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Bageshwar News: .खेतों में ही नहीं, गमलों में भी उगाइए हर्ब्स
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बागेश्वर। बदलती जीवनशैली के बीच लोग अब केमिकल युक्त उत्पादों से दूरी बनाकर प्राकृतिक आहार, स्वास्थ्य और हर्बल जीवनशैली की ओर तेजी से लौट रहे हैं। रसोई के स्वाद को बढ़ाने से लेकर सेहत सुधारने तक, औषधीय और सुगंधित पौधों का चलन लगातार बढ़ रहा है। इस दिशा में गरुड़ स्थित सीएसआईआर केंद्रीय औषधीय और सीमैप अनुसंधान केंद्र पुरड़ा एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
केंद्र में तैयार की जा रहीं हर्ब्स की उन्नत किस्में अब केवल किसानों के खेतों तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि शहरी परिवारों की बालकनी, छतों और किचन गार्डन की भी शोभा बढ़ा रही हैं। सीमैप पुरड़ा में रोजमेरी, ओरिगैनो, लेमनग्रास, लेमन बाम, थाइम और स्टीविया जैसी बहुमूल्य किस्मों की नर्सरी तैयार की जा रही है। संवाद
बहुवर्षीय प्रकृति के हैं ये पौधे
ये पौधे बहुवर्षीय प्रकृति के हैं यानी एक बार रोपने के बाद कई वर्षों तक बार-बार रोपने की आवश्यकता नहीं पड़ती। जरूरत पड़ने पर इनकी पत्तियों और कोमल टहनियों की कटाई-छंटाई की जा सकती है। उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में किसान और हर्बल प्रेमी यहां पौध लेने पहुंच रहे हैं।
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आयात पर निर्भरता खत्म, स्टार्टअप्स के नए दरवाजे
कुछ वर्ष पूर्व तक रोजमेरी, थाइम और ओरिगैनो जैसी हर्ब्स का उपयोग मुख्य रूप से विदेश से आयातित डिब्बा बंद उत्पादों के जरिये होता था। सीमैप की पहल से अब देश में ही इनका गुणवत्तायुक्त उत्पादन संभव हो पाया है। इससे जहां एक ओर किसानों को पारंपरिक खेती के मुकाबले बेहतर आमदनी मिल रही है, वहीं युवाओं के लिए हर्बल टी पैकेजिंग, एसेंशियल ऑयल और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स के क्षेत्र में नए स्टार्टअप्स की भरपूर संभावनाएं बन रही हैं।
कोट
सीमैप पुरड़ा में विकसित उन्नत हर्ब्स की खेती किसानों के साथ शहरी परिवारों के लिए भी बेहद लाभकारी है। इन बहुवर्षीय पौधों को एक बार लगाने पर कई वर्षों तक उपयोग किया जा सकता है। केंद्र में पौध सामग्री के साथ-साथ नर्सरी प्रबंधन, वैज्ञानिक खेती, कटाई उपरांत प्रबंधन और वैल्यू एडिशन का पूरा तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। - डॉ. प्रवल प्रताप सिंह वर्मा, वैज्ञानिक, सीमैप अनुसंधान केंद्र, पुरड़ा
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केंद्र में तैयार की जा रहीं हर्ब्स की उन्नत किस्में अब केवल किसानों के खेतों तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि शहरी परिवारों की बालकनी, छतों और किचन गार्डन की भी शोभा बढ़ा रही हैं। सीमैप पुरड़ा में रोजमेरी, ओरिगैनो, लेमनग्रास, लेमन बाम, थाइम और स्टीविया जैसी बहुमूल्य किस्मों की नर्सरी तैयार की जा रही है। संवाद
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बहुवर्षीय प्रकृति के हैं ये पौधे
ये पौधे बहुवर्षीय प्रकृति के हैं यानी एक बार रोपने के बाद कई वर्षों तक बार-बार रोपने की आवश्यकता नहीं पड़ती। जरूरत पड़ने पर इनकी पत्तियों और कोमल टहनियों की कटाई-छंटाई की जा सकती है। उत्तराखंड सहित अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में किसान और हर्बल प्रेमी यहां पौध लेने पहुंच रहे हैं।
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आयात पर निर्भरता खत्म, स्टार्टअप्स के नए दरवाजे
कुछ वर्ष पूर्व तक रोजमेरी, थाइम और ओरिगैनो जैसी हर्ब्स का उपयोग मुख्य रूप से विदेश से आयातित डिब्बा बंद उत्पादों के जरिये होता था। सीमैप की पहल से अब देश में ही इनका गुणवत्तायुक्त उत्पादन संभव हो पाया है। इससे जहां एक ओर किसानों को पारंपरिक खेती के मुकाबले बेहतर आमदनी मिल रही है, वहीं युवाओं के लिए हर्बल टी पैकेजिंग, एसेंशियल ऑयल और वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स के क्षेत्र में नए स्टार्टअप्स की भरपूर संभावनाएं बन रही हैं।
कोट
सीमैप पुरड़ा में विकसित उन्नत हर्ब्स की खेती किसानों के साथ शहरी परिवारों के लिए भी बेहद लाभकारी है। इन बहुवर्षीय पौधों को एक बार लगाने पर कई वर्षों तक उपयोग किया जा सकता है। केंद्र में पौध सामग्री के साथ-साथ नर्सरी प्रबंधन, वैज्ञानिक खेती, कटाई उपरांत प्रबंधन और वैल्यू एडिशन का पूरा तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जा रहा है। - डॉ. प्रवल प्रताप सिंह वर्मा, वैज्ञानिक, सीमैप अनुसंधान केंद्र, पुरड़ा