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Jaunpur News: ग्रामीण वित्तीय समावेशन में बैंकों की भूमिका पर मंथन

Fri, 14 Aug 2026 12:11 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Fri, 14 Aug 2026 12:11 AM IST
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Left home to get married, when the lover backed off, she built a life with a snake charmer in Kanpur
खेतासराय ग्राम सभा की आय बढ़ाने के लिए दिया गया प्रशिक्षण। संवाद
करंजाकला। सहकारी पीजी कॉलेज मिहरावां के अर्थशास्त्र विभाग की ओर से ‘विकसित भारत-2047 के लिए ग्रामीण भारत में वित्तीय समावेशन के उत्प्रेरक के रूप में सहकारी बैंक’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का बुधवार को शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर की गई। अतिथियों का पुष्पगुच्छ और स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया गया। प्राचार्य डॉ. अरविंद कुमार सिंह ने अतिथियों, शिक्षकों, शोधार्थियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने तथा सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया। विषय प्रवर्तन करते हुए अर्थशास्त्र विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. विकास सिंह ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्गों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ना विकसित भारत के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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अध्यक्षता करते हुए डॉ. प्रमोद कुमार सिंह ने कहा कि वित्तीय समावेशन केवल बैंक खाता खोलने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक को सुलभ, सुरक्षित और उपयोगी वित्तीय सेवाओं से जोड़ना इसका व्यापक उद्देश्य है। प्रबंधक राजीव कुमार सिंह ने संगोष्ठी को महाविद्यालय की महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि बताया।
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मुख्य अतिथि यूनियन बैंक के महाप्रबंधक संतोष ने ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच, वित्तीय जागरूकता और संस्थागत ऋण की उपलब्धता पर प्रकाश डाला। विशिष्ट अतिथि पूर्वांचल विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रो. राहुल सिंह ने कहा कि वित्तीय समावेशन का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक आर्थिक अवसरों की पहुंच सुनिश्चित करना है।
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पूर्व अध्यक्ष प्रो. विजय सिंह और शिक्षक संघ के महामंत्री डॉ. शैलेंद्र कुमार सिंह ने भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था और समावेशी विकास पर विचार रखे। संचालन डॉ. राज बहादुर यादव ने किया। उद्घाटन सत्र के बाद दो समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित हुए। सभागार में दोपहर दो से शाम पांच बजे तक तकनीकी सत्र-एक तथा मनोविज्ञान विभाग में ऑनलाइन तकनीकी सत्र-दो हुआ। दोनों सत्रों में वित्तीय समावेशन, सहकारी बैंकिंग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े शोधपत्र प्रस्तुत किए गए और अकादमिक विमर्श हुआ। इस दौरान महाविद्यालय एवं इंटर कॉलेज के शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी मौजूद रहे। संवाद
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