{"_id":"6a28557bf206954f1d0e8c14","slug":"tarmoli-pumping-scheme-stalled-due-to-lack-of-funds-bageshwar-news-c-231-1-shld1005-125594-2026-06-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bageshwar News: बजट के अभाव में अटकी तरमोली पंपिंग योजना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Bageshwar News: बजट के अभाव में अटकी तरमोली पंपिंग योजना
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Tue, 09 Jun 2026 11:33 PM IST
विज्ञापन
तरमोली पंपिंग योजना का टैंक। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
बागेश्वर। काफलीगैर तहसील क्षेत्र के ग्रामीणों को घर-घर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के सरकारी दावों की धरातल पर हवा निकल चुकी है। क्षेत्र के 11 राजस्व गांवों की प्यास बुझाने के लिए 14.56 करोड़ रुपये से स्वीकृत तरमोली ग्राम समूह पंपिंग पेयजल योजना विभागीय सुस्ती और बजटीय संकट के दलदल में फंसकर रह गई है। योजना को पूरा करने की निर्धारित समय-सीमा मार्च 2024 में ही बीत चुकी है लेकिन दो साल बाद भी कार्यदायी संस्था पेयजल निगम इसे अंतिम रूप नहीं दे पाया है।
कुल 14.56 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट में से शासन ने अब तक केवल सात करोड़ रुपये ही अवमुक्त हो पाए हैं। पिछले दो वर्षों से एक भी रुपया जारी न होने के कारण निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है और ठेकेदारों का पुराना भुगतान भी अटक गया है। विभाग की ओर से योजना का सिविल कार्य शत-प्रतिशत पूरा होने का दावा किया जा रहा है लेकिन हकीकत यह है कि प्रभावित 11 गांवों की जनता आज भी बूंद-बूंद पानी को तरस रही है।
पेयजल निगम के एई बीएस रौतेला ने योजना की तकनीकी खामियों को उजागर करते हुए बताया कि योजना के लिए जारी कुल बजट में से चार करोड़ रुपये तो ऊर्जा निगम ने सिर्फ काफलीगैर क्षेत्र से अलग से हाई-वोल्टेज बिजली लाइन खींचने में खर्च कर दिए। साल 2012-13 में तैयार की गई डीपीआर के समय क्षेत्र में पानी के कनेक्शनों की आवश्यकता बहुत कम थी लेकिन बीते 13-14 सालों में आए भौगोलिक बदलाव और आबादी बढ़ने के कारण अब धरातल पर कई व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं। वर्तमान स्रोतों से जितना संभव है, उतने कनेक्शन दिए जा रहे हैं। संवाद
विज्ञापन
......कोट
हमारे सिया-बौड़ी क्षेत्र में इस बड़ी पेयजल योजना का लाभ अभी तक किसी को नहीं मिल पा रहा है। गांव के कई परिवारों को तो अब तक पानी का संयोजन तक नसीब नहीं हुआ है। लोग पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर हैं। - डौली देवी, ग्राम प्रधान, सिया
....कोट
हमने अधूरी योजना को लेकर कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया। इसके बावजूद कार्य जस का तस लंबित है। योजना के नाम पर हमारे ग्रामीणों को अब तक एक बूंद पानी नहीं मिला है। - संदीप असवाल, ग्राम प्रधान असों
इतने साल बीत जाने और करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता की प्यास नहीं बुझ रही है। ऐसी हाथीदांत साबित होने वाली पेयजल योजनाओं का निर्माण कराना सरकारी धन और करोड़ों रुपये की बर्बादी है। - - नंदन सिंह, ग्रामीण
.....कोट
योजना में बीते दो साल से शासन स्तर से फूटी कौड़ी अवमुक्त नहीं हुई है। 2012-13 की पुरानी डीपीआर के अनुसार बनी इस योजना को अब नए स्वरूप और अतिरिक्त बजट की जरूरत है, लेकिन यहां तो पुराना काम ही पूरा नहीं हो पा रहा। -चंदन रावत, पूर्व जिपं सदस्य
