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Ghazipur News: राहे वफा से गुजरना पड़ेगा, मुहब्बत करोगे तो मरना पड़ेगा...
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गाजीपुर। नेताजी सुभाष ग्रामोत्थान सेवा संस्थान एवं साहित्य चेतना समाज के संयुक्त तत्वावधान में बसंत पंचमी आौर नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की जयंती पर ताड़ीघाट में विचार-गोष्ठी सह कवि-गोष्ठी का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिला। इस दौरान राहे वफा से गुजरना पड़ेगा, मुहब्बत करोगे तो मरना पड़ेगा... प्रस्तुत कर सभी को मुग्ध कर दिया। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त न्यायाधीश कमल नयन पाण्डेय, विशिष्ट अतिथि आरएसएस के नगर संपर्क प्रमुख दुर्गा दत्त चतुर्वेदी एवं साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ रहे। मुख्य अतिथि ने कहा कि बसंत पंचमी जीवन में नई उमंग, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
नेताजी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि मां भारती के इस अमर सपूत ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, किंतु उन्हें वह सम्मान नहीं मिल सका जिसके वे वास्तविक रूप से अधिकारी थे।
कवि गोष्ठी में युवा शायर गोपाल गौरव ने राहे वफ़ा से गुजरना पड़ेगा, मुहब्बत करोगे तो मरना पड़ेगा... सुनाकर श्रोताओं से खूब तालियां बटोरीं। गीतकार नागेश मिश्र ने बसंत पर केंद्रित गीत “आओ एक ही राग अलापें, बढ़ते चलें संग-संग, मानवता की पौध उगाने,अब के बसंत के संग”प्रस्तुत कर माहौल को सरस बना दिया। इस मौके पर सचिव डाॅ. प्रेमशंकर सिंह, कवयित्री प्रीतम कुशवाहा, सुदर्शन कुशवाहा ‘चिराग’, दुर्गा दत्त चतुर्वेदी, अजय सिंह आदि उपस्थित रहे। संचालन सत्येन्द्र नाथ द्विवेदी व अध्यक्षता कैप्टन महेन्द्र यादव ने की।
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कार्यक्रम में साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति का सुंदर समन्वय देखने को मिला। इस दौरान राहे वफा से गुजरना पड़ेगा, मुहब्बत करोगे तो मरना पड़ेगा... प्रस्तुत कर सभी को मुग्ध कर दिया। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त न्यायाधीश कमल नयन पाण्डेय, विशिष्ट अतिथि आरएसएस के नगर संपर्क प्रमुख दुर्गा दत्त चतुर्वेदी एवं साहित्य चेतना समाज के संस्थापक अमरनाथ तिवारी ‘अमर’ रहे। मुख्य अतिथि ने कहा कि बसंत पंचमी जीवन में नई उमंग, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।
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नेताजी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि मां भारती के इस अमर सपूत ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया, किंतु उन्हें वह सम्मान नहीं मिल सका जिसके वे वास्तविक रूप से अधिकारी थे।
कवि गोष्ठी में युवा शायर गोपाल गौरव ने राहे वफ़ा से गुजरना पड़ेगा, मुहब्बत करोगे तो मरना पड़ेगा... सुनाकर श्रोताओं से खूब तालियां बटोरीं। गीतकार नागेश मिश्र ने बसंत पर केंद्रित गीत “आओ एक ही राग अलापें, बढ़ते चलें संग-संग, मानवता की पौध उगाने,अब के बसंत के संग”प्रस्तुत कर माहौल को सरस बना दिया। इस मौके पर सचिव डाॅ. प्रेमशंकर सिंह, कवयित्री प्रीतम कुशवाहा, सुदर्शन कुशवाहा ‘चिराग’, दुर्गा दत्त चतुर्वेदी, अजय सिंह आदि उपस्थित रहे। संचालन सत्येन्द्र नाथ द्विवेदी व अध्यक्षता कैप्टन महेन्द्र यादव ने की।
