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Bageshwar News: बर्फीली वादियों में रोमांच बढ़ा, पिंडारी ने पुकारा तो पर्यटक चले आए
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कपकोट (बागेश्वर)। हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध पिंडारी, सुंदरढुंगा और कफनी ग्लेशियर इस सीजन में भी देश-विदेश के प्रकृति प्रेमियों और साहसिक पर्यटन के शौकीनों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे।
15 मार्च से 15 जून तक चले इस वर्ष के ट्रेकिंग सीजन में कुल 2,128 पर्यटक इन ग्लेशियरों की शांत वादियों में पहुंचे जो पिछले सीजन की तुलना में बेहतर आंकड़ा है। सरकार की ओर से बेस्ट ट्रैक रूट घोषित होने के कारण इस बार भी पिंडारी ग्लेशियर पर्यटकों की पहली पसंद बना रहा। संवाद
पिंडारी ग्लेशियर
- इस सीजन में सबसे अधिक करीब 1100 देशी-विदेशी ट्रैकर यहां पहुंचे। समुद्र तल से 3700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पिंडारी ट्रैक के जीरो पॉइंट से नंदा कोट, छांगुच, मैकतोली, पनवाली द्वार, नंदा खाट और बल्जुरी जैसी भव्य हिमालयी चोटियों के अद्भुत दर्शन होते हैं। इस बार वापसी के दौरान छिल्याणी के पास एक देशी पर्यटक के लापता होने की घटना सुरक्षा के लिहाज से चर्चा में रही।
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सुंदरढुंगा
- सुंदरढुंगा में पर्यटकों की संख्या लगातार घट रही है। इस सीजन में यहां महज 100 पर्यटक पहुंचे। कुछ वर्ष पूर्व आए बर्फीले तूफान में पांच बंगाली पर्यटकों और एक स्थानीय गाइड की मौत के बाद से ट्रैकर्स इस रूट पर जाने से कतरा रहे हैं।
कफनी ग्लेशियर -
- वर्ष 2013 की आपदा के बाद से कफनी ग्लेशियर ट्रैक की स्थिति बदतर हो चुकी है। रखरखाव के अभाव में यह रास्ता लगभग बंद होने के कगार पर है जिसके चलते इस पूरे सीजन में यहां केवल 7 पर्यटक ही पहुंच सके।
नया डेस्टिनेशन बनकर उभरा रनथन खड़क ट्रैक
नामिक स्थित रनथन खड़क ट्रैक नया डेस्टिनेशन उभरा है। कपकोट के गोगिना से पिथौरागढ़ के नामिक गांव होकर जाने वाला यह ट्रैक रूट 12,887 फीट की ऊंचाई पर रनथन टॉप तक जाता है जहां से पंचाचुली, नंदा कोट, नंदा देवी और छांगुच चोटियां दिखाई देती हैं। हिचौड़ी पंजीकरण केंद्र के रिकॉर्ड के अनुसार इस सीजन में रिकॉर्ड 755 पर्यटक (510 पुरुष और 245 महिलाएं) इस रूट पर पहुंचे। इसके अलावा ट्रैकिंग रूटों के मुख्य गेट पर पंजीकरण कराने वाले 166 पर्यटक अन्य रूटों पर गए।
कोट
पर्यटकों की सुविधा के लिए हिचौड़ी और जैकुनी में दो पंजीकरण केंद्र बनाए हैं और यह ट्रेकिंग रूट साल में दो बार खोला जाता है। पर्यावरण संरक्षण और ट्रैक मार्गों को पॉलिथीन मुक्त रखने के लिए इस बार पहली बार एक विशेष जमानत राशि का नियम लागू किया गया। इस पहल के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। -डौली डोभाल, रेंजर, ग्लेशियर रेंज
- ग्लेशियर क्षेत्र में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ हिमालयी पर्यावरण की सुरक्षा प्राथमिकता है। इस बार लागू की गई प्लास्टिक रिफंड नीति बेहद सफल रही है। प्रयास है कि भविष्य में ट्रैक मार्गों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर स्थानीय युवाओं को गाइड और टूर ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकें। - आदित्य रत्न, डीएफओ बागेश्वर
बदहाल सड़कें और खराब नेटवर्क बन रहे पर्यटन की राह में रोड़ा
क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की संख्या में आ रही भारी गिरावट वन विभाग और स्थानीय व्यवसायियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इस पूरे सीजन में पिंडारी में केवल 17 विदेशी पर्यटक पहुंचे। स्थानीय टूर ऑपरेटर्स का साफ कहना है कि यदि सड़कें और मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी बेहतर होती, तो यह संख्या कई गुना अधिक होती।
3.5 घंटे में कटता है महज 45 किमी का सफर
