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Bageshwar News: शिक्षा मंत्री के सख्त निर्देश भी बेअसर, 22 दिन बाद भी ठंडे बस्ते में जांच
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बागेश्वर। अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय के लिपिक को बीईओ कार्यालय कपकोट में असंवैधानिक रूप से अटैच करने के चर्चित मामले में शिक्षा मंत्री के सख्त रवैये के बाद भी जांच प्रक्रिया ठप पड़ी है। मंत्री के निर्देश पर सीईओ ने जांच तो सौंपी लेकिन 22 दिन बाद भी जांच एक कदम आगे नहीं बढ़ पाई है।
बीती चार जुलाई को जवाहर लाल नेहरू इंटर कॉलेज शामा के एक कर्मचारी को नियमों को ताक पर रखकर बीईओ कार्यालय कपकोट में संबद्ध करने का मामला उजागर हुआ था। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के हस्ताक्षर से जारी फर्जीवाड़े की आशंका वाले पत्र के सामने आने पर खलबली मच गई थी।
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मंत्री ने मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए जिले के सीईओ को तत्काल पूरे प्रकरण की जांच कर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे। मंत्री की फटकार के बाद विभागीय अमले ने आनन-फानन में संबंधित कर्मचारी का अटैचमेंट समाप्त कर उसे मूल विद्यालय तो भेज दिया लेकिन पूरे खेल के पीछे शामिल अधिकारियों और कार्मिकों की जवाबदेही तय करने के लिए शुरू की जाने वाली जांच ठंडे बस्ते में चली गई। 22 दिन बीतने के बाद भी किसी प्रकार की विभागीय जांच या रिपोर्ट सामने नहीं आ सकी है।
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कोट
शिक्षा मंत्री के निर्देश पर कपकोट के उप शिक्षा अधिकारी और प्रभारी बीईओ को मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश जारी किए गए थे। लेकिन संबंधित अधिकारी के लंबे अवकाश पर चले जाने के कारण प्रक्रिया प्रभावित हुई है। वर्तमान में गरुड़ की उप शिक्षा अधिकारी के पास कपकोट का भी अतिरिक्त प्रभार है। जल्द ही मामले की जांच की जाएगी। - विनय कुमार, सीईओ, बागेश्वर