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Almora News: सोबन सिंह जीना विवि के छात्र बनेंगे फॉरेंसिक एक्सपर्ट
संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
Updated Thu, 23 Apr 2026 11:32 PM IST
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अल्मोड़ा। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय (एसएसजे विश्वविद्यालय) नए शिक्षा सत्र से फॉरेंसिक विज्ञान के पाठ्यक्रम संचालित करेगा। यह पहल छात्र-छात्राओं को अपराध जांच की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराएगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया है। पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को डीएनए टेस्ट, फिंगरप्रिंट, खून के सैंपल की जांच, क्रिमिनल बिहेवियर और क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन जैसी नवीनतम तकनीकों का प्रशिक्षण मिलेगा।
इसके अतिरिक्त, एथिकल हैकिंग और नेटवर्क सिक्योरिटी जैसे विषयों की भी बारीकियां सिखाई जाएंगी। यह विषय बीएससी, एमएससी, कॉमर्स, मनोविज्ञान और विधि के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाएगा। विश्वविद्यालय की फैकल्टी बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई है। पाठ्यक्रम संचालन के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस को प्रस्ताव भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने पर यही संस्थान पाठ्यक्रम संचालित करेगा।
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फॉरेंसिक साइंस में यह विषय होंगे शामिल
विश्वविद्यालय प्रबंधन के मुताबिक फॉरेंसिक साइंस के तहत यहां तीन वर्षीय बीएससी इन फॉरेंसिक साइंस, दो वर्षीय एमएससी फॉरेंसिक साइंस, कॉमर्स में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा इन साइबर सिक्योरिटी, एमएससी साइबर सिक्योरिटी, साइकोलॉजी में प्रोफेशनल डिप्लोमा इन क्लीनिकल साइकोलॉजी और विधि में पीजी डिप्लोमा इन क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंस विषय संचालित किया जाएगा।
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कहां मिलेंगे रोजगार के अवसर
फॉरेंसिक विज्ञान की तकनीक को समझने के बाद विद्यार्थियों को लिए सरकारी फॉरेंसिक लैब, पुलिस विभाग, सीबीआई, इन्वेस्टिगेशन एजेंसी
रिसर्च, टीचिंग, आईटी कंपनियों, हॉस्पिटल, प्राइवेट क्लीनिक, बैंक, एथिकल हैकिंग आदि क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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नए शिक्षा सत्र से विश्वविद्यालय में फॉरेंसिक साइंस पाठ्यक्रम संचालित किया जाएगा। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की ओर से यह पाठ्यक्रम संचालित किया जाएगा। पाठ्यक्रम संचालित होने से छात्र-छात्राओं फॉरेंसिक विज्ञान की बारीकियां सीखने का मौका मिलेगा। जो उनके लिए नए अनुभव होगा
प्रो. अनिल कुमार यादव, डीन एकेडमिक एसएसजे विवि अल्मोड़ा
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विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस क्षेत्र में बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए यह निर्णय लिया है। पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को डीएनए टेस्ट, फिंगरप्रिंट, खून के सैंपल की जांच, क्रिमिनल बिहेवियर और क्राइम सीन इन्वेस्टिगेशन जैसी नवीनतम तकनीकों का प्रशिक्षण मिलेगा।
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इसके अतिरिक्त, एथिकल हैकिंग और नेटवर्क सिक्योरिटी जैसे विषयों की भी बारीकियां सिखाई जाएंगी। यह विषय बीएससी, एमएससी, कॉमर्स, मनोविज्ञान और विधि के पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाएगा। विश्वविद्यालय की फैकल्टी बोर्ड की बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई है। पाठ्यक्रम संचालन के लिए नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस को प्रस्ताव भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने पर यही संस्थान पाठ्यक्रम संचालित करेगा।
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फॉरेंसिक साइंस में यह विषय होंगे शामिल
विश्वविद्यालय प्रबंधन के मुताबिक फॉरेंसिक साइंस के तहत यहां तीन वर्षीय बीएससी इन फॉरेंसिक साइंस, दो वर्षीय एमएससी फॉरेंसिक साइंस, कॉमर्स में एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा इन साइबर सिक्योरिटी, एमएससी साइबर सिक्योरिटी, साइकोलॉजी में प्रोफेशनल डिप्लोमा इन क्लीनिकल साइकोलॉजी और विधि में पीजी डिप्लोमा इन क्रिमिनोलॉजी एंड फॉरेंसिक साइंस विषय संचालित किया जाएगा।
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कहां मिलेंगे रोजगार के अवसर
फॉरेंसिक विज्ञान की तकनीक को समझने के बाद विद्यार्थियों को लिए सरकारी फॉरेंसिक लैब, पुलिस विभाग, सीबीआई, इन्वेस्टिगेशन एजेंसी
रिसर्च, टीचिंग, आईटी कंपनियों, हॉस्पिटल, प्राइवेट क्लीनिक, बैंक, एथिकल हैकिंग आदि क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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नए शिक्षा सत्र से विश्वविद्यालय में फॉरेंसिक साइंस पाठ्यक्रम संचालित किया जाएगा। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की ओर से यह पाठ्यक्रम संचालित किया जाएगा। पाठ्यक्रम संचालित होने से छात्र-छात्राओं फॉरेंसिक विज्ञान की बारीकियां सीखने का मौका मिलेगा। जो उनके लिए नए अनुभव होगा
प्रो. अनिल कुमार यादव, डीन एकेडमिक एसएसजे विवि अल्मोड़ा

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