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Ghazipur News: कागजों में अभियान, 37 दिन बाद भी न फागिंग हुई, न एंटी लार्वा का छिड़काव
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पड़ताल--कागजों में अभियान, 37 दिन बाद भी फागिंग हुई न एंर्टी लार्वा का छिड़काव की खबर में---बार
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जिले में एक जुलाई से संचारी रोग नियंत्रण विशेष अभियान चल रहा है, जिसे अब 10 अगस्त तक बढ़ा दिया गया है। अभियान के 37 दिन बीतने के बाद भी कई गांवों में न फागिंग कराई गई और न ही एंटी लार्वा का छिड़काव हुआ। गांवों में जगह-जगह कूड़े के ढेर, जलभराव और झाड़ियों की भरमार अभियान के तहत कराई जा रही सफाई के दावों की पोल खोल रही है।
स्वास्थ्य, पंचायती राज, नगर विकास, शिक्षा और पशुपालन समेत 13 विभागों को शामिल कर अभियान का माइक्रोप्लान तैयार किया गया है। जिले में 1238 ग्राम पंचायतें हैं। पड़ताल में सामने आया कि करीब 65 प्रतिशत यानी 804 ग्राम पंचायतों में 37 दिन बाद भी हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। जलभराव, गंदगी, कीचड़ और कूड़े के ढेर की समस्या बनी हुई है। कई गांवों में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश के बाद रिहायशी इलाकों तक पानी पहुंच रहा है। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अभियान से गांवों की तस्वीर बदलेगी, लेकिन कई स्थानों पर हालात सामान्य दिनों जैसे ही बने हुए हैं। इससे ग्रामीणों में संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ रही है। ग्रामीणों को सता रहा संक्रामक बीमारियों का खतरा : बारिश के बाद गांवों में जलभराव और गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
फिजिशियन डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि जुलाई से सितंबर तक डेंगू और मलेरिया के मामले अधिक सामने आते हैं। इस दौरान अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी बना रहता है।
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स्वास्थ्य, पंचायती राज, नगर विकास, शिक्षा और पशुपालन समेत 13 विभागों को शामिल कर अभियान का माइक्रोप्लान तैयार किया गया है। जिले में 1238 ग्राम पंचायतें हैं। पड़ताल में सामने आया कि करीब 65 प्रतिशत यानी 804 ग्राम पंचायतों में 37 दिन बाद भी हालात में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। जलभराव, गंदगी, कीचड़ और कूड़े के ढेर की समस्या बनी हुई है। कई गांवों में जलनिकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश के बाद रिहायशी इलाकों तक पानी पहुंच रहा है। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि अभियान से गांवों की तस्वीर बदलेगी, लेकिन कई स्थानों पर हालात सामान्य दिनों जैसे ही बने हुए हैं। इससे ग्रामीणों में संक्रामक बीमारियों के फैलने की आशंका बढ़ रही है। ग्रामीणों को सता रहा संक्रामक बीमारियों का खतरा : बारिश के बाद गांवों में जलभराव और गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
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फिजिशियन डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि जुलाई से सितंबर तक डेंगू और मलेरिया के मामले अधिक सामने आते हैं। इस दौरान अन्य संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी बना रहता है।

पड़ताल--कागजों में अभियान, 37 दिन बाद भी फागिंग हुई न एंर्टी लार्वा का छिड़काव की खबर में---बार
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