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Mathura News: वृंदावन के प्राचीन स्वरूप को बचाना बड़ी चुनौती
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वृंदावन। भागवताचार्य श्याम सुंदर पाराशर ने कहा कि वृंदावन स्वामी हरिदास महाराज सहित अनगिनत संतों की तपस्या और उनके द्वारा प्रकट किया गया स्वरूप है। आधुनिकीकरण की दौड़ में वृंदावन के प्राचीन और मूल स्वरूप को बचाना आज सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि वृंदावन के उन विशिष्ट स्थलों को संरक्षित किया जाए जो हमारी पहचान हैं।
यह बात उन्होंने गोधुलिपुरम स्थित रंगीली कुंज आश्रम में केलिमाल महारस महोत्सव के अंतर्गत मंगलवार को आयोजित विद्वत गोष्ठी में व्यक्त किए। आचार्य अशोक ने कहा कि यमुना के निकटवर्ती क्षेत्र भगवान की लीला स्थली हैं। आचार्य विपिन बापू ने कहा कि महोत्सव में स्वामी हरिदास के पदों का गहन चिंतन हुआ है। आचार्य बद्रीश ने कहा कि ऐसे आयोजनों से ही हमारी सनातन गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन होता है।
महंत मोहनी शरण महाराज, बाबा कुंज बिहारी दास भक्तिमाली गायक कुंज बिहारी दास, रंगीली कुंज के संस्थापक बाबा श्याम दास, आचार्य करुणा शंकर त्रिवेदी, महामंडलेश्वर राधा प्रसाद देव जू, आचार्य अच्युत लाल भट्ट, डॉ. बनवारी लाल गौड़, राजेंद्र उपाध्याय, आनंद उपाध्याय आदि मौजूद रहे।
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यह बात उन्होंने गोधुलिपुरम स्थित रंगीली कुंज आश्रम में केलिमाल महारस महोत्सव के अंतर्गत मंगलवार को आयोजित विद्वत गोष्ठी में व्यक्त किए। आचार्य अशोक ने कहा कि यमुना के निकटवर्ती क्षेत्र भगवान की लीला स्थली हैं। आचार्य विपिन बापू ने कहा कि महोत्सव में स्वामी हरिदास के पदों का गहन चिंतन हुआ है। आचार्य बद्रीश ने कहा कि ऐसे आयोजनों से ही हमारी सनातन गुरु-शिष्य परंपरा का निर्वहन होता है।
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महंत मोहनी शरण महाराज, बाबा कुंज बिहारी दास भक्तिमाली गायक कुंज बिहारी दास, रंगीली कुंज के संस्थापक बाबा श्याम दास, आचार्य करुणा शंकर त्रिवेदी, महामंडलेश्वर राधा प्रसाद देव जू, आचार्य अच्युत लाल भट्ट, डॉ. बनवारी लाल गौड़, राजेंद्र उपाध्याय, आनंद उपाध्याय आदि मौजूद रहे।