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Bageshwar News: अमरीकी पति की अंतिम इच्छा पूरी करने जापान से पहुंचीं मियाको, सरयू की पवित्र धारा में प्रवाहित कीं अस्थियां
Sun, 09 Aug 2026 11:14 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sun, 09 Aug 2026 11:14 PM IST
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बागेश्वर। अमरीका निवासी रॉबर्ट केटलेट की अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए उनकी जापानी पत्नी मियाको केटलेट ने रविवार को पवित्र सरयू नदी में उनकी अस्थियां प्रवाहित कर दीं। सरयू तट पर वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। इस भावुक क्षण के दौरान उनके परिवार के लोग भी मौजूद रहे।
मूलरूप से अमरीका के रहने वाले रॉबर्ट केटलेट की मुलाकात वर्ष 2005 में एक योग साधना शिविर में मियाको से हुई थी। मियाको उस समय जापान में अंग्रेजी की प्रोफेसर थीं। उनके आग्रह पर रॉबर्ट वर्ष 2007 में अमरीका छोड़कर जापान आ गए और वहां अंग्रेजी अध्यापन का कार्य करने लगे। रॉबर्ट का बागेश्वर से गहरा लगाव था। वर्ष 2007 में वह मियाको को भी बागेश्वर लाए और यहां के प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण से रूबरू कराया। इसके बाद वर्ष 2009 में दोनों परिणय सूत्र में बंध गए और जापान में साथ रहने लगे। वर्ष 2022 में गंभीर बीमारी के चलते रॉबर्ट का निधन हो गया था। पति के जाने के गम और मानसिक पीड़ा के बावजूद मियाको ने रॉबर्ट की अंतिम इच्छा को अपने मन में जीवित रखा। रॉबर्ट का बागेश्वर और सरयू नदी से विशेष लगाव था, इसी इच्छा को सम्मान देते हुए मियाको अस्थियां लेकर बागेश्वर पहुंचीं और सरयू की धारा में उन्हें विसर्जित कर पति को अंतिम विदाई दी।
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मूलरूप से अमरीका के रहने वाले रॉबर्ट केटलेट की मुलाकात वर्ष 2005 में एक योग साधना शिविर में मियाको से हुई थी। मियाको उस समय जापान में अंग्रेजी की प्रोफेसर थीं। उनके आग्रह पर रॉबर्ट वर्ष 2007 में अमरीका छोड़कर जापान आ गए और वहां अंग्रेजी अध्यापन का कार्य करने लगे। रॉबर्ट का बागेश्वर से गहरा लगाव था। वर्ष 2007 में वह मियाको को भी बागेश्वर लाए और यहां के प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक वातावरण से रूबरू कराया। इसके बाद वर्ष 2009 में दोनों परिणय सूत्र में बंध गए और जापान में साथ रहने लगे। वर्ष 2022 में गंभीर बीमारी के चलते रॉबर्ट का निधन हो गया था। पति के जाने के गम और मानसिक पीड़ा के बावजूद मियाको ने रॉबर्ट की अंतिम इच्छा को अपने मन में जीवित रखा। रॉबर्ट का बागेश्वर और सरयू नदी से विशेष लगाव था, इसी इच्छा को सम्मान देते हुए मियाको अस्थियां लेकर बागेश्वर पहुंचीं और सरयू की धारा में उन्हें विसर्जित कर पति को अंतिम विदाई दी।
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