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Almora News: कुमाऊं की पहली फिल्म में आवाज देने वाले दीवान दा हुए खामोश
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अल्मोड़ा। कुमाऊं की पहली फिल्म मेघा आ के गीतों में अपनी मधुर आवाज का जादू बिखेरकर लोगों के दिलों में राज करने वाले दीवान कनवाल इस दुनिया को अलविदा कह गए। उन्होंने जहां कुमाऊंनी फिल्म को अपनी आवाज दी वहीं सैकड़ों गीत गाकर लोगों के दिलों पर राज किया।
लोक गायक दीवान कनवाल का जन्म पांच फरवरी 1961 को सांस्कृतिक नगरी के पारखोला खत्याड़ी गांव में त्रिलोक सिंह कनवाल व रेवती कनवाल के घर में हुआ। उनके पिता त्रिलोक सिंह कनवाल अल्मोड़ा कॉओपरेटिव बैंक में कार्यरत थे। उनका अचानक निधन होने के बाद दीवान को अपने पिता के आश्रित के रूप में बैंक में नौकरी मिल गई जिसके बाद वह बैंक मैनेजर की पोस्ट से सेवानिवृत्त हुए। वहीं उन्होंने अपने संगीत के क्षेत्र को भी जारी रखा था। बुधवार 11 मार्च 2026 को वह इस दुनिया को अलविदा कह गए। उनके निधन से लोक संस्कृति के एक प्रचारक और प्रसारक के युग का अंत हो गया है।
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आकाशवाणी से रहा नाता
दीवान 1980 में नजीबाबाद रेडियो स्टेशन में बी-ग्रेड कलाकार के रूप में रहे जिसके बाद आकाशवाणी अल्मोड़ा में कलाकार रहे। इस दौरान उन्होंने आकाशवाणी में अनेक गीतों को गाया। उन्होंने आकाशवाणी के प्रोग्राम अधिकारी रहे शंकर उप्रेती की ओर से बनाए गए अनेक गीत नाटिकाओं सहित अनेक लोक गीतों में भी अपनी आवाज दी।
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मंदोदरी के अभिनय से की शुरुआत
दीवान कनवाल वह व्यक्ति थे जिन्हें अपनी संस्कृति से काफी लगाव था। यह प्रेरणा उन्हें अपने पिता त्रिलोक सिंह कनवाल से मिली जो अल्मोड़ा की रामलीलाओं में गायन और अभिनय करते थे। दीवान कनवाल ने भी बचपन से ही खत्याड़ी गांव में होने वाली रामलीला में अभिनय और गायन किया। वहीं अल्मोड़ा लक्ष्मी भंडार की रामलीला में भी उन्होंने मंदोदरी के अभिनय से अपनी शुरुआत की। बाद में उन्होंने परशुराम और दशरथ के अभिनय से दर्शकों में अपनी खास पहचान बनाई।
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1987 में फिल्म के गीत ने दिलाई पहचान
1987 में जीवन सिंह बिष्ट की ओर से बनाई गई पहली कुमाऊंनी फिल्म मेघा आ का एक गीत ‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा, जब तू एैंछे, एै जैंछो बहारा’ को दीवान कनवाल ने अपनी मधुर आवाज दी। इस मधुर गीत को लोगों ने खूब पसंद किया। वहीं इसके माध्यम से दीवान कनवाल एक गायक के रूप में प्रसिद्ध हुए। दीवान गायन तो पहले से करते थे लेकिन उन्हें पहचान इसी गीत से मिली। पिछले कुछ दिनों से शेरदा अनपढ़ के गीत को दीवान कनवाल ने अपने साथी डाॅ. अजय ढौंडियाल के साथ गाया। इस जोड़ी की ओर से गाया गया गीत ‘द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनि मैं, ना त्यार ना म्यार शेरुवा यौ दुनी में’ एक बार फिर लोगों के दिलों में छा रहा है।
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उनके गायन की मधुरता लोगों का भाई
दीवान कनवाल ने ‘थात बात’, ‘सुवा’, ‘पैलाग’, ‘हुड़की घमा-घम’, ‘नंदा चालीसा’, ‘जय मैया बाराही’, ‘सुफल हैई जै पंचनाम देवा’ आदि एलबम बनाई। उनके प्रसिद्ध गीतों में मेघा आ फिल्म का गीत ‘यौ डाना कौ पारा’ सहित ‘आज कौंछे मैत जा, भौल कौंछे मैंत जा, ‘दाज्यू मेरी घरवाई रिसै गे’, ‘कसि भिड़ै कुनई पंडित ज्यू, कस करो यो ब्या’, ‘ह्यूं भरी दाना’ आदि गीत शामिल रहे।
