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Ayodhya News: हीट वेब के लिए जिले में अलर्ट, 85 बेड आरक्षित
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Thu, 16 Apr 2026 10:09 PM IST
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अयोध्या। लू (हीट वेब) को लेकर स्वास्थ्य महकमा अलर्ट हो गया है। जिला स्तरीय अस्पतालों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों तक कोल्ड रूम बनाकर 85 बेड आरक्षित किए गए हैं। हर समय चिकित्सकीय उपकरणों व जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित कराने का निर्देश है।
विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान 37 डिग्री से अधिक होने पर लू का खतरा बढ़ने लगता है। इन दिनों जिले का तापमान इससे कहीं ज्यादा है। ऐसे में विभाग ने लू से निपटने के लिए कमर कस ली है। जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि 14 सीएचसी पर चार-चार बेड आरक्षित करके कोल्ड रूम बनाया गया है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में 15, जिला अस्पताल में आठ और श्रीराम अस्पताल में छह बेड के वार्ड आरक्षित किए गए हैं। जिला स्तरीय अस्पतालों के रिजर्व वार्ड को एसी से लैस किया गया है।
इन परिस्थितियों में अधिक रहता है खतरा
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. प्रशांत द्विवेदी ने बताया कि शरीर में पानी, नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। शराब की लत, हृदय रोग पुरानी बीमारियों, मोटापा, अनियंत्रित मधुमेह आदि से प्रभावित लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। त्वचा गर्म, लाल या शुष्क होना, पसीना न आना, धड़कन तेज होना, श्वास गति में तेजी, व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति, सिरदर्द, मितली, थकान और कमजोरी, चक्कर आना, मूत्र न होना या इसमें कमी आदि इसके लक्षण हैं। इससे शरीर के आंतरिक अंगों विशेष रूप से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है और शरीर में उच्च रक्तचाप उत्पन्न होता है। हृदय के कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे बचाव के लिए समय-समय पर पानी पीएं, हल्के रंग के पसीना शोषित करने वाले हल्के वस्त्र पहनें, धूप के चश्मे, छाता, टोपी व चप्पल का प्रयोग करें, खुले में कार्य करते समय सिर, चेहरा, हाथ-पैर को गीले कपड़े से ढंके रहें और छाते का प्रयोग करें। लू से प्रभावित व्यक्ति को छाया में लिटाकर सूती गीले कपड़े से पोछें या नहलाएं। यात्रा करते समय पीने का पानी अपने साथ रखें।
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विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान 37 डिग्री से अधिक होने पर लू का खतरा बढ़ने लगता है। इन दिनों जिले का तापमान इससे कहीं ज्यादा है। ऐसे में विभाग ने लू से निपटने के लिए कमर कस ली है। जिला एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. अरविंद श्रीवास्तव ने बताया कि 14 सीएचसी पर चार-चार बेड आरक्षित करके कोल्ड रूम बनाया गया है। इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में 15, जिला अस्पताल में आठ और श्रीराम अस्पताल में छह बेड के वार्ड आरक्षित किए गए हैं। जिला स्तरीय अस्पतालों के रिजर्व वार्ड को एसी से लैस किया गया है।
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इन परिस्थितियों में अधिक रहता है खतरा
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. प्रशांत द्विवेदी ने बताया कि शरीर में पानी, नमक की कमी होने पर लू लगने का खतरा ज्यादा रहता है। शराब की लत, हृदय रोग पुरानी बीमारियों, मोटापा, अनियंत्रित मधुमेह आदि से प्रभावित लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। त्वचा गर्म, लाल या शुष्क होना, पसीना न आना, धड़कन तेज होना, श्वास गति में तेजी, व्यवहार में परिवर्तन, भ्रम की स्थिति, सिरदर्द, मितली, थकान और कमजोरी, चक्कर आना, मूत्र न होना या इसमें कमी आदि इसके लक्षण हैं। इससे शरीर के आंतरिक अंगों विशेष रूप से मस्तिष्क को नुकसान पहुंचता है और शरीर में उच्च रक्तचाप उत्पन्न होता है। हृदय के कार्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इससे बचाव के लिए समय-समय पर पानी पीएं, हल्के रंग के पसीना शोषित करने वाले हल्के वस्त्र पहनें, धूप के चश्मे, छाता, टोपी व चप्पल का प्रयोग करें, खुले में कार्य करते समय सिर, चेहरा, हाथ-पैर को गीले कपड़े से ढंके रहें और छाते का प्रयोग करें। लू से प्रभावित व्यक्ति को छाया में लिटाकर सूती गीले कपड़े से पोछें या नहलाएं। यात्रा करते समय पीने का पानी अपने साथ रखें।

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