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Uk: विषुवत संक्रांति पर बन रहे विशेष योग, कई राशियों पर दोष का प्रभाव; जानें निवारण उपाय

संवाद न्यूज एजेंसी Published by: गायत्री जोशी Updated Mon, 13 Apr 2026 04:58 PM IST
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सार

14 अप्रैल को पड़ रही विषुवत संक्रांति (बैसाखी) इस बार विशेष ज्योतिषीय संयोग लेकर आ रही है। सूर्य के मेष राशि में प्रवेश के साथ कुछ राशियों और नक्षत्रों पर दोष का प्रभाव रहेगा।

Equinox Solstice, the powerful time of the Solar New Year
जानें किन-किन राशियों पर पड़ेगा प्रभाव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

 सौर नववर्ष की महाशक्तिशाली बेला विषुवत संक्रांति (बैसाखी) मंगलवार 14 अप्रैल को है। ज्योतिष गणना के अनुसार इस दिन सूर्य का मेष राशि में प्रवेश हो रहा है और इस कालखंड में ग्रहों की विशेष स्थिति के कारण कुछ विशिष्ट राशियों और नक्षत्रों पर अपैट एवं वामपाद दोष का प्रभाव भी है। दोषों की शांति और वर्ष भर की शुभता के लिए शास्त्रों में अनुष्ठान अनिवार्य हैं।

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार संवत्सर प्रतिपदा के दिन मेष, सिंह एवं धनु राशि और विषुवत संक्रांति के दिन कर्क, वृश्चिक एवं मीन राशि के जातकों को अपैट का दोष रहेगा। पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र, उत्तराभाद्रपदा नक्षत्र और रेवती नक्षत्र अर्थात कुंभ राशि में पूर्वाभाद्रपदा नक्षत्र तथा संपूर्ण मीन राशि में वामपाद दोष का प्रभाव रहेगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. मंजू जोशी ने बताया कि जिन जातकों का 14 अप्रैल को किन्हीं अपरिहार्य कारणों से उपाय न हो सके, वे आगामी पूर्णिमा तिथि पर इन उपायों को पूर्ण कर सकते हैं।

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अपैट दोष निवारण 
सूर्य संक्रांति पर रुद्राभिषेक एवं दुर्गा सप्तशती का पाठ परम कल्याणकारी है। कुल पुरोहित के माध्यम से या किसी पवित्र शिव मंदिर में श्वेत वस्त्र, मोती, चांदी, चावल, दूध, दही, घृत एवं शंख का दान करें। चावल की खीर बनाकर जरूरतमंदों को प्रसाद स्वरूप वितरित करने से सात्विक एवं सकारात्मक फलों की प्राप्ति होगी।

वामपाद दोष एवं निवारण
रुद्राभिषेक एवं दुर्गा सप्तशती का अनुष्ठान करें। दोष शांति के लिए चांदी का वामपाद (बायां पैर) बनवाकर दान करें। इसके अलावा लाल वस्त्र (प्रथम पूज्य गणेश जी के लिए), श्वेत वस्त्र, चावल, दही, दूध, घी, मोती एवं दक्षिणा सामर्थ्यानुसार शिव मंदिर में अर्पित कर आचार्य को दान दें।


नक्षत्र जनित प्रतिकूलता एवं अनुष्ठान
रोहिणी, मृगशिरा, आर्द्रा नक्षत्र (बाएं हाथ में) तथा अश्विनी, भरणी तथा कृतिका नक्षत्र के जातकों के लिए संक्रांति का फल दाहिने पैर में होने के कारण प्रतिकूल रह सकता है, जिससे व्यर्थ भ्रमण, अधिक परिश्रम, शारीरिक कष्ट और धन हानि की आशंका रहेगी। रुद्राभिषेक एवं दुर्गा सप्तशती का अनुष्ठान करें।
 

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