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Ayodhya News: संघर्ष से चैंपियन बनी बेटियां, अयोध्या की 11 खिलाड़ियों ने देशभर में बढ़ाया जिले का मान

Sun, 02 Aug 2026 09:22 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या Updated Sun, 02 Aug 2026 09:22 PM IST
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Struggles have made daughters champions; 11 players from Ayodhya have brought glory to the district nationwide
जीत का जश्न-यह चित्र जीजीआईसी के खेल मैदान का है। रविवार को जब टीम यहाँ पहुँची, तो खिलाड़ियों न
अयोध्या। राजस्थान के जयपुर में 28 से 31 जुलाई तक आयोजित ऑल इंडिया टेनिस बॉल क्रिकेट चैंपियनशिप में उत्तर प्रदेश की बालिका टीम ने लगातार सातवीं बार राष्ट्रीय खिताब जीतकर इतिहास रच दिया। 16 सदस्यीय विजेता टीम में अयोध्या की 11 खिलाड़ियों की मौजूदगी जिले के लिए गर्व का विषय है।
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फाइनल मुकाबला उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के मध्य खेला गया। इसमें उत्तर प्रदेश ने 10 ओवर में 86 रन बनाया, वहीं लक्ष्य का पीछा करने उतरी तमिलनाडु की टीम 10 ओवर में 56 रन ही बना सकी। इन खिलाड़ियों की सफलता के पीछे संघर्ष, पारिवारिक चुनौतियां और लगातार मेहनत की प्रेरक कहानी छिपी है।
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मुस्कान जायसवाल व छवि जायसवाल मोदहा की रहने वाली हैं। इनके पिता संजय जायसवाल पहले ठेला चलाते थे, लेकिन मोदहा ओवरब्रिज बनने के बाद उनका रोजगार बंद हो गया। माता बिंदु जायसवाल गृहिणी हैं। तीन बहनों में मुस्कान दूसरे स्थान पर हैं। बड़ी बहन की शादी हो चुकी है और दोनों छोटी बहनें खेल से जुड़ी हैं। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद दोनों बहनों ने राष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहचान बनाई।
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ऋषिका तिवारी गायत्री नगर, अब्बूसराय की रहने वाली हैं। पिता सुनील तिवारी की जनरल स्टोर की दुकान थी, जो अब बंद हो चुकी है। माता उर्मिता तिवारी गृहिणी हैं। परिवार में एक भाई स्वतंत्र तिवारी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद ऋषिका ने खेल में निरंतर मेहनत कर राष्ट्रीय स्तर पर जगह बनाई। दिव्यानी सिंह सिविल लाइंस की रहने वाली हैं। उनके पिता धर्मेंद्र सिंह खेल शिक्षक हैं और माता नीलम सिंह गृहिणी। बड़े भाई देवेंद्र सिंह नेताजी सुभाष राष्ट्रीय खेल संस्थान (एनआईएस) से प्रशिक्षित हैंडबॉल खिलाड़ी हैं। खेल का माहौल मिलने से दिव्यानी ने भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।

विपरीत परिस्थित में भी नीलम ने नहीं हारी हिम्मत
नीलम निषाद गुप्तारघाट की रहने वाली हैं। उनके पिता राम कुमार निषाद का वर्ष 2016 में और माता राजकुमारी निषाद का वर्ष 2022 में निधन हो गया। तीन भाइयों और दो बहनों में सबसे छोटी नीलम ने विपरीत परिस्थितियों में भी हिम्मत नहीं हारी और राष्ट्रीय चैंपियन टीम की अहम सदस्य बनीं। विधि यादव के पिता हरनाम यादव फास्ट फूड की दुकान चलाते हैं व माता पार्वती यादव गृहिणी हैं। विधि सदर बाजार स्थित अपनी मौसी के घर रहकर पढ़ाई और खेल का अभ्यास करती हैं। चार बहनों में दूसरे स्थान पर हैं। उनके एक भाई कृष्णा यादव कक्षा 12 के छात्र हैं।

नंदिनी नियांवा की रहने वाली हैं। पिता इंद्रभान निषाद मत्स्य विभाग में कार्यरत हैं तथा माता सीमा गृहिणी हैं। बहन कोमल निषाद और भाई देवेंद्र निषाद पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार के सहयोग से नंदिनी ने राष्ट्रीय स्तर तक का सफर तय किया। राशिका शिवनगर कॉलोनी, सहादतगंज की रहने वाली हैं। पिता अश्वनी निजी शिक्षक व माता अनीता भी निजी शिक्षिका हैं। एक भाई और दो बहनों में राशिका सबसे छोटी हैं। पढ़ाई के साथ खेल में भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई। सांभवी गद्दोपुर की रहने वाली हैं। उनके पिता आशुतोष सिंह अधिवक्ता हैं व माता भावना सिंह गृहिणी हैं। तीन बहनों में सांभवी दूसरे स्थान पर हैं और लगातार मेहनत के दम पर राष्ट्रीय विजेता टीम तक पहुंची।

मेहनत के बल पर प्रीति ने बनाई पहचान
प्रीति सहादतगंज की रहने वाली हैं। उनके पिता तूफानी तालाब में मत्स्य पालन की देखरेख का कार्य करते हैं। माता पानमती गृहिणी हैं। दो भाई राज और रंजीत पढ़ाई कर रहे हैं। परिवार की इकलौती बेटी प्रीति ने मेहनत के दम पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। शालिनी सिंह मानापुर की रहने वाली हैं। उनके पिता नीरज सिंह किसान हैं व माता राधा सिंह गृहिणी हैं। एक भाई ओम सिंह और तीन बहनों में शालिनी सबसे छोटी हैं। एक बहन की शादी हो चुकी है, जबकि दूसरी बहन पढ़ाई कर रही हैं। खेती-किसानी वाले परिवार से निकलकर शालिनी ने राष्ट्रीय चैंपियन टीम में अपनी जगह बनाई। अयोध्या की इन 11 बेटियों ने साबित कर दिया कि संघर्ष चाहे जितना बड़ा हो, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो सफलता जरूर मिलती है।
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