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Ayodhya News: अपना पक्ष रखने को सुमेरपुर प्रधान को नोटिस
संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
Updated Fri, 06 Mar 2026 08:39 PM IST
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मिल्कीपुर। आंगनबाड़ी भवन और रिसोर्स रिकवरी सेंटर के निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए उच्च न्यायालय के आदेश के बाद प्रशासनिक कार्रवाई तेज हो गई है। एसडीएम मिल्कीपुर ने ग्राम प्रधान सुमेरपुर को जिलाधिकारी कार्यालय में नौ मार्च को अपना पक्ष रखने की नोटिस भेजा है। उच्च न्यायालय ने जिलाधिकारी अयोध्या को तीन सप्ताह में इस प्रकरण का निस्तारण कर निर्माण कार्य सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया था।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब एक फरवरी को ग्राम प्रधान आदर्श श्रीवास्तव का मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने आत्मदाह करने का वीडियो वायरल हुआ। प्रधान ने आरोप लगाया था कि सरकारी जमीन पर आंगनबाड़ी भवन का निर्माण नहीं हो पा रहा, जबकि उसी भूखंड में अन्य लोग अवैध निर्माण कर रहे हैं। मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में आने के बाद अवैध निर्माण पर रोक लगी थी। शुक्रवार को ग्राम प्रधान ने बताया कि सरकारी भूमि पर आंगनबाड़ी भवन व रिसोर्स रिकवरी सेंटर के निर्माण का प्रस्ताव किया गया था। स्वीकृति और धनराशि मिलने पर मार्च 2025 में निर्माण कार्य शुरू कराया गया। जिसे गांव की मंजू ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर निर्मित दीवार को गिरा दिया और उल्टे प्रधान व उनके भाइयों सहित कार्य कर रहे मजदूरों के विरुद्ध रिपोर्ट भी दर्ज करा दी। भूमि को विवादित बताकर पुलिस व राजस्व द्वारा निर्माण कार्य रोके जाने से क्षुब्ध होकर ग्राम प्रधान ने सितंबर 2025 में उच्च न्यायालय की शरण ली। 27 फरवरी 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने जिलाधिकारी को तीन सप्ताह में प्रकरण को निस्तारित कर आंगनबाड़ी भवन निर्माण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
ग्राम प्रधान आदर्श श्रीवास्तव का आरोप है कि मंजू पासी ने ग्राम सभा की जमीन पर दो मकान बनाए हैं। इसके अलावा मंजू ने घूर गड्ढे, नवीन परती और चकमार्ग पर भी अवैध कब्जा किया है। इसकी शिकायत कई बार लेखपाल से लेकर उच्चाधिकारियों से की गई, परंतु खाली कराने के बजाय प्रधान और उनके परिवार के विरुद्ध रिपोर्ट ही दर्ज किए गए।
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यह मामला तब सुर्खियों में आया जब एक फरवरी को ग्राम प्रधान आदर्श श्रीवास्तव का मुख्यमंत्री कार्यालय के सामने आत्मदाह करने का वीडियो वायरल हुआ। प्रधान ने आरोप लगाया था कि सरकारी जमीन पर आंगनबाड़ी भवन का निर्माण नहीं हो पा रहा, जबकि उसी भूखंड में अन्य लोग अवैध निर्माण कर रहे हैं। मामला जिलाधिकारी के संज्ञान में आने के बाद अवैध निर्माण पर रोक लगी थी। शुक्रवार को ग्राम प्रधान ने बताया कि सरकारी भूमि पर आंगनबाड़ी भवन व रिसोर्स रिकवरी सेंटर के निर्माण का प्रस्ताव किया गया था। स्वीकृति और धनराशि मिलने पर मार्च 2025 में निर्माण कार्य शुरू कराया गया। जिसे गांव की मंजू ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर निर्मित दीवार को गिरा दिया और उल्टे प्रधान व उनके भाइयों सहित कार्य कर रहे मजदूरों के विरुद्ध रिपोर्ट भी दर्ज करा दी। भूमि को विवादित बताकर पुलिस व राजस्व द्वारा निर्माण कार्य रोके जाने से क्षुब्ध होकर ग्राम प्रधान ने सितंबर 2025 में उच्च न्यायालय की शरण ली। 27 फरवरी 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने जिलाधिकारी को तीन सप्ताह में प्रकरण को निस्तारित कर आंगनबाड़ी भवन निर्माण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
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ग्राम प्रधान आदर्श श्रीवास्तव का आरोप है कि मंजू पासी ने ग्राम सभा की जमीन पर दो मकान बनाए हैं। इसके अलावा मंजू ने घूर गड्ढे, नवीन परती और चकमार्ग पर भी अवैध कब्जा किया है। इसकी शिकायत कई बार लेखपाल से लेकर उच्चाधिकारियों से की गई, परंतु खाली कराने के बजाय प्रधान और उनके परिवार के विरुद्ध रिपोर्ट ही दर्ज किए गए।
