सकता है। ट्रस्ट की जुलाई में होने वाली बैठक में उनके निर्माण सहायक के पद को लेकर भी फैसला हो सकता है। उधर एसआईटी व पुलिस दोनों उनकी भूमिका की जांच कर रही है। चढ़ावा चोरी से लेकर निर्माण के कमीशन व जमीन की फरोख्त को लेकर उन पर आरोप लग रहे हैं।
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राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में गोपाल राव का नाम लगातार चर्चा में है। वह भले ही निर्माण सहायक हों लेकिन मंदिर प्रबंधन के प्रत्येक कार्य में उनकी भूमिका रहती थी। कुल मिलाकर चंपत और अनिल मिश्रा के साथ गोपाल राय हर एक निर्णय में शामिल रहते थे। वह ट्रस्ट की बैठक में भी शामिल होते थे। गोपाल के साथ उनके रिश्तेदार सोम पर भी कई आरोप लगे हैं। यहां तक कि सीधे तौर पर भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
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सूत्रों के मुताबिक आरोपियों की गिरफ्तारी और चंपत-अनिल के इस्तीफे के बाद गोपाल राव से भी जिम्मेदारी छीन ली गई है। जल्द इसको लेकर बयान जारी हो सकता है। ट्रस्ट की जुलाई में होने वाली बैठक में उनके निर्माण सहायक के पद को लेकर भी फैसला हो सकता है। उधर एसआईटी व पुलिस दोनों उनकी भूमिका की जांच कर रही है। चढ़ावा चोरी से लेकर निर्माण के कमीशन व जमीन की फरोख्त को लेकर उन पर आरोप लग रहे हैं।
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सवाल: इतना गंभीर मामला....तो इस्तीफे पर फैसले के लिए बैठक का इंतजार क्यों
राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में चौतरफा भद्द पिटने के बाद चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा तो दिया है लेकिन उस पर फैसला नहीं हो सका है। ट्रस्ट का कहना है कि इस्तीफे पर फैसला बैठक में होगा। सवाल है कि इतने गंभीर मामले में कार्यवाही के लिए बैठक का इंतजार क्यों? क्या इसके पीछे मामले को शांत करने की मंशा है। ताकि अगले दो सप्ताह में मामला ठंडा हो जाए और फिर उस हिसाब से निर्णय लिया जाए।चढ़ावा चोरी का मामला उजागर होने के बाद से ही ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा सवालों से घिरे हुए थे। 20 दिनों तक मामले में लीपापोती होती रही। सूत्रों के मुताबिक, दोनों पदाधिकारियों से इस्तीफा मांगा गया था. लेकिन वह देने को तैयार नहीं हो रहे थे। जब दबाव हद से अधिक हो गया तब जाकर इस्तीफा दिया। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने इस संबंध में पत्र जारी किया था। जिसमें ये भी लिखा था कि इस्तीफे पर न्यास की अगली बैठक में चर्चा की जाएगी। इसको लेकर अब सवाल खड़े हो रहे हैं।