Uttarakhand: वन्यजीवों की लोकेशन पर नजर रखने के सुझाव पर वन विभाग गंभीर, अधिकारियों से मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट
पर्वतीय एवं शहरी क्षेत्रों में बाघ, तेंदुए और भालू के बढ़ते हमलों तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए सल्ट के ग्राम सभा मसड़ियाबांज निवासी भगत सिंह ने सीएम को पत्र लिखकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे। वन विभाग ने इन सुझावों पर संज्ञान लिया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पर्वतीय एवं शहरी क्षेत्रों में बाघ, तेंदुए और भालू के बढ़ते हमलों तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए सल्ट के ग्राम सभा मसड़ियाबांज निवासी भगत सिंह तड़ियाल की ओर से दिए गए सुझावों पर अब वन विभाग ने गंभीरता से संज्ञान लिया है। तड़ियाल की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में वन्यजीवों की निगरानी और मानव जीवन की सुरक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए थे।
इन सुझावों के संबंध में अपर प्रमुख वन संरक्षक (प्रशासन), वन्यजीव सुरक्षा एवं आसूचना उत्तराखंड डॉ. विवेक पांडेय ने पांच वरिष्ठ वन अधिकारियों को पत्र जारी कर तथ्यात्मक आख्या और अपने अभिमत के साथ रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। बीते 12 अगस्त को जारी पत्र में अपर प्रमुख वन संरक्षक ने भगत सिंह तड़ियाल के पत्र की प्रति संबंधित अधिकारियों को भेजी है। पत्र में कहा गया है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए दिए गए सुझावों का अवलोकन कर उन पर तथ्यात्मक आख्या और विभागीय अभिमत उपलब्ध कराया जाए।
इन अधिकारियों से मांगी है रिपोर्ट
मुख्य वन संरक्षक, कुमाऊं नैनिताल, मुख्य वन संरक्षक, गढ़वाल पौड़ी, निदेशक कॉर्बेट टाइगर रिजर्व रामनगर, निदेशक राजाजी टाइगर रिजर्व देहरादून तथा निदेशक नंदादेवी बायोस्फियर रिजर्व गोपेश्वर को पत्र भेजा गया है।
वन्यजीवों की लोकेशन की मिले तत्काल जानकारी
भगत सिंह तड़ियाल ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में सुझाव दिया था कि बाघ, तेंदुआ और भालू जैसे आत्मघाती वन्यजीवों पर लोकेशन टेक्नोलॉजी/लोकेशन चिप लगाने की व्यवस्था की जाए। साथ ही वन विभाग की ओर से एक विशेष पोर्टल अथवा कंट्रोल रूम तैयार किया जाए, जहां इन वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और संबंधित क्षेत्र के प्रभागीय वनाधिकारी को तत्काल सूचना उपलब्ध हो। उनका कहना है कि इससे वन विभाग के साथ-साथ स्थानीय ग्रामीणों को भी समय रहते वन्यजीव की आवाजाही की जानकारी मिल सकेगी और लोग सावधानी बरतकर संभावित हमलों से बच सकते हैं।
इस संबंध में अभी कोई जवाब नहीं भेजा गया है। सुझाव को धरातल पर लागू करने की संभावनाओं और सामने आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों का परीक्षण करने के बाद इस पर विस्तृत जवाब भेजा जाएगा।
-साकेत बडोला, निदेशक कॉर्बेट नेशनल पार्क, रामनगर