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Ghazipur News: बाढ़ से सुरक्षा के लिए 24 गांवों में लगे ऑटोमैटिक सायरन
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जमानिया। गंगा के तटीय इलाकों में बाढ़ के दौरान जन-धन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शासन के निर्देश पर अत्याधुनिक ऑटोमेटिक बाढ़ चेतावनी सायरन (अलर्ट सिस्टम) लगाने का काम बुधवार से शुरू हो गया है। इस आधुनिक प्रणाली के जरिए गंगा नदी का जलस्तर खतरे के निशान के करीब पहुंचते ही सायरन अपने आप बज उठेगा, जिससे ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का समय मिल सकेगा।
क्षेत्र के कुल 70 संवेदनशील गांवों में यह अलर्ट सिस्टम स्थापित किया जाना है। पहले चरण के तहत पंचायत भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर 24 सायरन लगाए जा चुके हैं, जिन पर 1 लाख 83 हजार 600 रुपये की लागत आई है। प्रति सायरन 7,650 रुपये का खर्च आ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, एक सायरन की आवाज करीब 3 किलोमीटर के दायरे तक स्पष्ट सुनाई देगी, जिससे एक साथ कई गांवों के लोग सतर्क हो सकेंगे। इस सायरन प्रणाली की सबसे खास बात यह है कि मोबाइल नेटवर्क ध्वस्त होने या कट जाने पर भी यह सैटेलाइट लिंक और रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिए बिना रुकावट काम करती रहेगी। पूरी प्रणाली की दैनिक निगरानी डीपीआरओ कार्यालय से की जाएगी, जिससे इसकी कार्यप्रणाली पर लगातार नजर रखी जा सके। बाढ़ आपदा से निपटने के लिए अन्य प्रशासनिक तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। प्रभावित होने वाले गांवों के लिए 7 बाढ़ राहत शरणालय, 7 राहत वितरण केंद्र और 13 बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं। इसके अलावा, आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्यों के लिए 162 छोटी-बड़ी नावों तथा 240 लाइफ जैकेट का बंदोबस्त भी कर लिया गया है।
इस संबंध में एडीओ पंचायत उमेंद्र सिंह ने बताया कि आपदा के समय ग्रामीणों को समय रहते सचेत करने के उद्देश्य से ये सायरन लगाए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह अत्याधुनिक प्रणाली बाढ़ जैसी भीषण स्थिति में लोगों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा करने तथा राहत अभियानों को प्रभावी बनाने में बेहद मददगार साबित होगी।
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क्षेत्र के कुल 70 संवेदनशील गांवों में यह अलर्ट सिस्टम स्थापित किया जाना है। पहले चरण के तहत पंचायत भवनों और सार्वजनिक स्थलों पर 24 सायरन लगाए जा चुके हैं, जिन पर 1 लाख 83 हजार 600 रुपये की लागत आई है। प्रति सायरन 7,650 रुपये का खर्च आ रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, एक सायरन की आवाज करीब 3 किलोमीटर के दायरे तक स्पष्ट सुनाई देगी, जिससे एक साथ कई गांवों के लोग सतर्क हो सकेंगे। इस सायरन प्रणाली की सबसे खास बात यह है कि मोबाइल नेटवर्क ध्वस्त होने या कट जाने पर भी यह सैटेलाइट लिंक और रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिए बिना रुकावट काम करती रहेगी। पूरी प्रणाली की दैनिक निगरानी डीपीआरओ कार्यालय से की जाएगी, जिससे इसकी कार्यप्रणाली पर लगातार नजर रखी जा सके। बाढ़ आपदा से निपटने के लिए अन्य प्रशासनिक तैयारियां भी पूरी कर ली गई हैं। प्रभावित होने वाले गांवों के लिए 7 बाढ़ राहत शरणालय, 7 राहत वितरण केंद्र और 13 बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं। इसके अलावा, आपात स्थिति में राहत और बचाव कार्यों के लिए 162 छोटी-बड़ी नावों तथा 240 लाइफ जैकेट का बंदोबस्त भी कर लिया गया है।
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इस संबंध में एडीओ पंचायत उमेंद्र सिंह ने बताया कि आपदा के समय ग्रामीणों को समय रहते सचेत करने के उद्देश्य से ये सायरन लगाए जा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह अत्याधुनिक प्रणाली बाढ़ जैसी भीषण स्थिति में लोगों के जीवन और संपत्ति की सुरक्षा करने तथा राहत अभियानों को प्रभावी बनाने में बेहद मददगार साबित होगी।
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