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Ghazipur News: दुकानों व होटलों में घरेलू गैस सिलिंडर का इस्तेमाल, उपभोक्ता लगा रहे कतार
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जंगीपुर में फास्ट फूड की दुकान पर घरेलू गैस सिलिंडर का होता इस्तेमाल - संवाद
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गाजीपुर। जिले में रसोई गैस सिलिंडर के इस्तेमाल के नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। सड़क किनारे अस्थायी दुकानों से लेकर ढाबों और होटलों के किचन रूम में धड़ल्ले से घरेलू सिलिंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। नियमानुसार व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर घरेलू सिलिंडरों का उपयोग नहीं होना चाहिए, लेकिन जिला पूर्ति विभाग की मेहरबानी से नियम-कायदों का मजाक उड़ाया जा रहा है। जनपद में कॅमर्शियल और घरेलू मिलाकर करीब साढ़े सात लाख उपभोक्ता हैं, लेकिन इसमें कॅमर्शियल उपभोक्ता कितने इैं, इसका आंकड़ा विभाग के पास नहीं है। 66 गैस एजेंसियां रसोई गैस का वितरण कर रही हैं।
व्यावसायिक कार्यों में घरेलू सिलिंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन जिला पूर्ति विभाग की तरफ से जनपद में लंबे समय से कोई अभियान नहीं चलाया गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभाग इस गंभीर मुद्दे को लेकर कितना लापरवाह है। इसका सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं के हक पर पड़ रहा है। उनके हिस्से के सिलिंडरों का उपयोग व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में किया जा रहा है। यह स्थिति तब है, जब पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति के चलते पेट्रो पदार्थों और सिलिंडरों के इस्तेमाल को लेकर सरकार संजीदा नजर आ रही है, लेकिन विभाग उदासीन बना हुआ है। जनपद में कितने कॅमर्शियल उपभोक्ता हैं, इसका आंकड़ा भी विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। विभाग की दलील है कि कॅमर्शियल उपभोक्ताओं का रिकॉर्ड पेट्रोलियम कंपनियों के पास रहता है। जिले में आईओसीएल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां कार्यरत हैं।
नहीं आ रहा ओटीपी
उधर, घरेलू रसोई गैस सिलिंडर की बुकिंग में भी उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि टोल फ्री नंबर पर कॉल करने के बाद भी ओटीपी नहीं आती है, जिससे बुकिंग में परेशानी हो रही है। वे सिलिंडर लेने के लिए एजेंसी पर जा रहे, लेकिन घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
केस- एक
जखनिया रेलवे स्टेशन मार्ग पर चाय-नाश्ते की करीब आठ अस्थायी दुकानें संचालित हो रही हैं। इन सभी दुकानों में घरेलू सिलिंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सड़क किनारे खुलेआम नियमों का उल्लंघन हो रहा है, लेकिन विभाग चुप्पी साधे बैठा है।
केस-दो
कुछ ऐसा ही हाल सैदपुर तहसील क्षेत्र के औड़िहार का है। यहां ठेलों पर अंडा से लेकर फास्टफूड की दुकानें लगती हैं। इन दुकानों में भी व्यवसायिक सिलिंडरों की जगह घरेलू सिलिंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जबकि अधिकारी इसी मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साधे रहते हैं।
जनपद में जिन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर घरेलू सिलिंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है, उन्हें चिह्नित कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - अनंत प्रताप सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी।
20 प्रतिशत घरेलू सिलिंडरों का व्यावसायिक इस्तेमाल
गाजीपुर। नगर के सिंचाई विभाग चौराहा, लंका समेत ग्रामीण अंचलों के जखनिया, दुल्लहपुर, जंगीपुर, गंगौली, कासिमाबाद, भड़सर, औड़िहार, सैदपुर, शादियाबाद, बहरियाबाद, खानपुर, भीमापार, नंदगंज, महाराजगंज आदि स्थानों पर दुकानदार घरेलू सिलिंडरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जनपद में कुल उपभोक्ताओं की संख्या साढ़े सात लाख है। इस प्रकार 20 प्रतिशत घरेलू सिलिंडरों का इस्तेमाल व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर हो रहा है।
