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Bageshwar News: ...यहां दिल का दर्द समझने वाला कोई नहीं
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बागेश्वर। जिले की स्वास्थ्य सुविधाएं हृदय रोगों के इलाज के मामले में फिसड्डी साबित हो रही हैं। जिला अस्पताल में हृदयरोग विशेषज्ञ और कैथ लैब की सुविधा नहीं है। दिल की बीमारी से जूझ रहे मरीजों का उपचार सामान्य फिजिशियन के भरोसे हो रहा है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में जिले के अलावा चमोली और पिथौरागढ़ जिले के मरीज भी उपचार के लिए पहुंचते हैं। खानपान और जीवनशैली में हो रहे बदलावों से लोगों में हृदय से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना 10-15 मरीज दिल की बीमारी का उपचार कराने अस्पताल पहुंचते हैं। अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं होने से फिजीशियन मरीजों को सलाह और दवाएं दे रहे हैं। कई बार आपातकालीन स्थिति में पहुंचने वाले मरीजों को गोल्डन ऑवर में उपचार नहीं मिलता है जिससे कई बार लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। चिकित्सकों के अनुसार हृदय रोगों के सटीक निदान के लिए कैथ लैब का होना अनिवार्य है लेकिन जिले में ईसीजी जैसी प्रारंभिक जांच के अलावा एंजियोग्राफी या एंजियोप्लास्टी की कोई व्यवस्था नहीं है। किसी मरीज को अचानक दिल का दौरा पड़ने पर उसे प्राथमिक उपचार के बाद सीधे रेफर कर दिया जाता है। लंबा सफर करने के बाद हायर सेंटर तक पहुंचने से पहले ही गोल्डन ऑवर खोने से मरीज नाजुक हालत में पहुंच जाता है। फिजीशियन डॉ. सीएमएस भैसोड़ा ने बताया कि शुक्रवार की रात पीआरडी जवान को हार्ट अटैक होने के बाद अस्पताल लाया गया। मरीज की हालत नाजुक थी जिससे रेफर करना संभव नहीं था। काफी कोशिश करने के बाद भी मरीज को नहीं बचाया जा सका।
.......कोट
जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के बारे में शासन को बार-बार अवगत कराया गया है। वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों से मरीजों को बेहतर प्राथमिक उपचार देने का प्रयास किया जाता है। गंभीर स्थिति होने पर ही रेफर किया जाता है। -डॉ. कुमार आदित्य तिवारी, सीएमओ बागेश्वर
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जिला अस्पताल में जिले के अलावा चमोली और पिथौरागढ़ जिले के मरीज भी उपचार के लिए पहुंचते हैं। खानपान और जीवनशैली में हो रहे बदलावों से लोगों में हृदय से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। जिला अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना 10-15 मरीज दिल की बीमारी का उपचार कराने अस्पताल पहुंचते हैं। अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं होने से फिजीशियन मरीजों को सलाह और दवाएं दे रहे हैं। कई बार आपातकालीन स्थिति में पहुंचने वाले मरीजों को गोल्डन ऑवर में उपचार नहीं मिलता है जिससे कई बार लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। चिकित्सकों के अनुसार हृदय रोगों के सटीक निदान के लिए कैथ लैब का होना अनिवार्य है लेकिन जिले में ईसीजी जैसी प्रारंभिक जांच के अलावा एंजियोग्राफी या एंजियोप्लास्टी की कोई व्यवस्था नहीं है। किसी मरीज को अचानक दिल का दौरा पड़ने पर उसे प्राथमिक उपचार के बाद सीधे रेफर कर दिया जाता है। लंबा सफर करने के बाद हायर सेंटर तक पहुंचने से पहले ही गोल्डन ऑवर खोने से मरीज नाजुक हालत में पहुंच जाता है। फिजीशियन डॉ. सीएमएस भैसोड़ा ने बताया कि शुक्रवार की रात पीआरडी जवान को हार्ट अटैक होने के बाद अस्पताल लाया गया। मरीज की हालत नाजुक थी जिससे रेफर करना संभव नहीं था। काफी कोशिश करने के बाद भी मरीज को नहीं बचाया जा सका।
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जिले में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी के बारे में शासन को बार-बार अवगत कराया गया है। वर्तमान में उपलब्ध संसाधनों से मरीजों को बेहतर प्राथमिक उपचार देने का प्रयास किया जाता है। गंभीर स्थिति होने पर ही रेफर किया जाता है। -डॉ. कुमार आदित्य तिवारी, सीएमओ बागेश्वर

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