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Bageshwar News: हत्यारोपी भाइयों को आजीवन कारावास की सजा

संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर Updated Tue, 17 Mar 2026 11:02 PM IST
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Brothers sentenced to life imprisonment for murder
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बागेश्वर। सत्र न्यायाधीश पंकज तोमर की अदालत ने ग्रामीण की हत्या के आरोपी भाइयों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। उन्हें अलग-अलग धाराओं के तहत 22-22 हजार रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है।
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अभियोजन से मिली जानकारी के अनुसार कपकोट थाना क्षेत्र की नौकोड़ी निवासी सरुली देवी ने 26 दिसंबर 2022 को पुलिस में तहरीर दी थी। इसके अनुसार 25 दिसंबर की रात को गांव में सार्वजनिक पूजा का कार्यक्रम था। पूजा में उनके पति खुशाल सिंह, जेठ शंकर सिंह समेत वह और उनकी जेठानी भी गए थे। करीब 12:30 बजे परिवार के सभी लोग एक स्थान पर बैठकर आग सेक रहे थे। इसी दौरान रंजिश के चलते आरोपी चंचल सिंह और महेश सिंह वहां पहुंचे और खुशाल सिंह और शंकर सिंह पर चाकू से हमला कर दिया। वादि, उसकी जेठानी और अन्य ग्रामीणों ने बीचबचाव करने की कोशिश की, तब तक खुशाल घायल होकर जमीन पर गिर गया था। इसी दौरान आरोपियों ने शंकर सिंह पर ताबड़तोड़ हमले कर दिए और उन्हें भी गंभीर रूप से घायल कर दिया।
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बीचबचाव करने आई दोनों महिलाओं को धक्का देकर गिरा दिया। इसी दौरान चाकू से वादि के हाथ में भी चोट आई। हमला इतना तेज था कि घायल शंकर सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों महिलाएं और ग्रामीण घायल खुशाल को लेकर पैदल रोड तक आए और ग्रामीण की मदद से पुलिस को घटना की सूचना दी। घायल को अस्पताल में भर्ती कराने के बाद कपकोट थाने में मामला दर्ज कराया गया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या की धारा 302 समेत 307, 323, और 506 आईपीसी के तहत प्राथमिकी दर्ज की। विवेचक प्रताप सिंह नगरकोटी ने विवेचना के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया।

अभियोजन ने पेश कराए 20 गवाह

अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी न्यायालय में 20 गवाह पेश कराए गए। सत्र न्यायालय ने गवाहों के बयान और पत्रावली के गहन अध्ययन के बाद आरोपियों को सजा सुनाई। कोर्ट ने धारा 302 के तहत आरोपियों को आजीवन कारावास और 10-10 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। धारा 307 के तहत 10 साल के कठोर कारावास और 10-10 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई। दोनों धाराओं में अर्थदंड जमा नहीं करने पर छह-छह महीने का अतिरिक्त कठोर कारावास भोगना होगा। धारा 323 और 506 में से प्रत्येक में एक-एक वर्ष का साधारण कारावास और एक-एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। अर्थदंड जमा नहीं करने पर एक-एक महीने का अतिरिक्त कारावास भोगना होगा।
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