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Ayodhya News: भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने कराई थी नागेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना
Sun, 02 Aug 2026 09:18 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Sun, 02 Aug 2026 09:18 PM IST
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नागेश्वरनाथ मंदिर में विराजमान शिवलिंग।
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अयोध्या। राम की पैड़ी के निकट स्थित प्राचीन नागेश्वरनाथ मंदिर अयोध्या के सबसे प्राचीन और पूजनीय शिवालयों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर की स्थापना भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने कराई थी।
सावन मास और महाशिवरात्रि के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक और दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार कुश सरयू नदी में स्नान कर रहे थे। उसी दौरान उनकी बांह का कड़ा नदी में गिर गया।
वह कड़ा नागराज कुमुद को मिला, जिन्होंने उसे अपनी पुत्री को उपहार स्वरूप दे दिया। जब कुश ने कड़ा वापस मांगा तो नागराज ने यह कहकर मना कर दिया कि बेटी को दिया गया उपहार वापस नहीं लिया जाता। इस बात से क्रोधित होकर कुश ने नागवंश के विनाश का संकल्प लिया।
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संकट की घड़ी में नागराज ने भगवान शिव का स्मरण किया। भगवान शिव प्रकट हुए और कुश को शांत कर विवाद समाप्त कराया। इसके बाद भगवान शिव की प्रेरणा से नागराज कुमुद की पुत्री का विवाह कुश के साथ हुआ। कहा जाता है कि कुश ने भगवान शिव से अयोध्या में ही निवास करने का आग्रह किया।
भक्त की प्रार्थना स्वीकार करते हुए भगवान शिव वहीं विराजमान हो गए। जिस स्थान पर भगवान शिव प्रकट हुए थे, उसी स्थल पर कुश ने नागेश्वरनाथ मंदिर का निर्माण कराया। आज भी यह मंदिर अयोध्या की धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
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अयोध्या। राम की पैड़ी के निकट स्थित प्राचीन नागेश्वरनाथ मंदिर अयोध्या के सबसे प्राचीन और पूजनीय शिवालयों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर की स्थापना भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने कराई थी।
सावन मास और महाशिवरात्रि के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक और दर्शन के लिए पहुंचते हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार कुश सरयू नदी में स्नान कर रहे थे। उसी दौरान उनकी बांह का कड़ा नदी में गिर गया।
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वह कड़ा नागराज कुमुद को मिला, जिन्होंने उसे अपनी पुत्री को उपहार स्वरूप दे दिया। जब कुश ने कड़ा वापस मांगा तो नागराज ने यह कहकर मना कर दिया कि बेटी को दिया गया उपहार वापस नहीं लिया जाता। इस बात से क्रोधित होकर कुश ने नागवंश के विनाश का संकल्प लिया।
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संकट की घड़ी में नागराज ने भगवान शिव का स्मरण किया। भगवान शिव प्रकट हुए और कुश को शांत कर विवाद समाप्त कराया। इसके बाद भगवान शिव की प्रेरणा से नागराज कुमुद की पुत्री का विवाह कुश के साथ हुआ। कहा जाता है कि कुश ने भगवान शिव से अयोध्या में ही निवास करने का आग्रह किया।
भक्त की प्रार्थना स्वीकार करते हुए भगवान शिव वहीं विराजमान हो गए। जिस स्थान पर भगवान शिव प्रकट हुए थे, उसी स्थल पर कुश ने नागेश्वरनाथ मंदिर का निर्माण कराया। आज भी यह मंदिर अयोध्या की धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख केंद्र माना जाता है।