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Bageshwar News: जिला अस्पताल के डॉक्टरों, स्टाॅफ और 108 कर्मियों के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर
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आर्मी जवान के 14 महीने के बेटे शिवांश की मौत का मामला, डीएम बागेश्वर की जांच रिपोर्ट के बाद अदालत का कड़ा रुख
संवाद न्यूज एजेंसी
बागेश्वर। स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की संवेदनहीनता के कारण एक मासूम बच्चे की जान जाने के मामले में अब न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट थराली ने भारतीय सेना में कार्यरत सैनिक दिनेश चंद्र जोशी के 14 महीने के पुत्र शिवांश जोशी की मौत के लिए जिम्मेदार डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और 108 आपातकालीन सेवा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
घटनाक्रम मुख्य रूप से जिला अस्पताल से जुड़ा होने के कारण इस आदेश के बाद जिले के स्वास्थ्य महकमे में हलचल मची हुई है। वादी दिनेश चंद्र जोशी, निवासी ग्राम चिडिंगा खालसा, थराली की ओर से उनके अधिवक्ता आरसी कुनियाल ने अदालत में बीएएनएस की धारा 175 (3) के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने थाना थराली को तत्काल अविलंब एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। बीते 10 जुलाई 2025 को 14 महीने के मासूम शिवांश की तबीयत खराब होने पर परिजन उसे सीएचसी ग्वालदम ले गए, जहां बाल रोग विशेषज्ञ न होने के कारण उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ रेफर कर दिया गया।
शाम 4:30 से 6:15 बजे बैजनाथ अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल बागेश्वर भेजा दिया। शाम सवा छह बजे बच्चा जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचा। परिजनों के आरोप है कि यहां तैनात डॉ. भूपेंद्र घटियाल और बाल रोग विशेषज्ञ ने बच्चे को देखने के बाद महज दो मिनट में अल्मोड़ा के लिए रेफर कर दिया। जब पीड़ित पिता ने जम्मू-राजौरी सेक्टर से फोन पर डॉ. घटियाल से एंबुलेंस दिलाने की गुहार लगाई, तो उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, वार्डबॉय और नर्स मोबाइल चलाने में व्यस्त रहे। तत्कालीन डीएम आशीष भटगांईं के हस्तक्षेप के बाद रात 9:30 बजे एंबुलेंस मिली।
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अल्मोड़ा ले जाते समय एम्बुलेंस में कोई डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं था, जिससे बच्चे के हाथ की ग्लूकोज नीडिल निकल गई और ऑक्सीजन भी हट गई। 16 मई 2025 को अल्मोड़ा से सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी रेफर किए जाने के बाद, इलाज के दौरान गंभीर संक्रमण के चलते मासूम शिवांश ने दम तोड़ दिया।
...इनसेट
वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों की राय, यह सीधे तौर पर घोर लापरवाही का मामला
पूरे कानूनी घटनाक्रम और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर क्षेत्र के विधिक विशेषज्ञों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। मामले पर टिप्पणी करते हुए सीनियर क्रिमिनल लॉयर बीएम गौड़ ने कहा कि जब प्रशासनिक जांच में डॉक्टरों और स्टाफ का रवैया उदासीन, असंवेदनशील और मानवीय संवेदनाओं के विपरीत पाया गया है, तो यह सीधे तौर पर आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है। सीनियर एडवोकेट गौड़ के मुताबिक, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार वाद के सिद्धांतों के तहत भी डॉक्टरों की ऐसी घोर लापरवाही पर सीधे मुकदमा दर्ज होना चाहिए था, जिसमें पुलिस अधिकारियों की ओर से हीलाहवाली की गई। उन्होंने कि थराली कोर्ट का यह आदेश पीड़ित फौजी परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ा और स्वागत योग्य कदम है, जिससे सरकारी तंत्र की जवाबदेही तय होगी।
....इनसेट
सीएमओ की क्लीन चिट को स्वास्थ्य सचिव ने किया था खारिज
इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जांच के आदेश दिए थे। शुरुआत में सीएमओ डॉ. कुमार आदित्य ने डॉक्टरों को क्लीन चिट देते हुए एकतरफा रिपोर्ट शासन को भेजी थी, जिसे उत्तराखंड के स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने सिरे से खारिज कर दिया। तत्कालीन डीएम आशीष भटगाईं ने गठित उच्च स्तरीय जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर माना कि जिला चिकित्सालय में तैनात डॉ. भूपेंद्र घटियाल, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकित कुमार, नर्सिंग अधिकारी महेश कुमार, हिमानी और कक्ष सेवक सूरज सिंह की पूरी टीम का रवैया उदासीन, असंवेदनशील और घोर लापरवाह रहा है। साथ ही 108 एंबुलेंस के चालकों को भी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में दोषी पाया गया। जांच रिपोर्ट को आधार बनाते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट देवांश राठौर ने थाना थराली को आदेशित किया है कि वे चिकित्सकों और दोषी स्टाफ के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में तत्काल मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना सुनिश्चित करें।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बागेश्वर। स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की संवेदनहीनता के कारण एक मासूम बच्चे की जान जाने के मामले में अब न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय न्यायिक मजिस्ट्रेट थराली ने भारतीय सेना में कार्यरत सैनिक दिनेश चंद्र जोशी के 14 महीने के पुत्र शिवांश जोशी की मौत के लिए जिम्मेदार डॉक्टरों, पैरामेडिकल स्टाफ और 108 आपातकालीन सेवा के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है।