......कोट
तरमोली पंपिंग योजना का सिविल कार्य पूरा हो चुका है। पिछले दो वर्षों से शासन स्तर से बजट अवमुक्त न होने के कारण ठेकेदारों का भुगतान रुक गया, जिससे अंतिम चरण का काम प्रभावित हुआ है। साल 2012-13 की पुरानी डीपीआर के बाद क्षेत्र में आबादी और पानी के कनेक्शन काफी बढ़ गए हैं। इस भौगोलिक बदलाव को देखते हुए एक संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। - विपिन कुमार रवि, ईई, पेयजल निगम बागेश्वर
कुल 14.56 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट में से शासन ने अब तक केवल सात करोड़ रुपये ही अवमुक्त हो पाए हैं। पिछले दो वर्षों से एक भी रुपया जारी न होने के कारण निर्माण कार्य पूरी तरह ठप पड़ा है और ठेकेदारों का पुराना भुगतान भी अटक गया है। विभाग की ओर से योजना का सिविल कार्य शत-प्रतिशत पूरा होने का दावा किया जा रहा है लेकिन हकीकत यह है कि प्रभावित 11 गांवों की जनता आज भी बूंद-बूंद पानी को तरस रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पेयजल निगम के एई बीएस रौतेला ने योजना की तकनीकी खामियों को उजागर करते हुए बताया कि योजना के लिए जारी कुल बजट में से चार करोड़ रुपये तो ऊर्जा निगम ने सिर्फ काफलीगैर क्षेत्र से अलग से हाई-वोल्टेज बिजली लाइन खींचने में खर्च कर दिए। साल 2012-13 में तैयार की गई डीपीआर के समय क्षेत्र में पानी के कनेक्शनों की आवश्यकता बहुत कम थी लेकिन बीते 13-14 सालों में आए भौगोलिक बदलाव और आबादी बढ़ने के कारण अब धरातल पर कई व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं। वर्तमान स्रोतों से जितना संभव है, उतने कनेक्शन दिए जा रहे हैं। संवाद
......कोट
हमारे सिया-बौड़ी क्षेत्र में इस बड़ी पेयजल योजना का लाभ अभी तक किसी को नहीं मिल पा रहा है। गांव के कई परिवारों को तो अब तक पानी का संयोजन तक नसीब नहीं हुआ है। लोग पारंपरिक स्रोतों पर निर्भर हैं। - डौली देवी, ग्राम प्रधान, सिया
....कोट
हमने अधूरी योजना को लेकर कई बार संबंधित विभाग और अधिकारियों को लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया। इसके बावजूद कार्य जस का तस लंबित है। योजना के नाम पर हमारे ग्रामीणों को अब तक एक बूंद पानी नहीं मिला है। - संदीप असवाल, ग्राम प्रधान असों
इतने साल बीत जाने और करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी जनता की प्यास नहीं बुझ रही है। ऐसी हाथीदांत साबित होने वाली पेयजल योजनाओं का निर्माण कराना सरकारी धन और करोड़ों रुपये की बर्बादी है। - - नंदन सिंह, ग्रामीण
.....कोट
योजना में बीते दो साल से शासन स्तर से फूटी कौड़ी अवमुक्त नहीं हुई है। 2012-13 की पुरानी डीपीआर के अनुसार बनी इस योजना को अब नए स्वरूप और अतिरिक्त बजट की जरूरत है, लेकिन यहां तो पुराना काम ही पूरा नहीं हो पा रहा। -चंदन रावत, पूर्व जिपं सदस्य
......कोट
तरमोली पंपिंग योजना का सिविल कार्य पूरा हो चुका है। पिछले दो वर्षों से शासन स्तर से बजट अवमुक्त न होने के कारण ठेकेदारों का भुगतान रुक गया, जिससे अंतिम चरण का काम प्रभावित हुआ है। साल 2012-13 की पुरानी डीपीआर के बाद क्षेत्र में आबादी और पानी के कनेक्शन काफी बढ़ गए हैं। इस भौगोलिक बदलाव को देखते हुए एक संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। - विपिन कुमार रवि, ईई, पेयजल निगम बागेश्वर