जौनपुर। पिछले दो वर्षों से शहर और ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों की स्थिति जर्जर बनी हुई है, जिससे स्थानीय लोग और दुकानदार भारी परेशानी झेलने को मजबूर हैं। सबसे खराब हालात वीआईपी कलेक्ट्रेट मार्ग के हैं, जहां पैचवर्क के नाम पर डाली गई गिट्टियां अब दोपहिया वाहनों के लिए हादसों का कारण बन रही हैं। 1.25 किलोमीटर के इस मार्ग पर 30 से अधिक गड्ढे मौजूद हैं, और पॉलिटेक्निक से वाजिदपुर मार्ग, ओलंदगंज, नईगंज सहित अन्य प्रमुख इलाकों का भी यही हाल है। जिम्मेदार अधिकारी जल निगम द्वारा खोदी गई सड़कों की बहाली न होने का हवाला देकर पल्ला झाड़ रहे हैं, जबकि आम जनता बदहाल सड़कों पर हिचकोले खाने को विवश है। शहर में सड़कों की हालत बीते दो साल से खराब है। इन सड़कों को बनाने की जहमत पीडब्ल्यूडी नहीं उठाता। ठेकेदारों के माध्यम से सिर्फ पैचिंग कराकर या गड्ढों में गिट्टी डाल कर छोड़ दी जाती है। हाल ही में जब जिले के प्रभारी मंत्री एके शर्मा का दौरा था, उस समय भी कलेक्ट्रेट मार्ग पर हुए बड़े गड्ढे में गिट्टी डाल कर छोड़ दी गई। अब वह गिट्टी सड़कों पर फैली है और दोपहिया वाहनों के लिए हादसे का सबब बनी हुई है। इस मार्ग पर गड्ढे ही गड्ढे बन गए हैं। यही हाल शहर का मुख्य रास्ता कहे जाने वाले पॉलिटेक्निक से वाजिदपुर मार्ग की है। इस सड़क पर वाहन हिचकोले खाते चलते हैं। शहर के मुख्य बाजार ओलंदगंज, नईगंज, काेतवाली, सकरमंडी, कलीचाबाद तिराहा सभी सड़कें खराब हैं। हालांकि आंख मूंदे प्रशासन अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से भी अब लोग शिकायतें करकर के थक चुके हैं। वहीं पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का कहना है कि सड़कें जल निगम ने खोद दी थीं। उन्हें रिस्टोर करना था लेकिन नहीं कराई गईं। समय सीमा पूरी होने के बाद इन सड़कों को फिर से बनवाने की योजना है। शहर में खराब सड़कों की पैचिंग दो साल में चार बार कराई जा चुकी है। इसके अलावा किसी वीवीआईपी आवागमन पर भी पैचिंग या गिट्टी डालने का काम कराया जाता है। गुणवत्ता खराब होने के कारण ही सड़कें जल्दी जल्दी खराब होती हैं। हालात जस के तस हैं।

अलीगंज से कलीचाबाद के बीच टूटी सड़क। संवाद
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