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यूपी: तीन साल बाद फिर तेज हुई गौरा की तलाश, कोटा के शिशुगृह में मिली बच्ची; डीएनए से खुलेगा पहचान का राज?
Wed, 14 Oct 2026 10:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 14 Oct 2026 10:53 AM IST
सार
वर्ष 2023 में मथुरा जंक्शन से चोरी हुई बच्ची गौरा की तलाश में एक बार फिर उम्मीद जगी है। कोटा के शिशुगृह में रह रही बच्ची के गौरा होने के संदेह पर डीएनए जांच कराई जाएगी।
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मथुरा रेलवे स्टेशन
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
मथुरा में वर्ष 2023 में जंक्शन रेलवे स्टेशन से चोरी हुई बच्ची गौरा की तलाश एक बार फिर तेज हो गई है। बच्ची की वास्तविक पहचान सुनिश्चित करने के लिए अब डीएनए जांच कराई जाएगी।
जीआरपी ने बच्ची की तलाश में कई स्तर पर जांच की थी, लेकिन उसका पता नहीं चल सका था। अब कोटा के एक बाल शिशुगृह में रह रही बच्ची के गौरा होने का संदेह है। राजस्थान पुलिस और संबंधित अधिकारियों ने इस मामले की जांच की है। इन जांचों में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर डीएनए परीक्षण की तैयारी है।
क्षेत्राधिकारी राजेश दीक्षित ने बताया कि डीएनए रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्ची मथुरा जंक्शन से चोरी हुई गौरा है या नहीं। वर्ष 2023 में गौरा के चोरी होने के मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। जीआरपी की शुरुआती जांच में बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला था। अब राजस्थान पुलिस की सक्रियता से इस मामले में नई उम्मीद जगी है। कोटा के शिशुगृह में मिली बच्ची की पहचान के लिए डीएनए जांच महत्वपूर्ण होगी। यह जांच ही बच्ची की वास्तविक पहचान स्थापित करेगी। संवाद
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जीआरपी ने बच्ची की तलाश में कई स्तर पर जांच की थी, लेकिन उसका पता नहीं चल सका था। अब कोटा के एक बाल शिशुगृह में रह रही बच्ची के गौरा होने का संदेह है। राजस्थान पुलिस और संबंधित अधिकारियों ने इस मामले की जांच की है। इन जांचों में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। इन्हीं तथ्यों के आधार पर डीएनए परीक्षण की तैयारी है।
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क्षेत्राधिकारी राजेश दीक्षित ने बताया कि डीएनए रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्ची मथुरा जंक्शन से चोरी हुई गौरा है या नहीं। वर्ष 2023 में गौरा के चोरी होने के मामले ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं। जीआरपी की शुरुआती जांच में बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला था। अब राजस्थान पुलिस की सक्रियता से इस मामले में नई उम्मीद जगी है। कोटा के शिशुगृह में मिली बच्ची की पहचान के लिए डीएनए जांच महत्वपूर्ण होगी। यह जांच ही बच्ची की वास्तविक पहचान स्थापित करेगी। संवाद
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