आखिर कब मिलेगी इस समस्या से मुक्ति
गाजीपुर। नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों में स्थित गैस सिलिंडर एजेंसियों पर तीन दिनों से लोगों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। महुआबाग के रितेश पांडेय, रेवतीपुर के रजनीश आदि ने बताया कि वे सिलिंडर लेने के लिए भोर में ही कतार में लग गए थे। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग अपना-अपना सिलिंडर लेकर एजेंसियों के बाहर कतार में खड़े रहे। इसके बाद भी बारी आने पर अधिकांश लोग खाली हाथ घर लौट गए। लोगों का कहना है कि आखिर कब हालात सामान्य होंगे।
प्रतिदिन तीन से चार बिक रहे इंडक्शन
गाजीपुर। रसोई गैस की किल्लत के बीच इलेक्ट्रॉनिक दुकानदारों की बल्ले-बल्ले है। हीटर समेत इलेक्ट्रिक कुकर, इंडक्शन चूल्हा, केतली आदि की मांग बढ़ गई है। पहले कभी-कभार बिकने वाले ये आइटम अब रोज बड़ी संख्या में बिक रहे हैं। महुआबाग के इलेक्ट्रॉनिक व्यवसायी श्याम जी ने बताया कि इन दिनों इंडक्शन की मांग बढ़ गई है। पहले महीने में एक इंडक्शन की बिक्री होती थी, अब प्रतिदिन तीन से चार बिक रहे हैं। इंडक्शन 2500 रुपये और इलेक्ट्रिक केतली 1200 रुपये में बिक रही है।
कोयले व डीजल की बनवा रहे हैं भट्टियां
गाजीपुर। जनपद स्थित होटलों में सिलिंडर का स्टॉक अब खत्म होने लगा है। विकल्प के तौर पर होटल संचालक कोयले व डीजल की भट्टियां बनवाने की तैयारी कर रहे हैं। एक होटल संचालक वरुण सिंह ने बताया कि कोयले व डीजल की भट्टियां बनवाने की तैयारी की जा रही है।
अभी भी सिलिंडर पर टिकीं उम्मीदें
गाजीपुर। जनपद में करीब 42 लाख की आबादी है। इतनी बड़ी आबादी वाले क्षेत्र में कहीं से भी गोबर गैस के इस्तेमाल की खबर सामने नहीं आई है। एजेंसियों और गोदामों पर कतार लगाने के बाद भी लोगों की उम्मीदें अभी भी गैस सिलिंडर पर ही टिकी हुई हैं।
उपला व लकड़ी बना सहारा
गाजीपुर। जनपद के किसी भी मठ में भंडारा बंद किए जाने की खबर नहीं है। लेकिन सिलिंडर की किल्लत को देखते हुए साधु-संत अब आने वाले दिनों में उपले और लकड़ी को विकल्प बनाने की सोच रहे हैं। साधु-संतों का कहना है कि यदि समस्या और बढ़ी तो भंडारा उपले और लकड़ी पर ही बनाया जाएगा।
आखिर कैसे होगी मेहमानों की खातिरदारी
गाजीपुर। सबसे विकट समस्या उन परिवारों के सामने है, जिनके यहां शादी समारोह का आयोजन है। उन्हें चिंता सता रही है कि सिलिंडर की किल्लत के बीच मेहमानों की खातिरदारी कैसे होगी। रौजा की प्रमिला देवी ने बताया कि उनकी बेटी की शादी होने वाली है, लेकिन सिलिंडर नहीं मिल रहा है। ऐसे में इंतजाम कैसे होंगे, यह सोचकर वह परेशान हैं।
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व्यावसायिक कार्यों में घरेलू सिलिंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन जिला पूर्ति विभाग की तरफ से जनपद में लंबे समय से कोई अभियान नहीं चलाया गया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि विभाग इस गंभीर मुद्दे को लेकर कितना लापरवाह है। इसका सीधा असर घरेलू उपभोक्ताओं के हक पर पड़ रहा है। उनके हिस्से के सिलिंडरों का उपयोग व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में किया जा रहा है। यह स्थिति तब है, जब पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति के चलते पेट्रो पदार्थों और सिलिंडरों के इस्तेमाल को लेकर सरकार संजीदा नजर आ रही है, लेकिन विभाग उदासीन बना हुआ है। जनपद में कितने कॅमर्शियल उपभोक्ता हैं, इसका आंकड़ा भी विभाग के पास उपलब्ध नहीं है। विभाग की दलील है कि कॅमर्शियल उपभोक्ताओं का रिकॉर्ड पेट्रोलियम कंपनियों के पास रहता है। जिले में आईओसीएल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां कार्यरत हैं।
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नहीं आ रहा ओटीपी
उधर, घरेलू रसोई गैस सिलिंडर की बुकिंग में भी उपभोक्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि टोल फ्री नंबर पर कॉल करने के बाद भी ओटीपी नहीं आती है, जिससे बुकिंग में परेशानी हो रही है। वे सिलिंडर लेने के लिए एजेंसी पर जा रहे, लेकिन घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