- कपकोट से कर्मी और वहां से खरकिया तक का मुख्य मार्ग पूरी तरह बदहाल है। कपकोट से खाती गांव की दूरी महज 45 किलोमीटर है लेकिन जानलेवा गड्ढों और बदहाली के कारण इस दूरी को तय करने में 3.5 से 4 घंटे का लंबा समय लग जाता है। बुनियादी सुविधाओं का यह अभाव साहसिक पर्यटन की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है।
15 मार्च से 15 जून तक चले इस वर्ष के ट्रेकिंग सीजन में कुल 2,128 पर्यटक इन ग्लेशियरों की शांत वादियों में पहुंचे जो पिछले सीजन की तुलना में बेहतर आंकड़ा है। सरकार की ओर से बेस्ट ट्रैक रूट घोषित होने के कारण इस बार भी पिंडारी ग्लेशियर पर्यटकों की पहली पसंद बना रहा। संवाद
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पिंडारी ग्लेशियर
- इस सीजन में सबसे अधिक करीब 1100 देशी-विदेशी ट्रैकर यहां पहुंचे। समुद्र तल से 3700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पिंडारी ट्रैक के जीरो पॉइंट से नंदा कोट, छांगुच, मैकतोली, पनवाली द्वार, नंदा खाट और बल्जुरी जैसी भव्य हिमालयी चोटियों के अद्भुत दर्शन होते हैं। इस बार वापसी के दौरान छिल्याणी के पास एक देशी पर्यटक के लापता होने की घटना सुरक्षा के लिहाज से चर्चा में रही।
सुंदरढुंगा
- सुंदरढुंगा में पर्यटकों की संख्या लगातार घट रही है। इस सीजन में यहां महज 100 पर्यटक पहुंचे। कुछ वर्ष पूर्व आए बर्फीले तूफान में पांच बंगाली पर्यटकों और एक स्थानीय गाइड की मौत के बाद से ट्रैकर्स इस रूट पर जाने से कतरा रहे हैं।
कफनी ग्लेशियर -
- वर्ष 2013 की आपदा के बाद से कफनी ग्लेशियर ट्रैक की स्थिति बदतर हो चुकी है। रखरखाव के अभाव में यह रास्ता लगभग बंद होने के कगार पर है जिसके चलते इस पूरे सीजन में यहां केवल 7 पर्यटक ही पहुंच सके।
नया डेस्टिनेशन बनकर उभरा रनथन खड़क ट्रैक
नामिक स्थित रनथन खड़क ट्रैक नया डेस्टिनेशन उभरा है। कपकोट के गोगिना से पिथौरागढ़ के नामिक गांव होकर जाने वाला यह ट्रैक रूट 12,887 फीट की ऊंचाई पर रनथन टॉप तक जाता है जहां से पंचाचुली, नंदा कोट, नंदा देवी और छांगुच चोटियां दिखाई देती हैं। हिचौड़ी पंजीकरण केंद्र के रिकॉर्ड के अनुसार इस सीजन में रिकॉर्ड 755 पर्यटक (510 पुरुष और 245 महिलाएं) इस रूट पर पहुंचे। इसके अलावा ट्रैकिंग रूटों के मुख्य गेट पर पंजीकरण कराने वाले 166 पर्यटक अन्य रूटों पर गए।
कोट
पर्यटकों की सुविधा के लिए हिचौड़ी और जैकुनी में दो पंजीकरण केंद्र बनाए हैं और यह ट्रेकिंग रूट साल में दो बार खोला जाता है। पर्यावरण संरक्षण और ट्रैक मार्गों को पॉलिथीन मुक्त रखने के लिए इस बार पहली बार एक विशेष जमानत राशि का नियम लागू किया गया। इस पहल के सकारात्मक परिणाम मिले हैं। -डौली डोभाल, रेंजर, ग्लेशियर रेंज
- ग्लेशियर क्षेत्र में साहसिक पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ हिमालयी पर्यावरण की सुरक्षा प्राथमिकता है। इस बार लागू की गई प्लास्टिक रिफंड नीति बेहद सफल रही है। प्रयास है कि भविष्य में ट्रैक मार्गों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाए। संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर स्थानीय युवाओं को गाइड और टूर ऑपरेटर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा ताकि स्वरोजगार के अवसर बढ़ सकें। - आदित्य रत्न, डीएफओ बागेश्वर
बदहाल सड़कें और खराब नेटवर्क बन रहे पर्यटन की राह में रोड़ा
क्षेत्र में विदेशी पर्यटकों की संख्या में आ रही भारी गिरावट वन विभाग और स्थानीय व्यवसायियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इस पूरे सीजन में पिंडारी में केवल 17 विदेशी पर्यटक पहुंचे। स्थानीय टूर ऑपरेटर्स का साफ कहना है कि यदि सड़कें और मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी बेहतर होती, तो यह संख्या कई गुना अधिक होती।
3.5 घंटे में कटता है महज 45 किमी का सफर
- कपकोट से कर्मी और वहां से खरकिया तक का मुख्य मार्ग पूरी तरह बदहाल है। कपकोट से खाती गांव की दूरी महज 45 किलोमीटर है लेकिन जानलेवा गड्ढों और बदहाली के कारण इस दूरी को तय करने में 3.5 से 4 घंटे का लंबा समय लग जाता है। बुनियादी सुविधाओं का यह अभाव साहसिक पर्यटन की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है।