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Bageshwar News: पहाड़ाें में सैलानियों की पहुंच बन रही रोजगारपरक
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sun, 24 May 2026 09:43 PM IST
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बागेश्वर। गर्मी का मौसम आते ही मैदानी इलाकों के पर्यटक पहाड़ो का रुख करने लगे हैं। कपकोट में शामा क्षेत्र के लोग पुराने घरों को होम स्टे बनाकर रोजगार को नया आयाम दे रहे हैं। होम स्टे में ठहरने के लिए पहुंच रहे पर्यटकों से स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिल रहा है।
पर्यटन सीजन में देश-विदेश से सैर करने पहुंच रहे सैलानियों को पारंपरिक शैली के घर काफी आकर्षित कर रहे हैं। अभी तक महाराष्ट्र, गुजरात, नोएडा, दिल्ली और गढ़वाल से पर्यटक पहुंचे हैं। सैलानी गांव में उत्पादित दालें, हरी सब्जियां, हस्तशिल्प आदि को भी काफी पसंद कर रहे है। गांव में सैलानियों की आमद से क्षेत्रीय दुकानदारों और युवाओं को रोजगार मिल रहा है। होम स्टे संचालकों ने बताया कि गांव में पांच लोगों ने होम स्टे बनाए हैं। सैलानी भट्ट के डुबके, झोली भात, भांग की चटनी, मडुवे की रोटी, पहाड़ी घी आदि खूब पसंद करते हैं। भोजन तैयार करने में लगे युवकों के लिए यह रोजगार का साधन बन रहा है। इसके अतिरिक्त पर्यटकों को गाइड करने और सामान ले जाने वाले पोर्टरों की भी आमदनी हो रही है। क्षेत्र में पहुंचे पर्यटकों को जिला मुख्यालय या अन्य जगह यामायात के लिए प्रयुक्त वाहन के चालकों को भी इसका लाभ मिल रहा है।
कोट
हमारे यहां शहरों के अलावा स्थानीय लोग भी आते हैं। यहां उत्पादित हरी सब्जियों को खरीदते हैं। हम कई साल पुराने घरों को नए तरीके से तैयार कर रहे हैं। सीजन की शुरुआत में ही काफी पर्यटक यहां पहुंच गए हैं। इससे गांव के युवक भी अच्छा कर रोजगार कर रहे हैं। - धीरज सिंह कोरंगा, होम स्टे संचालक
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कोट
कुछ समय पहले ही होमस्टे का काम शुरू किया था। अभी तक कई लोग यहां पहुंच चुके हैं। अब हमें सब्जी बेचने कहीं जाना नहीं पड़ता है। खेतों से उत्पादित खाद्य की यहीं खपत हो जाती है। इससे हमारे पहाड़ों के उत्पाद को बढ़ावा भी मिल रहा है। - राजेंद्र कोरंगा, होम स्टे संचालक
पर्यटन सीजन में देश-विदेश से सैर करने पहुंच रहे सैलानियों को पारंपरिक शैली के घर काफी आकर्षित कर रहे हैं। अभी तक महाराष्ट्र, गुजरात, नोएडा, दिल्ली और गढ़वाल से पर्यटक पहुंचे हैं। सैलानी गांव में उत्पादित दालें, हरी सब्जियां, हस्तशिल्प आदि को भी काफी पसंद कर रहे है। गांव में सैलानियों की आमद से क्षेत्रीय दुकानदारों और युवाओं को रोजगार मिल रहा है। होम स्टे संचालकों ने बताया कि गांव में पांच लोगों ने होम स्टे बनाए हैं। सैलानी भट्ट के डुबके, झोली भात, भांग की चटनी, मडुवे की रोटी, पहाड़ी घी आदि खूब पसंद करते हैं। भोजन तैयार करने में लगे युवकों के लिए यह रोजगार का साधन बन रहा है। इसके अतिरिक्त पर्यटकों को गाइड करने और सामान ले जाने वाले पोर्टरों की भी आमदनी हो रही है। क्षेत्र में पहुंचे पर्यटकों को जिला मुख्यालय या अन्य जगह यामायात के लिए प्रयुक्त वाहन के चालकों को भी इसका लाभ मिल रहा है।
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हमारे यहां शहरों के अलावा स्थानीय लोग भी आते हैं। यहां उत्पादित हरी सब्जियों को खरीदते हैं। हम कई साल पुराने घरों को नए तरीके से तैयार कर रहे हैं। सीजन की शुरुआत में ही काफी पर्यटक यहां पहुंच गए हैं। इससे गांव के युवक भी अच्छा कर रोजगार कर रहे हैं। - धीरज सिंह कोरंगा, होम स्टे संचालक
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कुछ समय पहले ही होमस्टे का काम शुरू किया था। अभी तक कई लोग यहां पहुंच चुके हैं। अब हमें सब्जी बेचने कहीं जाना नहीं पड़ता है। खेतों से उत्पादित खाद्य की यहीं खपत हो जाती है। इससे हमारे पहाड़ों के उत्पाद को बढ़ावा भी मिल रहा है। - राजेंद्र कोरंगा, होम स्टे संचालक