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किडनी के मरीजों की ‘वेटिंग लिस्ट’: 90 मरीज कतार में, बेड कम और खर्च का भारी बोझ

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 22 Feb 2026 11:37 PM IST
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Kidney patients' 'waiting list': 90 patients queue, beds scarce, and costs burdensome
जिला अस्पताल में डॉक्टर को दिखाने को कतार में खड़े मरीज।
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जौनपुर। जिले में बढ़ते तनाव, अनियमित दिनचर्या और शुगर के कारण किडनी फेलियर के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। चिंता की बात यह है कि अब 35 से 50 वर्ष के युवा भी इस गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। जिले के सरकारी अस्पताल में संसाधनों की कमी के चलते वर्तमान में 90 मरीज अपनी बारी आने का इंतजार कर रहे हैं। जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में कुल 15 बेड उपलब्ध हैं, जहां फिलहाल 99 मरीजों का नियमित इलाज चल रहा है। मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण यूनिट में तीन शिफ्टों में काम होने के बावजूद बेड कम पड़ रहे हैं। पंजीकरण करा चुके 90 अन्य मरीज इस उम्मीद में हैं कि कब बेड खाली हो और उनका नंबर आए। सरकारी सुविधा न मिल पाने के कारण मजबूरन मरीजों को निजी संस्थानों का रुख करना पड़ रहा है। जहां एक बार की डायलिसिस के लिए उन्हें 2000 से 2500 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह खर्च उठाना मुश्किल साबित हो रहा है। फिजीशियन डॉ. अशोक कुमार यादव के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज किडनी डैमेज होने के मुख्य कारण हैं। उन्होंने सलाह दी है कि लोग अपनी जीवनशैली में सुधार करें, तनाव कम लें और नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें। फिलहाल जिले में किडनी के बढ़ते मरीजों को देखते हुए डायलिसिस यूनिट के विस्तार की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है। एक शिफ्ट की डायलिसिस में चार घंटे का समय लगता है। मशीन पूरे 12 घंटे लगातार चलती है। सुबह आठ बजे से डायलिसिस शुरू होती है, जो रात 11 बजे तक चलती है। दो डायलिसिस के बीच में आधे घंटे का समय मशीन की सफाई और तैयारी में लग जाता है। डायलिसिस सेंटर के मनीष यादव का कहना है कि आमतौर पर डायलिसिस सप्ताह में तीन बार की जाती है। इसकी जरूरत तब पड़ती है, जब किडनी क्षतिग्रस्त होने के कारण रक्त में विषाक्त पदार्थों, अम्ल-क्षारों और पानी की मात्रा का संतुलन नहीं बना पाता। बढ़े हुए पदार्थों की मात्रा प्राणघातक सिद्ध हो सकती है।
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