घटनाक्रम मुख्य रूप से जिला अस्पताल से जुड़ा होने के कारण इस आदेश के बाद जिले के स्वास्थ्य महकमे में हलचल मची हुई है। वादी दिनेश चंद्र जोशी, निवासी ग्राम चिडिंगा खालसा, थराली की ओर से उनके अधिवक्ता आरसी कुनियाल ने अदालत में बीएएनएस की धारा 175 (3) के तहत प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने थाना थराली को तत्काल अविलंब एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। बीते 10 जुलाई 2025 को 14 महीने के मासूम शिवांश की तबीयत खराब होने पर परिजन उसे सीएचसी ग्वालदम ले गए, जहां बाल रोग विशेषज्ञ न होने के कारण उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बैजनाथ रेफर कर दिया गया।
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शाम 4:30 से 6:15 बजे बैजनाथ अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद बच्चे को बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल बागेश्वर भेजा दिया। शाम सवा छह बजे बच्चा जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचा। परिजनों के आरोप है कि यहां तैनात डॉ. भूपेंद्र घटियाल और बाल रोग विशेषज्ञ ने बच्चे को देखने के बाद महज दो मिनट में अल्मोड़ा के लिए रेफर कर दिया। जब पीड़ित पिता ने जम्मू-राजौरी सेक्टर से फोन पर डॉ. घटियाल से एंबुलेंस दिलाने की गुहार लगाई, तो उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, वार्डबॉय और नर्स मोबाइल चलाने में व्यस्त रहे। तत्कालीन डीएम आशीष भटगांईं के हस्तक्षेप के बाद रात 9:30 बजे एंबुलेंस मिली।
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अल्मोड़ा ले जाते समय एम्बुलेंस में कोई डॉक्टर या नर्सिंग स्टाफ मौजूद नहीं था, जिससे बच्चे के हाथ की ग्लूकोज नीडिल निकल गई और ऑक्सीजन भी हट गई। 16 मई 2025 को अल्मोड़ा से सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी रेफर किए जाने के बाद, इलाज के दौरान गंभीर संक्रमण के चलते मासूम शिवांश ने दम तोड़ दिया।
...इनसेट
वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों की राय, यह सीधे तौर पर घोर लापरवाही का मामला
पूरे कानूनी घटनाक्रम और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर क्षेत्र के विधिक विशेषज्ञों ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। मामले पर टिप्पणी करते हुए सीनियर क्रिमिनल लॉयर बीएम गौड़ ने कहा कि जब प्रशासनिक जांच में डॉक्टरों और स्टाफ का रवैया उदासीन, असंवेदनशील और मानवीय संवेदनाओं के विपरीत पाया गया है, तो यह सीधे तौर पर आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है। सीनियर एडवोकेट गौड़ के मुताबिक, माननीय सर्वोच्च न्यायालय के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार वाद के सिद्धांतों के तहत भी डॉक्टरों की ऐसी घोर लापरवाही पर सीधे मुकदमा दर्ज होना चाहिए था, जिसमें पुलिस अधिकारियों की ओर से हीलाहवाली की गई। उन्होंने कि थराली कोर्ट का यह आदेश पीड़ित फौजी परिवार को न्याय दिलाने की दिशा में एक बड़ा और स्वागत योग्य कदम है, जिससे सरकारी तंत्र की जवाबदेही तय होगी।
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सीएमओ की क्लीन चिट को स्वास्थ्य सचिव ने किया था खारिज
इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी ने जांच के आदेश दिए थे। शुरुआत में सीएमओ डॉ. कुमार आदित्य ने डॉक्टरों को क्लीन चिट देते हुए एकतरफा रिपोर्ट शासन को भेजी थी, जिसे उत्तराखंड के स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने सिरे से खारिज कर दिया। तत्कालीन डीएम आशीष भटगाईं ने गठित उच्च स्तरीय जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर माना कि जिला चिकित्सालय में तैनात डॉ. भूपेंद्र घटियाल, बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकित कुमार, नर्सिंग अधिकारी महेश कुमार, हिमानी और कक्ष सेवक सूरज सिंह की पूरी टीम का रवैया उदासीन, असंवेदनशील और घोर लापरवाह रहा है। साथ ही 108 एंबुलेंस के चालकों को भी अपने कर्तव्यों के निर्वहन में दोषी पाया गया। जांच रिपोर्ट को आधार बनाते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट देवांश राठौर ने थाना थराली को आदेशित किया है कि वे चिकित्सकों और दोषी स्टाफ के विरुद्ध सुसंगत धाराओं में तत्काल मुकदमा पंजीकृत कर विवेचना सुनिश्चित करें।