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Bageshwar News: जसूली दताल शौक्याणी के वंशज करेंगे धर्मशालाओं का नवीनीकरण
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sat, 10 Jan 2026 12:07 AM IST
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बागेश्वर। शौका जनजाति की जसूली दताल शौक्याणी की बनाई धर्मशालाओं का नवीनीकरण किया जाएगा। उनकी पांचवी पीढ़ी के वंशजों ने विभिन्न स्थानों पर खंडहर हो चुकी धर्मशालाओं को नया रूप देने की पहल शुरू की है।
शुक्रवार को तहसील परिसर के बार भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जसुली दताल की पांचवी पीढ़ी के वंशज फली सिंह दताल ने बताया कि उस जमाने में 450 धर्मशालाओं का निर्माण किया गया था। कुमाऊं के अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ समेत नेपाल में भी धर्मशाला बनाई गईं थी। वर्तमान में अधिकांश धर्मशालाएं नष्ट हो चुकी हैं। कुछ धर्मशाला सड़क निर्माण में नष्ट हो गईं तो कई अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई। अवशेष बची धर्मशालाओं की खोजबीन कर चिह्नित किया जा रहा है। अब तक 65 धर्मशालाओं का पता लगाया जा चुका है। बताया कि अल्मोड़ा में भी उनकी 10 मुट्टी आठ नाली जमीन में भी आज कोई धर्मशाला नहीं बची है। आज वह पूरा गांव बस चुका है। अगर वह जमीन मिली होती तो वह जनसेवा के कार्य में लगाई जाती। बताया कि नष्ट होने से बच गई सभी धर्मशालाओं के नवीनीकरण का प्रयास किया जाएगा। इस मौके पर गोविंद सिंह भंडारी, कुंडल सिंह धपोला आदि मौजूद रहे।
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शुक्रवार को तहसील परिसर के बार भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए जसुली दताल की पांचवी पीढ़ी के वंशज फली सिंह दताल ने बताया कि उस जमाने में 450 धर्मशालाओं का निर्माण किया गया था। कुमाऊं के अल्मोड़ा, बागेश्वर, पिथौरागढ़ समेत नेपाल में भी धर्मशाला बनाई गईं थी। वर्तमान में अधिकांश धर्मशालाएं नष्ट हो चुकी हैं। कुछ धर्मशाला सड़क निर्माण में नष्ट हो गईं तो कई अतिक्रमण की भेंट चढ़ गई। अवशेष बची धर्मशालाओं की खोजबीन कर चिह्नित किया जा रहा है। अब तक 65 धर्मशालाओं का पता लगाया जा चुका है। बताया कि अल्मोड़ा में भी उनकी 10 मुट्टी आठ नाली जमीन में भी आज कोई धर्मशाला नहीं बची है। आज वह पूरा गांव बस चुका है। अगर वह जमीन मिली होती तो वह जनसेवा के कार्य में लगाई जाती। बताया कि नष्ट होने से बच गई सभी धर्मशालाओं के नवीनीकरण का प्रयास किया जाएगा। इस मौके पर गोविंद सिंह भंडारी, कुंडल सिंह धपोला आदि मौजूद रहे।
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