केस- एक
जखनिया रेलवे स्टेशन मार्ग पर चाय-नाश्ते की करीब आठ अस्थायी दुकानें संचालित हो रही हैं। इन सभी दुकानों में घरेलू सिलिंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। सड़क किनारे खुलेआम नियमों का उल्लंघन हो रहा है, लेकिन विभाग चुप्पी साधे बैठा है।
केस-दो
कुछ ऐसा ही हाल सैदपुर तहसील क्षेत्र के औड़िहार का है। यहां ठेलों पर अंडा से लेकर फास्टफूड की दुकानें लगती हैं। इन दुकानों में भी व्यवसायिक सिलिंडरों की जगह घरेलू सिलिंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। जबकि अधिकारी इसी मार्ग से गुजरते हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साधे रहते हैं।
जनपद में जिन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर घरेलू सिलिंडरों का इस्तेमाल किया जा रहा है, उन्हें चिह्नित कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। - अनंत प्रताप सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी।
20 प्रतिशत घरेलू सिलिंडरों का व्यावसायिक इस्तेमाल
गाजीपुर। नगर के सिंचाई विभाग चौराहा, लंका समेत ग्रामीण अंचलों के जखनिया, दुल्लहपुर, जंगीपुर, गंगौली, कासिमाबाद, भड़सर, औड़िहार, सैदपुर, शादियाबाद, बहरियाबाद, खानपुर, भीमापार, नंदगंज, महाराजगंज आदि स्थानों पर दुकानदार घरेलू सिलिंडरों का इस्तेमाल कर रहे हैं। जनपद में कुल उपभोक्ताओं की संख्या साढ़े सात लाख है। इस प्रकार 20 प्रतिशत घरेलू सिलिंडरों का इस्तेमाल व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर हो रहा है।
आखिर कब मिलेगी इस समस्या से मुक्ति
गाजीपुर। नगर से लेकर ग्रामीण अंचलों में स्थित गैस सिलिंडर एजेंसियों पर तीन दिनों से लोगों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। महुआबाग के रितेश पांडेय, रेवतीपुर के रजनीश आदि ने बताया कि वे सिलिंडर लेने के लिए भोर में ही कतार में लग गए थे। इसके अलावा बड़ी संख्या में लोग अपना-अपना सिलिंडर लेकर एजेंसियों के बाहर कतार में खड़े रहे। इसके बाद भी बारी आने पर अधिकांश लोग खाली हाथ घर लौट गए। लोगों का कहना है कि आखिर कब हालात सामान्य होंगे।
प्रतिदिन तीन से चार बिक रहे इंडक्शन
गाजीपुर। रसोई गैस की किल्लत के बीच इलेक्ट्रॉनिक दुकानदारों की बल्ले-बल्ले है। हीटर समेत इलेक्ट्रिक कुकर, इंडक्शन चूल्हा, केतली आदि की मांग बढ़ गई है। पहले कभी-कभार बिकने वाले ये आइटम अब रोज बड़ी संख्या में बिक रहे हैं। महुआबाग के इलेक्ट्रॉनिक व्यवसायी श्याम जी ने बताया कि इन दिनों इंडक्शन की मांग बढ़ गई है। पहले महीने में एक इंडक्शन की बिक्री होती थी, अब प्रतिदिन तीन से चार बिक रहे हैं। इंडक्शन 2500 रुपये और इलेक्ट्रिक केतली 1200 रुपये में बिक रही है।
कोयले व डीजल की बनवा रहे हैं भट्टियां
गाजीपुर। जनपद स्थित होटलों में सिलिंडर का स्टॉक अब खत्म होने लगा है। विकल्प के तौर पर होटल संचालक कोयले व डीजल की भट्टियां बनवाने की तैयारी कर रहे हैं। एक होटल संचालक वरुण सिंह ने बताया कि कोयले व डीजल की भट्टियां बनवाने की तैयारी की जा रही है।
अभी भी सिलिंडर पर टिकीं उम्मीदें
गाजीपुर। जनपद में करीब 42 लाख की आबादी है। इतनी बड़ी आबादी वाले क्षेत्र में कहीं से भी गोबर गैस के इस्तेमाल की खबर सामने नहीं आई है। एजेंसियों और गोदामों पर कतार लगाने के बाद भी लोगों की उम्मीदें अभी भी गैस सिलिंडर पर ही टिकी हुई हैं।
उपला व लकड़ी बना सहारा
गाजीपुर। जनपद के किसी भी मठ में भंडारा बंद किए जाने की खबर नहीं है। लेकिन सिलिंडर की किल्लत को देखते हुए साधु-संत अब आने वाले दिनों में उपले और लकड़ी को विकल्प बनाने की सोच रहे हैं। साधु-संतों का कहना है कि यदि समस्या और बढ़ी तो भंडारा उपले और लकड़ी पर ही बनाया जाएगा।
आखिर कैसे होगी मेहमानों की खातिरदारी
गाजीपुर। सबसे विकट समस्या उन परिवारों के सामने है, जिनके यहां शादी समारोह का आयोजन है। उन्हें चिंता सता रही है कि सिलिंडर की किल्लत के बीच मेहमानों की खातिरदारी कैसे होगी। रौजा की प्रमिला देवी ने बताया कि उनकी बेटी की शादी होने वाली है, लेकिन सिलिंडर नहीं मिल रहा है। ऐसे में इंतजाम कैसे होंगे, यह सोचकर वह परेशान हैं।