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Ghazipur News: 150 के बाद डॉक्टर आउट ऑफ सर्विस, बिना इलाज लौट रहे मरीज
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शहर के गोराबाजार स्थित मेडिकल कॉलेज अस्पताल के ओपीडी में लगी मरीजों व तीमारदारों की भीड़। संवाद
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गाजीपुर। महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल काॅलेज अस्पताल की ओपीडी में विशेषज्ञ चिकित्सक कभी 150 तो कभी 200 से अधिक मरीज नहीं देख रहे हैं। ऐसे में गैर जनपदों, प्रांत और दूर- दराज इलाकों से आए मरीजों को मायूस होकर घर लौट जा रहे हैं। यहीं नहीं आपातकक्ष में पहुंचे मरीजों को उपचार के बाद वार्ड में तो भर्ती कर दिया जा रहा, लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक दूसरे दिन राउंड के समय उन्हें देख रहे हैं। ऐसे में मरीजों को जूनियर डॉक्टरों की दवा के सहारे दूसरे दिन की सुबह का इंतजार करना पड़ रहा है।
हृदयरोग, न्यूरो संबंधित सहित अन्य गंभीर बीमारियों के विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी ओपीडी में मेडिकल काॅलेज प्रशासन ने सप्ताह में एक व दो दिन लगाई है। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टरों को दिखाने के लिए निर्धारित तिथि पर सुबह 10 बजे तक मरीजों की संख्या 300 के आस-पास पहुंच जा रही है, ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सक 150 से 200 मरीजों को देखने के बाद परामर्श पर्ची जमा करने से मना कर दे रहे हैं।
नगर के फुल्लनपुर निवासी दीपक ने बताया कि मित्र के बहन की तबीयत काफी खराब थी। उन्हें न्यूरो संबंधित दिक्कत होने पर बुधवार को ओपीडी के वार्ड नंबर 101 कक्ष के पास लेकर पहुंचा तो 150 मरीजों की पर्ची जमा हो चुकी थी और उस दौरान करीब 85 नंबर चल रहा था। ऐसे में काफी प्रयास के बाद भी पर्ची जमा नहीं हो सकी।
स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि अब विशेषज्ञ चिकित्सक सोमवार को बैठेंगे। सुबह आठ से नौ बजे पहुंचकर ओपीडी में दिखाने के लिए पर्ची लगानी पड़ेगी। अवथही निवासी गोलू ने बताया कि रिश्तेदार को हृदय संबंधित दिक्कत होने पर उन्हें उपचार के लिए लाया गया। हालांकि फिजिशिन के उपचार से राहत मिल गई। ऐसे में मंगलवार को हृदयरोग विशेषज्ञ को दिखाने के लिए पहुंचा तो काफी कड़ी मशक्कत के बाद नंबर आया। जबकि अधिकांश मरीजों को वापस लौटना पड़ा।
3500 से 4000 मरीज पहुंचते हैं ओपीडी
महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रतिदिन 3500 से 4000 मरीज उपचार के लिए ओपीडी पहुंचते हैं। स्थिति यह है कि सुबह नवनिर्मित 300 बेड का गेट खुलते ही मरीजों के पहुंचने का क्रम शुरू हो जाता है। खासकर न्यूरो और हृदयरोग संबंधित चिकित्सकों के बैठने के दिन मरीजों की अच्छी-खासी भीड़ लग जाती है।
चिकित्सकों को निर्देशित किया गया है कि वह समय से ड्यूटी पहुंचे और ओपीडी पहुंचने वाले प्रत्येक मरीजों को देख उन्हें देखकर उपचार करें। यहीं नहीं आवश्यकता पड़ने पर आपातकक्ष में विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाया जाता है और वह वार्ड में राउंड लेकर मरीजों को देखते भी हैं। - प्रोफेसर आनंद मिश्रा, प्राचार्य महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल काॅलेज गाजीपुर
गंभीर बीमारियों के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा मुश्किल से 150 से 200 मरीजों को ही देखा जा रहा है। ऐसे में अन्य मरीजों को घर लौटना पड़ रहा है और अब चिकित्सक के बैठने के लिए दूसरे सप्ताह का इंतजार करना पड़ता है। - दीपक उपाध्याय, फुल्लनपुर
आपातकक्ष में भर्ती मरीजों को तत्काल उपचार तो मिल जाता है और उन्हें वार्ड में भर्ती कर दिया जाता है, लेकिन वार्ड में भर्ती इन मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों का इंतजार दूसरे दिन तक करना पड़ता है।- सुंधाशू तिवारी, हुसैनपुर
