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Ghazipur News: मेडिकल कॉलेज में वार्ड बॉय होने के मरीजों को ले जा रहे तीमारदार
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शहर के गोराबाजार स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल में व्हील चेयर से मरीज को ले जाते परिजनन। संवाद
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गाजीपुर। शहर के गोराबाजार स्थित महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय के अस्पताल में सुविधाओं के दावे हकीकत से मेल नहीं खा रहे हैं। तीनों अस्पताल को मिलाकर 29 वार्ड में करीब 600 बेड की व्यवस्था होने और करीब 175 वार्ड बॉय तैनात होने के बावजूद मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर पर ले जाने के लिए अटेंडेंट तक उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में तीमारदार ही मरीजों को खींचते हुए वार्ड और जांच कक्षों तक ले जाने को विवश हैं।
मेडिकल कॉलेज के पुराने भवन में 200 और नवनिर्मित भवन में 300 बेड की व्यवस्था है, जबकि महिला अस्पताल में 100 बेड़ है। इसके बावजूद कई वार्डों में भर्ती मरीजों को जांच के लिए ले जाने में परिजनों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। जानकारी के अभाव में तीमारदार मरीजों को लेकर अस्पताल में इधर-उधर भटकते हुए जांच कक्ष और वार्ड का रास्ता पूछते नजर आते हैं। नवनिर्मित अस्पताल के महिला वार्ड में भर्ती औरंगाबाद निवासी सुमन देवी के पति राम खेलावन ने बताया कि उनकी पत्नी को सर्जरी कक्ष में ले जाने के लिए बार-बार पुराने अस्पताल जाना पड़ता है, लेकिन अस्पताल की ओर से कोई अटेंडेंट उपलब्ध नहीं कराया जाता। मजबूरी में उन्हें परिजनों को बुलाकर मरीज को ले जाना पड़ता है। सर्जरी कक्ष ढूंढने में भी काफी दिक्कत हुई।
इसी तरह शहर से सटे रौजा निवासी विनोद ने बताया कि उनके भाई चंदन को टीबी वार्ड में भर्ती कराया गया है। एक्स-रे कराने के लिए उन्हें स्ट्रेचर या व्हीलचेयर से नीचे स्थित कक्ष तक ले जाना पड़ता है। अटेंडेंट न मिलने के कारण वह खुद या उनकी बुजुर्ग मां मरीज को ले जाने को विवश हैं।
वहीं, बृहस्पतिवार को आपात कक्ष पहुंचे करीमुद्दीनपुर निवासी मनीष कुमार को डॉक्टरों ने सर्जिकल वार्ड में भर्ती करने की सलाह दी। अटेंडेंट नहीं मिलने पर परिजन ही उन्हें स्ट्रेचर पर लेकर लोगों से वार्ड का रास्ता पूछते हुए पहुंचे और भर्ती कराया। अस्पताल में इस तरह की स्थिति से मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
मिश्रवलिया के महेश ने बताया कि अपने भाई रविंद्र को लेकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर आए थे। बताया कि उनके भाई का पैर टूटा था। उन्होंने अपने भाई को हड्डी वार्ड में भर्ती कराया था। बृहस्पतिवार को एक्सरे कराने के लिए वह काफी परेशान थे। कोई वार्ड बॉय नहीं मिलने पर खुद ही परिजनों की मदद से स्ट्रेचर पर अपने भाई को लेकर एक्सरे रुम तक गए और एक्सरे कराया।
मेडिकल कॉलेज में वार्ड बॉय ही मरीजों को लेकर जाते है। कभी मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण कुछ समस्याएं आती हैं। इसके बावजूद वार्ड बॉय ही मरीजों को लेकर जाते हैं। -प्रो.आनंद मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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मेडिकल कॉलेज के पुराने भवन में 200 और नवनिर्मित भवन में 300 बेड की व्यवस्था है, जबकि महिला अस्पताल में 100 बेड़ है। इसके बावजूद कई वार्डों में भर्ती मरीजों को जांच के लिए ले जाने में परिजनों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। जानकारी के अभाव में तीमारदार मरीजों को लेकर अस्पताल में इधर-उधर भटकते हुए जांच कक्ष और वार्ड का रास्ता पूछते नजर आते हैं। नवनिर्मित अस्पताल के महिला वार्ड में भर्ती औरंगाबाद निवासी सुमन देवी के पति राम खेलावन ने बताया कि उनकी पत्नी को सर्जरी कक्ष में ले जाने के लिए बार-बार पुराने अस्पताल जाना पड़ता है, लेकिन अस्पताल की ओर से कोई अटेंडेंट उपलब्ध नहीं कराया जाता। मजबूरी में उन्हें परिजनों को बुलाकर मरीज को ले जाना पड़ता है। सर्जरी कक्ष ढूंढने में भी काफी दिक्कत हुई।
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इसी तरह शहर से सटे रौजा निवासी विनोद ने बताया कि उनके भाई चंदन को टीबी वार्ड में भर्ती कराया गया है। एक्स-रे कराने के लिए उन्हें स्ट्रेचर या व्हीलचेयर से नीचे स्थित कक्ष तक ले जाना पड़ता है। अटेंडेंट न मिलने के कारण वह खुद या उनकी बुजुर्ग मां मरीज को ले जाने को विवश हैं।
वहीं, बृहस्पतिवार को आपात कक्ष पहुंचे करीमुद्दीनपुर निवासी मनीष कुमार को डॉक्टरों ने सर्जिकल वार्ड में भर्ती करने की सलाह दी। अटेंडेंट नहीं मिलने पर परिजन ही उन्हें स्ट्रेचर पर लेकर लोगों से वार्ड का रास्ता पूछते हुए पहुंचे और भर्ती कराया। अस्पताल में इस तरह की स्थिति से मरीजों और उनके परिजनों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है।
मिश्रवलिया के महेश ने बताया कि अपने भाई रविंद्र को लेकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर आए थे। बताया कि उनके भाई का पैर टूटा था। उन्होंने अपने भाई को हड्डी वार्ड में भर्ती कराया था। बृहस्पतिवार को एक्सरे कराने के लिए वह काफी परेशान थे। कोई वार्ड बॉय नहीं मिलने पर खुद ही परिजनों की मदद से स्ट्रेचर पर अपने भाई को लेकर एक्सरे रुम तक गए और एक्सरे कराया।
मेडिकल कॉलेज में वार्ड बॉय ही मरीजों को लेकर जाते है। कभी मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण कुछ समस्याएं आती हैं। इसके बावजूद वार्ड बॉय ही मरीजों को लेकर जाते हैं। -प्रो.आनंद मिश्रा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।