राम मंदिर चढ़ावा चोरी: SBI-ट्रस्ट MoU की धज्जियां उड़ी, गिनती में अनियमितताओं से खुला खेल; हर चरम पर लापरवाही
राम मंदिर चढ़ावा गिनती के लिए ट्रस्ट और एसबीआई के बीच हुए एमओयू के कई सुरक्षा एवं पारदर्शिता संबंधी प्रावधानों का पालन नहीं हुआ। रोटेशन, तलाशी, रिकॉर्ड सत्यापन और निगरानी में लापरवाही से कथित हेराफेरी का रास्ता खुला। मामला उजागर होने के बाद ड्रेस कोड, नियमित जांच और वीडियोग्राफी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं।
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विस्तार
राम मंदिर के दान-पात्रों से निकलने वाली राशि की गिनती को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बीच विस्तृत कार्यप्रणाली तय की गई थी। इस समझौते में दोनों पक्षों की जिम्मेदारियां अलग-अलग निर्धारित थीं, ताकि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे। लेकिन अधिकांश दिशा-निर्देशों का नियमित पालन नहीं हुआ, जिससे दानराशि में हेराफेरी का रास्ता खुल गया।
सूत्रों के अनुसार श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बीच फरवरी 2025 में एक समझौता (एमओयू) हुआ था। उस समझौते में ट्रस्ट और बैंक की अलग-अलग जिम्मेदारियां तय थीं। हम एमओयू की पूरी जानकारी आपको देने जा रहे हैं।
समझौते के अनुसार दान-पात्र और गिनती कक्ष ट्रस्ट व एसबीआई के अधिकारियों की संयुक्त मौजूदगी में संचालित होने थे, कर्मियों के लिए ड्रेस कोड निर्धारित था, लेकिन यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू नहीं हुई।
समझौते के अनुसार हर महीने अधिकारियों के रोटेशन का प्रावधान था, लेकिन कुछ कर्मचारी लंबे समय तक एक ही व्यवस्था में कार्य करते रहे। गिनती कक्ष में आने-जाने वाले कर्मचारियों की नियमित या रैंडम तलाशी का निर्देश था, लेकिन यह व्यवस्था सख्ती से लागू नहीं की गई। हर दान-पात्र की राशि अलग-अलग दर्ज करने और क्रमवार गिनती का नियम था।
सूत्रों के अनुसार इसका भी पूरी तरह पालन नहीं हुआ। दैनिक रिपोर्टिंग, जमा परचियों और रजिस्टरों पर सत्यापन के स्पष्ट निर्देश थे, लेकिन एसआईटी की जांच रिपोर्ट में रिकॉर्ड के रखरखाव और सत्यापन को लेकर भी सवाल उठे हैं।
...तो पकड़ी जा सकती थी गड़बड़ी
समझौते के अनुसार, अनावश्यक कैश-होल्डिंग रोकने के लिए नियमित समीक्षा होनी थी। यदि यह व्यवस्था प्रभावी होती तो गड़बड़ी का पता पहले चल सकता था लेकिन इसका भी अनुपालन नहीं हुआ। पूरी प्रक्रिया की निगरानी ट्रस्ट की जिम्मेदारी थी, लेकिन जांच में सामने आया है कि निगरानी तंत्र उतना प्रभावी नहीं रहा, जितना समझौते में तय किया गया था।
किरकिरी हो गई...तब बदली व्यवस्था
अब जब चढ़ावा चोरी जैसा मामला सामने आ चुका है और आठ लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है, तब जाकर समझौते के प्रावधानों के अनुसार व्यवस्था लागू हुई है। इस समय दान गणना में कुल 39 कर्मी लगे हैं।
चोरी के मामले में छह जेल जा चुके हैं। पहले इनकी संख्या 45 थी। समझौते के शुरुआती दौर में कुल 22 कर्मी गणना के लिए लगाए गए थे, लेकिन जब चढ़ावा रोजाना एक करोड़ तक आने लगा तब इनकी संख्या बढ़ाकर दोगुनी कर दी गई। अब कर्मियों की नियमित चेकिंग हो रही है, ड्रेस कोड लागू है। कंट्रोल रूम से निगरानी के लिए चार कर्मी अलग से लगाए गए हैं। रोजाना वीडियोग्राफी हो रही है।
एमओयू में थी अलग-अलग जिम्मेदारियां
एसबीआई की जिम्मेदारी
दान-पात्र से प्राप्त राशि को तय अंतराल पर ट्रस्ट के बैंक खाते में जमा कराना।
पूरी गणना प्रक्रिया का संचालन निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार कराना।
नोट गिनने वाली मशीनों के सही संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी।
अनावश्यक नकदी जमा न रहे, इसकी नियमित समीक्षा करना।
गणना में लगे कर्मचारियों की नियुक्ति और निगरानी करना।
बैंक अधिकारियों का हर माह रोटेशन सुनिश्चित करना।
ट्रस्ट की जिम्मेदारी
पूरी गणना प्रक्रिया की निगरानी कर पारदर्शिता और प्रमाणिकता बनाए रखना।
नकद जमा पर्ची, चालान और अन्य अभिलेखों पर हस्ताक्षर कर लेन-देन का सत्यापन करना।
गिनती में लगे कर्मचारियों के लिए आवश्यक सुविधाएं और कार्य वातावरण उपलब्ध कराना।
संयुक्त जिम्मेदारी
दान-पात्र प्रतिदिन ट्रस्ट और एसबीआई के नामित अधिकारियों की संयुक्त मौजूदगी में खोलना।
गिनती कक्ष को संयुक्त जिम्मेदारी के तहत खोलना और उसका संचालन सुनिश्चित करना।