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14 साल में 1.5 करोड़ की लागत से बनी थी Mughal-E-Azam, पढ़िए के.आसिफ और उनकी इस फिल्म के रोचक किस्से

गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Updated Thu, 14 Jun 2018 02:22 PM IST
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Mughal-e-azam director k asif birthday special story
के आसिफ
हिंदी सिनेमा की सबसे पहली शानदार और महंगी फिल्म बनाने वाले करीमुद्दीन आसिफ (के आसिफ) ने उस जमाने में अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था। Mughal-E-Azam को बनाने में 14 साल लग गए और इस फिल्म की लागत तकरीबन 1.5 करोड़ बताई जाती है जो उस समय के हिसाब से बहुत ज्यादा मानी जाती है। के आसिफ का जन्म यूपी के इटावा जिले में हुआ था। 

 

 

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Mughal-e-azam director k asif birthday special story
के आसिफ
मुग़ल-ए-आज़म फिल्म है 1960 में प्रदर्शित हुई थी। यह फिल्म हिन्दी सिनेमा इतिहास की सफलतम फिल्मों में से एक है। इसे के.आसिफ़ के शानदार निर्देशन, भव्य सेटों, बेहतरीन संगीत के लिये आज भी याद किया जाता है।

 

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Mughal-e-azam director k asif birthday special story
के आसिफ की फिल्म मुगल-ए-आजम का पोस्टर
फिल्म अकबर के बेटे शहजादा सलीम (दिलीप कुमार) और दरबार की एक कनीज़ नादिरा (मधुबाला) के बीच में प्रेम की कहानी दिखाती है। नादिरा को अकबर द्वारा अनारकली का ख़िताब दिया जाता है। फ़िल्म में दिखाया गया है कि सलीम और अनारकली में धीरे-धीरे प्यार हो जाता है और अकबर इससे नाखुश होते हैं। अनारकली को कैदखाने में बंद कर दिया जाता है। सलीम अनारकली को छुड़ाने की नाकाम कोशिश करता है।

 

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के आसिफ
अकबर अनारकली को कुछ समय बाद रिहा कर देते हैं। सलीम अनारकली से शादी करना चाहता है पर अकबर इसकी इजाज़त नहीं देते। सलीम बगावत की घोषणा करता है। अकबर और सलीम की सेनाओं में जंग होती है और सलीम पकड़ा जाता है। सलीम को बगावत के लिये मौत की सज़ा सुनाई जाती है पर आखिरी पल अकबर का एक मुलाज़िम अनारकली को आता देख तोप का मुँह मोड देता है। इसके बाद अकबर अनारकली को एक बेहोश कर देने वाला पंख देता है जो अनारकली को अपने हिजाब में लगाकर सलीम को बेहोश करना होता है। अनारकली ऐसा करती है। सलीम को ये बताया जाता है कि अनारकली को दीवार में चिनवा दिया गया है पर वास्तव में उसी रात अनारकली और उसकी माँ को राज्य से बाहर भेज दिया जाता है।

 

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के आसिफ

के. आसिफ की पहली फिल्म फूल (1945) कुछ खास नहीं कर सकी थी लेकिन दूसरी फिल्म ‘मुग़ल-ए-आज़म’ ने इतिहास बना दिया। ‘मुग़ल-ए-आज़म’ को बनाने में 14 साल लगे थे। ये फिल्म उस वक़्त बननी शुरू हुई जब हमारे यहां अंग्रेजों का राज था। शायद ये एक कारण भी हो सकता है जिसके चलते इसको बनाने में इतना वख्त लगा। ये उस दौर की सबसे महंगी फिल्म थी, इस फिल्म की लागत तक़रीबन 1.5 करोड़ रुपये बताई जाती है। जो उस समय के हिसाब से बहुत ज्यादा मानी जाती है।

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