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Ayodhya News: मुलायम सरकार में रामभक्ति का अपराध करने वाले भी होंगे सम्मानित
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Mon, 16 Mar 2026 07:55 PM IST
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जेल से रिहा होने वालों को मुलायम सरकार की ओर से जारी प्रमाणपत्र।
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डॉ. बृजेश कुमार सिंह
अयोध्या। राम मंदिर में 19 मार्च को आयोजित नव संवत्सर कार्यक्रम कई मायने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दिन श्रीराम जन्मभूमि (भगवान राम) के लिए संघर्ष करने वाले संघर्ष के साथियों को राम मंदिर ट्रस्ट सम्मानित करेगा। इसमें कई ऐसे लोग भी शामिल होंगे जिन्हें तत्कालीन मुलायम सरकार में रामभक्ति का अपराध करने का प्रमाणपत्र जारी किया था। ऐसे लोग आंदोलन के दौरान जेल में बंद हुए थे और रिहाई के वक्त तत्कालीन जेलर की ओर से उन्हें प्रमाणपत्र जारी किया गया था।
राम मंदिर बनने के बाद पहली बार संघर्ष के साथियों को खोजकर सम्मानित करने की ट्रस्ट ने पहल की। पुराने उत्तर प्रदेश (अब के उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड) के कारसेवकों व राम मंदिर आंदोलन में संघर्ष करने वालों को खोजा गया। ट्रस्ट ने ऐसे लोगों को 19 मार्च को आयोजित कार्यक्रम में निमंत्रित करने का फैसला किया। इसके तहत पुराने लोगों को खोजा जाने लगा। ट्रस्ट के फैसले की जानकारी मिलने के बाद कई लोगों ने ट्रस्ट कार्यालय पर भी संपर्क साधा। उन्होंने संघर्ष में शामिल होने का सबूत दिया। कुछ ऐसे लोगों ने भी संपर्क किया जिनके पास तत्कालीन सरकार की ओर से जारी रामभक्ति में चालान का प्रमाणपत्र है। ऐसे लोगों को ट्रस्ट ने सहर्ष भाव से कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों की सूची में शामिल कर लिया। ट्रस्ट के सूत्रों ने बताया कि ऐसे लोगों की सटीक संख्या तो बता पाना संभव नहीं है, लेकिन रामभक्ति में चालान करने वाले प्रमाणपत्र प्राप्त हुए हैं। ऐसे लोगों के प्रमाणपत्र पर नाम, पता, पिता का नाम, धारा 107/116, रामभक्ति में चालान और जेल में दाखिल होने और छूटने की तारीख अंकित है।
भूमिगत होने के बाद शुरू हुआ था जेल भरो आंदोलन
राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अधिकांश लोग बताते हैं कि भाजपा के दिग्गज लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या की रथयात्रा निकाली थी। बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने यात्रा को रोककर आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद आंदोलनकारियों में आक्रोश व्याप्त हो गया। उत्तर प्रदेश में भी सख्ती कर दी गई। आंदोलनकारी भूमिगत हो गए। बाद में संगठन के उच्चाधिकारियों के आदेश पर जेल भरो आंदोलन शुरू किया गया।
इसके तहत भारी तादाद में जगह-जगह गिरफ्तारियां दी गईं। तत्कालीन सरकार की ओर से जेल से रिहा होने वाले लोगों को प्रमाणपत्र दिया गया। इसमें रामभक्ति में चालान का जिक्र है। महात्मा गांधी काशी विद्यालय वाराणसी के महामना मालवीय पत्रकारिता संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. ओमप्रकाश सिंह को भी ट्रस्ट का निमंत्रण मिला है। वह निमंत्रण से आह्लादित हैं। कहते हैं कि उन्होंने रामलला के टेंट में रहने से लेकर भव्य मंदिर में विराजमान होने तक समय देखा है। उम्मीद थी कि राम मंदिर जरूर बनेगा, लेकिन इतना भव्य बनेगा यह कल्पना नहीं थी।
संघर्ष में शामिल लोगों का तैयार होगा डेटा बेस
ट्रस्ट सूत्रों का कहना है कि आयोजन में सीमित संख्या में शामिल होने की बाध्यता की वजह से संघर्ष में शामिल कई साथियों को मौका नहीं मिल पाया है। ऐसे में इन लोगों का डेटा बेस तैयार किया जाना आवश्यक है। ट्रस्ट की योजना है कि संघर्ष में शामिल लोगों को तलाशने का काम आगे भी जारी रखा जाएगा। इसमें केवल उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रदेशों में रहने वालों को भी शामिल किया जाएगा। 19 मार्च को जो लोग सम्मानित नहीं हो सकेंगे, उन्हें अन्य कार्यक्रमों में शामिल किया जा सकता है या ट्रस्ट की ओर से पत्र भेजकर उनका आभार ज्ञापित किया जा सकता है।
