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Bageshwar News: बरेली में आठ साल बाद हुआ बाप-बेटे का भावुक मिलन, मनोसमर्पण टीम ने जगाई बुझी हुई आस
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Fri, 12 Jun 2026 12:21 AM IST
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बागेश्वर। कहते हैं कि अगर उम्मीद जिंदा हो तो कुदरत भी मिलाने का कोई न कोई रास्ता ढूंढ निकालती है। ऐसा ही एक चमत्कारिक और भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है। जिले से पिछले आठ साल से लापता एक मानसिक बीमार व्यक्ति को बरेली की मनोसमर्पण टीम ने उपचार के बाद उनके परिवार से मिला दिया है। पिता को सही-सलामत वापस पाकर परिजनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार जिले के रीमा थाना क्षेत्र के जुनायल गांव निवासी दीपक चंद्र जोशी साल 2018 में अपनी मानसिक बीमारी के चलते अचानक घर से कहीं लापता हो गए थे। परिजनों ने उन्हें ढूंढने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं लगा। वक्त बीतने के साथ थक-हारकर परिजनों ने भी उनके वापस लौटने की उम्मीद छोड़ दी थी। बीते 24 अप्रैल को दीपक चंद्र जोशी बरेली के थाना इज्जतनगर क्षेत्र में लावारिस हालत में घूमते हुए मिले। बरेली पुलिस ने उन्हें रेस्क्यू कर मनोसमर्पण सेवा संस्थान में दाखिल करा दिया।
संस्था के संस्थापक और मनोविज्ञानी डॉ.शैलेश शर्मा ने बताया कि संस्था की ओर से उन्हें त्वरित चिकित्सा उपचार के साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराई गई। इससे उनकी स्थिति में सुधार हुआ और उन्होंने अपने घर का पता बताया। अपने पिता को वापस लेने बरेली पहुंचे उनके बेटे भवानी शंकर ने बताया कि वे दो भाई और एक बहन हैं। उन्होंने कई वर्षों तक अपने पिता की हर जगह तलाश की लेकिन कोई सफलता नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि मनोसमर्पण संस्था ने उनके खोए हुए पिता को वापस मिलाकर उनके परिवार को नई जिंदगी दी है। इसके लिए वे जीवनभर संस्था के आभारी रहेंगे।
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परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार जिले के रीमा थाना क्षेत्र के जुनायल गांव निवासी दीपक चंद्र जोशी साल 2018 में अपनी मानसिक बीमारी के चलते अचानक घर से कहीं लापता हो गए थे। परिजनों ने उन्हें ढूंढने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं लगा। वक्त बीतने के साथ थक-हारकर परिजनों ने भी उनके वापस लौटने की उम्मीद छोड़ दी थी। बीते 24 अप्रैल को दीपक चंद्र जोशी बरेली के थाना इज्जतनगर क्षेत्र में लावारिस हालत में घूमते हुए मिले। बरेली पुलिस ने उन्हें रेस्क्यू कर मनोसमर्पण सेवा संस्थान में दाखिल करा दिया।
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संस्था के संस्थापक और मनोविज्ञानी डॉ.शैलेश शर्मा ने बताया कि संस्था की ओर से उन्हें त्वरित चिकित्सा उपचार के साथ मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराई गई। इससे उनकी स्थिति में सुधार हुआ और उन्होंने अपने घर का पता बताया। अपने पिता को वापस लेने बरेली पहुंचे उनके बेटे भवानी शंकर ने बताया कि वे दो भाई और एक बहन हैं। उन्होंने कई वर्षों तक अपने पिता की हर जगह तलाश की लेकिन कोई सफलता नहीं मिली थी। उन्होंने कहा कि मनोसमर्पण संस्था ने उनके खोए हुए पिता को वापस मिलाकर उनके परिवार को नई जिंदगी दी है। इसके लिए वे जीवनभर संस्था के आभारी रहेंगे।
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