{"_id":"6a7f68cd1042f7001a0bfcbe","slug":"a-protest-erupted-in-the-district-when-the-procession-coming-from-olandganj-was-stopped-near-the-fort-jaunpur-news-c-193-svns1023-161122-2026-08-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jaunpur News: ओलंदगंज से उठे जुलूस को किले के पास रोकने पर जिले में हुआ था आंदोलन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jaunpur News: ओलंदगंज से उठे जुलूस को किले के पास रोकने पर जिले में हुआ था आंदोलन
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अंकुर शुक्ला जौनपुर। अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ साल 1942 में जौनपुर में उठी आजादी की आवाज देखते ही देखते जनविद्रोह में बदल गई। 13 अगस्त को ओलंदगंज से निकला जुलूस किले के पास रोक दिया गया। झंडा लिए जयंती प्रसाद और शारदा देवी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। चहारसू पर धर्मशाला के पास जुटी भीड़ में से 10-15 लोग पकड़े गए। शाम को फिर जुलूस निकला तो कोतवाली के पास लाठीचार्ज कर उसे तितर-बितर कर दिया गया और 29 लोग गिरफ्तार किए गए। इसके बाद आंदोलन शहर से निकलकर पूरे जिले में फैल गया। सिकरारा का बीज गोदाम लूट लिया गया। केराकत में करीब दो मील रेल पटरी उखाड़ दी गई और तार काट दिए गए। 20 अगस्त की रात करीब एक हजार लोगों ने मुफ्तीगंज में पुलिया की दोनों दीवारें तोड़ दीं। बिलवाई स्टेशन के पास पुलिया की पटरियां उखाड़ दी गईं। डोभी, केराकत और पतरही के छोटी लाइन स्टेशनों के कागजात फूंक दिए गए। चार सौ लोगों ने मड़ियाहूं के बीज गोदाम पर धावा बोलकर चना और मटर लूट लिया। फतेहगंज, सिकरारा और गुलजारगंज के डाकखाने भी लूटे गए। मुंगराबादशाहपुर का बीज गोदाम भी आंदोलनकारियों के निशाने पर रहा। सुजानगंज थाने पर झंडा फहरा दिया गया। रिकॉर्ड फूंक दिए गए और असलहा कब्जे में ले लिया गया। थाने पर कांग्रेस सेवा दल का पहरा बैठ गया। 21 अगस्त को थानेदार ने आत्महत्या कर ली। बदलापुर थाने पर कब्जे की कोशिश करने पर थानेदार के गोली चला देने के कारण सफल नहीं हुई। धनियामऊ का पुल तोड़ते समय जमादार सिंह और उनके तीन साथी राम अधार, परमानन्द और रघुराई पुलिस की गोली का शिकार हुए। 16 अगस्त के बाद पुल तोड़ने के आरोप में पुलिस ने दो और गरीबों को पकड़कर गोली मार दी।
इस तरह धनियामऊ कांड में छह लोग शहीद हुए। पुल के पास, जहां पुलिस ने जनता पर गोली चलाई थी, आज शहीद स्मारक बना है, जिस पर शहीदों के नाम अंकित हैं। आंदोलन पूरे जिले में फैल गया।
कई तहसील मुख्यालयों और पुलिस थानों पर जनता ने हमले किए। रेलवे स्टेशन, कचहरी और डाकखाने भी निशाने पर रहे। सुजानगंज थाने पर जनता ने अधिकार कर शस्त्रागार लूट लिया। इन हथियारों का आगे क्रांतिकारियों ने पुलिस के विरुद्ध इस्तेमाल किया। (संवाद) मछलीशहर तहसील पर भी कब्जा हुआ और बीज गोदाम लूट लिया गया। गिरफ्तार नंद किशोर तिवारी को छुड़ा लिया गया। एक सभा में भाषण देते समय उन्हें और माता प्रसाद शुक्ला को गोली मार दी गई। बैरमा (सुजानगंज) के चौकीदार का घर लूटकर जला दिया गया और एक पटवारी की पिटाई की गई। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
इस तरह धनियामऊ कांड में छह लोग शहीद हुए। पुल के पास, जहां पुलिस ने जनता पर गोली चलाई थी, आज शहीद स्मारक बना है, जिस पर शहीदों के नाम अंकित हैं। आंदोलन पूरे जिले में फैल गया।
विज्ञापन
कई तहसील मुख्यालयों और पुलिस थानों पर जनता ने हमले किए। रेलवे स्टेशन, कचहरी और डाकखाने भी निशाने पर रहे। सुजानगंज थाने पर जनता ने अधिकार कर शस्त्रागार लूट लिया। इन हथियारों का आगे क्रांतिकारियों ने पुलिस के विरुद्ध इस्तेमाल किया। (संवाद) मछलीशहर तहसील पर भी कब्जा हुआ और बीज गोदाम लूट लिया गया। गिरफ्तार नंद किशोर तिवारी को छुड़ा लिया गया। एक सभा में भाषण देते समय उन्हें और माता प्रसाद शुक्ला को गोली मार दी गई। बैरमा (सुजानगंज) के चौकीदार का घर लूटकर जला दिया गया और एक पटवारी की पिटाई की गई। संवाद
विज्ञापन