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अयोध्या। राम मंदिर में 19 मार्च को आयोजित नव संवत्सर कार्यक्रम कई मायने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दिन श्रीराम जन्मभूमि (भगवान राम) के लिए संघर्ष करने वाले संघर्ष के साथियों को राम मंदिर ट्रस्ट सम्मानित करेगा। इसमें कई ऐसे लोग भी शामिल होंगे जिन्हें तत्कालीन मुलायम सरकार में रामभक्ति का अपराध करने का प्रमाणपत्र जारी किया था। ऐसे लोग आंदोलन के दौरान जेल में बंद हुए थे और रिहाई के वक्त तत्कालीन जेलर की ओर से उन्हें प्रमाणपत्र जारी किया गया था।
राम मंदिर बनने के बाद पहली बार संघर्ष के साथियों को खोजकर सम्मानित करने की ट्रस्ट ने पहल की। पुराने उत्तर प्रदेश (अब के उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड) के कारसेवकों व राम मंदिर आंदोलन में संघर्ष करने वालों को खोजा गया। ट्रस्ट ने ऐसे लोगों को 19 मार्च को आयोजित कार्यक्रम में निमंत्रित करने का फैसला किया। इसके तहत पुराने लोगों को खोजा जाने लगा। ट्रस्ट के फैसले की जानकारी मिलने के बाद कई लोगों ने ट्रस्ट कार्यालय पर भी संपर्क साधा। उन्होंने संघर्ष में शामिल होने का सबूत दिया। कुछ ऐसे लोगों ने भी संपर्क किया जिनके पास तत्कालीन सरकार की ओर से जारी रामभक्ति में चालान का प्रमाणपत्र है। ऐसे लोगों को ट्रस्ट ने सहर्ष भाव से कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों की सूची में शामिल कर लिया। ट्रस्ट के सूत्रों ने बताया कि ऐसे लोगों की सटीक संख्या तो बता पाना संभव नहीं है, लेकिन रामभक्ति में चालान करने वाले प्रमाणपत्र प्राप्त हुए हैं। ऐसे लोगों के प्रमाणपत्र पर नाम, पता, पिता का नाम, धारा 107/116, रामभक्ति में चालान और जेल में दाखिल होने और छूटने की तारीख अंकित है।
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भूमिगत होने के बाद शुरू हुआ था जेल भरो आंदोलन
राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अधिकांश लोग बताते हैं कि भाजपा के दिग्गज लालकृष्ण आडवाणी ने सोमनाथ से अयोध्या की रथयात्रा निकाली थी। बिहार में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने यात्रा को रोककर आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद आंदोलनकारियों में आक्रोश व्याप्त हो गया। उत्तर प्रदेश में भी सख्ती कर दी गई। आंदोलनकारी भूमिगत हो गए। बाद में संगठन के उच्चाधिकारियों के आदेश पर जेल भरो आंदोलन शुरू किया गया।
इसके तहत भारी तादाद में जगह-जगह गिरफ्तारियां दी गईं। तत्कालीन सरकार की ओर से जेल से रिहा होने वाले लोगों को प्रमाणपत्र दिया गया। इसमें रामभक्ति में चालान का जिक्र है। महात्मा गांधी काशी विद्यालय वाराणसी के महामना मालवीय पत्रकारिता संस्थान के पूर्व निदेशक प्रो. ओमप्रकाश सिंह को भी ट्रस्ट का निमंत्रण मिला है। वह निमंत्रण से आह्लादित हैं। कहते हैं कि उन्होंने रामलला के टेंट में रहने से लेकर भव्य मंदिर में विराजमान होने तक समय देखा है। उम्मीद थी कि राम मंदिर जरूर बनेगा, लेकिन इतना भव्य बनेगा यह कल्पना नहीं थी।
संघर्ष में शामिल लोगों का तैयार होगा डेटा बेस
ट्रस्ट सूत्रों का कहना है कि आयोजन में सीमित संख्या में शामिल होने की बाध्यता की वजह से संघर्ष में शामिल कई साथियों को मौका नहीं मिल पाया है। ऐसे में इन लोगों का डेटा बेस तैयार किया जाना आवश्यक है। ट्रस्ट की योजना है कि संघर्ष में शामिल लोगों को तलाशने का काम आगे भी जारी रखा जाएगा। इसमें केवल उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के ही नहीं, बल्कि विभिन्न प्रदेशों में रहने वालों को भी शामिल किया जाएगा। 19 मार्च को जो लोग सम्मानित नहीं हो सकेंगे, उन्हें अन्य कार्यक्रमों में शामिल किया जा सकता है या ट्रस्ट की ओर से पत्र भेजकर उनका आभार ज्ञापित किया जा सकता है।