मेडिकल कॉलेज प्रतिदिन अच्छी-खासी भीड़ हो जा रही है। ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सकों को अधिक से अधिक मरीजों को देखना चाहिए, जिससे उन्हें राहत मिल सके। - गोलू राय, अवथही
ओपीडी में मरीजों को देखने के लिए विशेषज्ञों के द्वारा निर्धारित संख्या के चलते दिक्कत हो रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों से दिखाने के लिए दूर- दराज से लोग आते हैं।- राजू कुमार, आदर्श बाजार
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हृदयरोग, न्यूरो संबंधित सहित अन्य गंभीर बीमारियों के विशेषज्ञ चिकित्सकों की ड्यूटी ओपीडी में मेडिकल काॅलेज प्रशासन ने सप्ताह में एक व दो दिन लगाई है। ऐसे में विशेषज्ञ डॉक्टरों को दिखाने के लिए निर्धारित तिथि पर सुबह 10 बजे तक मरीजों की संख्या 300 के आस-पास पहुंच जा रही है, ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सक 150 से 200 मरीजों को देखने के बाद परामर्श पर्ची जमा करने से मना कर दे रहे हैं।
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नगर के फुल्लनपुर निवासी दीपक ने बताया कि मित्र के बहन की तबीयत काफी खराब थी। उन्हें न्यूरो संबंधित दिक्कत होने पर बुधवार को ओपीडी के वार्ड नंबर 101 कक्ष के पास लेकर पहुंचा तो 150 मरीजों की पर्ची जमा हो चुकी थी और उस दौरान करीब 85 नंबर चल रहा था। ऐसे में काफी प्रयास के बाद भी पर्ची जमा नहीं हो सकी।
स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि अब विशेषज्ञ चिकित्सक सोमवार को बैठेंगे। सुबह आठ से नौ बजे पहुंचकर ओपीडी में दिखाने के लिए पर्ची लगानी पड़ेगी। अवथही निवासी गोलू ने बताया कि रिश्तेदार को हृदय संबंधित दिक्कत होने पर उन्हें उपचार के लिए लाया गया। हालांकि फिजिशिन के उपचार से राहत मिल गई। ऐसे में मंगलवार को हृदयरोग विशेषज्ञ को दिखाने के लिए पहुंचा तो काफी कड़ी मशक्कत के बाद नंबर आया। जबकि अधिकांश मरीजों को वापस लौटना पड़ा।
3500 से 4000 मरीज पहुंचते हैं ओपीडी
महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रतिदिन 3500 से 4000 मरीज उपचार के लिए ओपीडी पहुंचते हैं। स्थिति यह है कि सुबह नवनिर्मित 300 बेड का गेट खुलते ही मरीजों के पहुंचने का क्रम शुरू हो जाता है। खासकर न्यूरो और हृदयरोग संबंधित चिकित्सकों के बैठने के दिन मरीजों की अच्छी-खासी भीड़ लग जाती है।
चिकित्सकों को निर्देशित किया गया है कि वह समय से ड्यूटी पहुंचे और ओपीडी पहुंचने वाले प्रत्येक मरीजों को देख उन्हें देखकर उपचार करें। यहीं नहीं आवश्यकता पड़ने पर आपातकक्ष में विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाया जाता है और वह वार्ड में राउंड लेकर मरीजों को देखते भी हैं। - प्रोफेसर आनंद मिश्रा, प्राचार्य महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राजकीय मेडिकल काॅलेज गाजीपुर
गंभीर बीमारियों के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा मुश्किल से 150 से 200 मरीजों को ही देखा जा रहा है। ऐसे में अन्य मरीजों को घर लौटना पड़ रहा है और अब चिकित्सक के बैठने के लिए दूसरे सप्ताह का इंतजार करना पड़ता है। - दीपक उपाध्याय, फुल्लनपुर
आपातकक्ष में भर्ती मरीजों को तत्काल उपचार तो मिल जाता है और उन्हें वार्ड में भर्ती कर दिया जाता है, लेकिन वार्ड में भर्ती इन मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सकों का इंतजार दूसरे दिन तक करना पड़ता है।- सुंधाशू तिवारी, हुसैनपुर
मेडिकल कॉलेज प्रतिदिन अच्छी-खासी भीड़ हो जा रही है। ऐसे में विशेषज्ञ चिकित्सकों को अधिक से अधिक मरीजों को देखना चाहिए, जिससे उन्हें राहत मिल सके। - गोलू राय, अवथही
ओपीडी में मरीजों को देखने के लिए विशेषज्ञों के द्वारा निर्धारित संख्या के चलते दिक्कत हो रही है। विशेषज्ञ चिकित्सकों से दिखाने के लिए दूर- दराज से लोग आते हैं।- राजू कुमार, आदर्श बाजार