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नाटकों में भी अभिनय भी किया
दीवान दा ने बहुत सारे नाटकों में भी अभिनय और निर्देशन किया। ‘कलबिष्ट’, ‘गंगनाथ’, ‘हरूहीत’, ‘बाइस भाई बफौल’, ‘तीलू रौतूली’, ‘सरू कुमैण’, ‘गढ़ सुम्याल’ नाटक प्रमुख हैं।
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लोक गायक दीवान कनवाल का जन्म पांच फरवरी 1961 को सांस्कृतिक नगरी के पारखोला खत्याड़ी गांव में त्रिलोक सिंह कनवाल व रेवती कनवाल के घर में हुआ। उनके पिता त्रिलोक सिंह कनवाल अल्मोड़ा कॉओपरेटिव बैंक में कार्यरत थे। उनका अचानक निधन होने के बाद दीवान को अपने पिता के आश्रित के रूप में बैंक में नौकरी मिल गई जिसके बाद वह बैंक मैनेजर की पोस्ट से सेवानिवृत्त हुए। वहीं उन्होंने अपने संगीत के क्षेत्र को भी जारी रखा था। बुधवार 11 मार्च 2026 को वह इस दुनिया को अलविदा कह गए। उनके निधन से लोक संस्कृति के एक प्रचारक और प्रसारक के युग का अंत हो गया है।
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आकाशवाणी से रहा नाता
दीवान 1980 में नजीबाबाद रेडियो स्टेशन में बी-ग्रेड कलाकार के रूप में रहे जिसके बाद आकाशवाणी अल्मोड़ा में कलाकार रहे। इस दौरान उन्होंने आकाशवाणी में अनेक गीतों को गाया। उन्होंने आकाशवाणी के प्रोग्राम अधिकारी रहे शंकर उप्रेती की ओर से बनाए गए अनेक गीत नाटिकाओं सहित अनेक लोक गीतों में भी अपनी आवाज दी।
मंदोदरी के अभिनय से की शुरुआत
दीवान कनवाल वह व्यक्ति थे जिन्हें अपनी संस्कृति से काफी लगाव था। यह प्रेरणा उन्हें अपने पिता त्रिलोक सिंह कनवाल से मिली जो अल्मोड़ा की रामलीलाओं में गायन और अभिनय करते थे। दीवान कनवाल ने भी बचपन से ही खत्याड़ी गांव में होने वाली रामलीला में अभिनय और गायन किया। वहीं अल्मोड़ा लक्ष्मी भंडार की रामलीला में भी उन्होंने मंदोदरी के अभिनय से अपनी शुरुआत की। बाद में उन्होंने परशुराम और दशरथ के अभिनय से दर्शकों में अपनी खास पहचान बनाई।
1987 में फिल्म के गीत ने दिलाई पहचान
1987 में जीवन सिंह बिष्ट की ओर से बनाई गई पहली कुमाऊंनी फिल्म मेघा आ का एक गीत ‘यौ डाना कौ पारा, देख्यूंछ न्यारा-न्यारा, जब तू एैंछे, एै जैंछो बहारा’ को दीवान कनवाल ने अपनी मधुर आवाज दी। इस मधुर गीत को लोगों ने खूब पसंद किया। वहीं इसके माध्यम से दीवान कनवाल एक गायक के रूप में प्रसिद्ध हुए। दीवान गायन तो पहले से करते थे लेकिन उन्हें पहचान इसी गीत से मिली। पिछले कुछ दिनों से शेरदा अनपढ़ के गीत को दीवान कनवाल ने अपने साथी डाॅ. अजय ढौंडियाल के साथ गाया। इस जोड़ी की ओर से गाया गया गीत ‘द्वी दिना का ड्यार शेरुवा यौ दुनि मैं, ना त्यार ना म्यार शेरुवा यौ दुनी में’ एक बार फिर लोगों के दिलों में छा रहा है।
उनके गायन की मधुरता लोगों का भाई
दीवान कनवाल ने ‘थात बात’, ‘सुवा’, ‘पैलाग’, ‘हुड़की घमा-घम’, ‘नंदा चालीसा’, ‘जय मैया बाराही’, ‘सुफल हैई जै पंचनाम देवा’ आदि एलबम बनाई। उनके प्रसिद्ध गीतों में मेघा आ फिल्म का गीत ‘यौ डाना कौ पारा’ सहित ‘आज कौंछे मैत जा, भौल कौंछे मैंत जा, ‘दाज्यू मेरी घरवाई रिसै गे’, ‘कसि भिड़ै कुनई पंडित ज्यू, कस करो यो ब्या’, ‘ह्यूं भरी दाना’ आदि गीत शामिल रहे।
नाटकों में भी अभिनय भी किया
दीवान दा ने बहुत सारे नाटकों में भी अभिनय और निर्देशन किया। ‘कलबिष्ट’, ‘गंगनाथ’, ‘हरूहीत’, ‘बाइस भाई बफौल’, ‘तीलू रौतूली’, ‘सरू कुमैण’, ‘गढ़ सुम्याल’ नाटक प्रमुख हैं।