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Almora News: जैविक खेती को नई ऊर्जा देगा एसएसजे विवि का स्मार्ट वर्मी कंपोस्टर
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अल्मोड़ा। सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय ने जैविक खेती और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल हुई है। विश्वविद्यालय की शोध टीम के वर्टिकल वर्मी कंपोस्टर विद इंटीग्रेटेड बायोचार एंड एनवायरमेंटल मॉनिटरिंग विषय पर तैयार डिजाइन को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने पंजीकृत कर दिया है। इससे अब आधुनिक तकनीक से कम जगह पर बेहतर गुणवत्ता की जैविक खाद तैयार की जा सकेगी।
एसएसजे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट के निर्देशन में यह डिजाइन तैयार किया गया। कुलपति बिष्ट ने बताया कि यह तकनीक पारंपरिक वर्मी कम्पोस्ट को आधुनिक तकनीक से जोड़ती है। इसमें केंचुओं से खाद बनाने की प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए बायोचार और सेंसर आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम का उपयोग किया गया है। बायोचार मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने और खाद में पोषक तत्व बढ़ाने में मदद करता है। इस सिस्टम में लगाए गए सेंसर तापमान और नमी पर नजर रखते हैं। इससे केंचुओं के लिए सही वातावरण बना रहता है और खाद जल्दी और अच्छी गुणवत्ता की तैयार होती है। खास बात यह है कि यह मॉडल कम जगह में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे मेें यह आधुनिक तकनीक मैदान और पहाड़ दोनों क्षेत्रों के लिए उपयोगी साबित होगी।
रासायनिक खाद पर निर्भरता होगी कम
विशेषज्ञों के मुताबिक यह तकनीक किसानों को रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी और जैविक खेती को बढ़ावा देगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी यह तकनीक कारगर होगी। कुलपति के मुताबिक विश्वविद्यालय ऐसी तकनीकों पर काम कर रहा है जिसका सीधा लाभ किसानों को मिल सके।
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टीम में ये रहे शामिल
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिष्ट के साथ टीम में डॉ. राशि मिगलानी, अंकित कुमार, गौरव रावत, डॉ. नगमा परवीन, डॉ. पल्लवी सक्सेना और डॉ. महेंद्र सिंह राणा शामिल रहे।
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रासायनिक खाद पर निर्भरता होगी कम
विशेषज्ञों के मुताबिक यह तकनीक किसानों को रासायनिक खाद पर निर्भरता कम करने में मदद करेगी और जैविक खेती को बढ़ावा देगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में भी यह तकनीक कारगर होगी। कुलपति के मुताबिक विश्वविद्यालय ऐसी तकनीकों पर काम कर रहा है जिसका सीधा लाभ किसानों को मिल सके।
टीम में ये रहे शामिल
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिष्ट के साथ टीम में डॉ. राशि मिगलानी, अंकित कुमार, गौरव रावत, डॉ. नगमा परवीन, डॉ. पल्लवी सक्सेना और डॉ. महेंद्र सिंह राणा शामिल रहे।