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Almora News: आईएमपीसीएल निजीकरण के खिलाफ अंतिम कोशिश में दिल्ली कूच करेंगे कर्मचारी
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मौलेखाल(अल्मोड़ा)। आईएमपीसीएल दवा कंपनी के निजीकरण को लेकर घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ रहा है। सूत्रों के अनुसार सोमवार को कंपनी के सेल-परचेज एग्रीमेंट (एसपीए) पर हस्ताक्षर होने की संभावना है, जिसके बाद कंपनी पूरी तरह निजी हाथों में चली जाएगी। इस बीच निजीकरण के विरोध में आंदोलनरत कर्मचारी संगठन और ट्रेड यूनियन अंतिम प्रयासों में जुट गए हैं।
ट्रेड यूनियन के सदस्य सोमवार को दिल्ली स्थित आयुष मंत्रालय कूच करेंगे। कर्मचारियों का प्रयास है कि मंत्रालय स्तर पर हस्तक्षेप कर सेल-परचेज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया को रोका जा सके और कंपनी के निजीकरण पर पुनर्विचार किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि निजीकरण से न केवल सैकड़ों कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित होगा, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी असर पड़ेगा।
वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों की निगाहें मंगलवार को होने वाली नैनीताल हाईकोर्ट की डबल बेंच में सुनवाई पर भी टिकी हुई हैं। कर्मचारी संघ की ओर से दायर एसपीए (स्पेशल अपील) याचिका पर सुनवाई होनी है, जिसमें अदालत महत्वपूर्ण फैसला सुना सकती है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि न्यायालय से उन्हें किसी प्रकार की राहत या निजीकरण प्रक्रिया पर रोक संबंधी आदेश मिल सकता है।
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याचिका में कंपनी को वन विभाग की ओर से आवंटित लगभग 46 एकड़ भूमि का मुद्दा भी प्रमुख रूप से उठाया गया है। इस मामले में हाईकोर्ट पूर्व में स्पष्ट कर चुकी है कि भूमि विशेष शर्तों के साथ निगम/कंपनी को दी गई थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि यदि भूमि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए नहीं किया जाता है तो वह बिना किसी मुआवजे के स्वतः वन विभाग को वापस चली जाएगी। साथ ही न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि कंपनी का विनिवेश या निजीकरण भी उक्त शर्तों के अधीन रहेगा।
ऐसे में कर्मचारियों का मानना है कि भूमि से जुड़े कानूनी पहलू निजीकरण प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल कर्मचारी संगठन निजीकरण के खिलाफ न्यायालय से स्टे मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। अब सभी की नजरें सोमवार को संभावित सेल-परचेज एग्रीमेंट और मंगलवार को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।
ट्रेड यूनियन के सदस्य सोमवार को दिल्ली स्थित आयुष मंत्रालय कूच करेंगे। कर्मचारियों का प्रयास है कि मंत्रालय स्तर पर हस्तक्षेप कर सेल-परचेज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया को रोका जा सके और कंपनी के निजीकरण पर पुनर्विचार किया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि निजीकरण से न केवल सैकड़ों कर्मचारियों का भविष्य प्रभावित होगा, बल्कि क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और रोजगार पर भी असर पड़ेगा।
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वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों की निगाहें मंगलवार को होने वाली नैनीताल हाईकोर्ट की डबल बेंच में सुनवाई पर भी टिकी हुई हैं। कर्मचारी संघ की ओर से दायर एसपीए (स्पेशल अपील) याचिका पर सुनवाई होनी है, जिसमें अदालत महत्वपूर्ण फैसला सुना सकती है। कर्मचारियों को उम्मीद है कि न्यायालय से उन्हें किसी प्रकार की राहत या निजीकरण प्रक्रिया पर रोक संबंधी आदेश मिल सकता है।
याचिका में कंपनी को वन विभाग की ओर से आवंटित लगभग 46 एकड़ भूमि का मुद्दा भी प्रमुख रूप से उठाया गया है। इस मामले में हाईकोर्ट पूर्व में स्पष्ट कर चुकी है कि भूमि विशेष शर्तों के साथ निगम/कंपनी को दी गई थी। अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि यदि भूमि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए नहीं किया जाता है तो वह बिना किसी मुआवजे के स्वतः वन विभाग को वापस चली जाएगी। साथ ही न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया था कि कंपनी का विनिवेश या निजीकरण भी उक्त शर्तों के अधीन रहेगा।
ऐसे में कर्मचारियों का मानना है कि भूमि से जुड़े कानूनी पहलू निजीकरण प्रक्रिया को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल कर्मचारी संगठन निजीकरण के खिलाफ न्यायालय से स्टे मिलने की उम्मीद लगाए हुए हैं। अब सभी की नजरें सोमवार को संभावित सेल-परचेज एग्रीमेंट और मंगलवार को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर टिकी हुई हैं।