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Bageshwar News: नामतीचेटाबगड़ से राज्यपाल तक का सफर तय करने वाले भगत दा को मिला पद्मभूषण सम्मान

संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर Updated Sun, 25 Jan 2026 11:09 PM IST
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Bhagat Da, who travelled from Namti Chetabgad to Governor, received the Padma Bhushan award.
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बागेश्वर। 25 जनवरी का दिन जिले के लिए गौरव का क्षण लेकर आया है। रविवार को जिले के दो महानुभावों को पद्म सम्मान प्रदान करने की घोषणा की गई। कपकोट के दूरस्थ गांव नामतीचेटाबगड़ में गोपाल सिंह कोश्यारी और मोतिमा देवी के घर जन्म लेने वाले भगत सिंह कोश्यारी को पद्म भूषण सम्मान मिलने की घोषणा के बाद पूरा जिला गौरवान्वित है।
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भगत सिंह कोश्यारी का जन्म भगत सिंह कोश्यारी का जन्म 17 जून, 1942 को हुआ था। कोश्यारी की भतीजी छाया कोश्यारी ने बताया कि उनके दादा की पहले आठ बेटियां हुईं थी। दादी ने पुत्र होने की कामना के लिए कई मंदिरों में मनौती मांगी। नौवें नंबर पर भगत सिंह कोश्यारी का जन्म हुआ। बाद में उनके दो भाई जगत सिंह कोश्यारी और नंदन कोश्यारी हुए। बचपन से ही कोश्यारी को शिक्षा ग्रहण करने का शौक था। परिवार की माली हालत बेहतर नहीं होने के बावजूद उन्होंने शिक्षा ग्रहण करने को प्राथमिकता दी। इसी पढ़ाई की बदौलत वह सफलता प्राप्त करते गए। हालांकि सफलता के बीच भी गांव उनके मन में बसा रहा। आज भी वह गांव में एक सामान्य ग्रामीण की तरह ही आना पसंद करते हैं। कोश्यारी को पद्मभूषण मिलने पर परिवार वाले बेहद खुश हैं।
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छात्र राजनीति में रखा कदम, आपातकाल में मिली पहचान
भगत सिंह कोश्यारी ने प्राथमिक शिक्षा प्राथमिक विद्यालय महरगाड़ी से हासिल की। शामा से हाईस्कूल और कपकोट से इंटरमीडिएट किया। आगे की शिक्षा उन्होंने अल्मोड़ा से हासिल की। 1961 में वह अल्मोड़ा कॉलेज में छात्रसंघ महासचिव चुने गए। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 1975 में लगाए गए आपात काल के विरोध के चलते उन्हें करीब पौने दो साल तक जेल में रहना पड़ा। 23 मार्च, 1977 को रिहा होने के बाद उन्हें राजनीतिक तौर पर पहचान मिली। उन्होंने 1979 से 1985 और 1988 से 1991 तक वह कुमाऊं विश्वविद्यालय की एक्जीक्यूटिव काउंसिल में प्रतिनिधित्व किया। 1997 में वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य चुने गए।


प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर राज्यपाल तक का सफर
वर्ष 2000 में उत्तराखंड के अलग प्रदेश बनने के बाद उन्हें प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी मिली। पहले विधानसभा चुनाव से करीब छह महीने पहले वह प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। उनका कार्यकाल 30 अक्तूबर 2001 से एक मार्च 2002 तक रहा। 2002 में विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार के बाद वह 2002 से 2007 तक विधानसभा में नेता विपक्ष के पद पर रहे। 2007 से 2009 तक भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली। 2008 से 2014 तक उत्तराखंड से राज्यसभा के सदस्य रहे। 2014 में नैनीताल संसदीय सीट से चुनाव जीतकर पहली बार लोकसभा सदस्य बने। पांच सितंबर 2019 से 12 फरवरी 2023 तक वह महाराष्ट्र के राज्यपाल रहे। इसी दौरान उन्हाेंने 18 अगस्त 2020 से छह जुलाई 2021 तक गोवा के राज्यपाल की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी निभाई। फरवरी 2023 में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।


खिचड़ी पसंंदीदा भोजन, सादा जीवन उच्च विचार मूलमंत्र
भगत सिंह कोश्यारी के छोटे भाई जगत सिंह कोश्यारी बताते हैं कि गांव के सामान्य बालक से मुख्यमंत्री और राज्यपाल के उच्च पद तक का सफर तय करने के बावजूद वह सादा जीवन उच्च विचार से नहीं डिगे। पद में रहने के दौरान हों या अन्य दिनों में उनका व्यवहार एक समान रहता है। भतीजी छाया कोश्यारी ने बताया कि आखिरी बार वह दिसंबर 2025 में गांव आए थे। इस दौरान उनका परिवार के साथ रसोई में भोजन करने का एक वीडियो काफी वायरल हुआ था। बताया कि उन्हें खाने में खिचड़ी काफी पसंद हैं। इसके अलावा वह दलिया आदि हल्का खाना खाते हैं।


स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के समर्थक
राज्यपाल के पद से मुक्त होने के बाद कोश्यारी गांव लौटे तो उन्होंने क्षेत्र के लोगों को स्वरोजगार करने के लिए प्रेरित किया। आज भी सार्वजनिक कार्यक्रमाें में वह स्थानीय उत्पादों को बढ़ाने और स्वरोजगार करने के लिए युवाओं को प्रेरित करते हैं। विगत दिनों कपकोट के उत्तरायणी मेले में भी उन्होंने मंच से शामा के कीवी उत्पादन की सराहना की थी। युवाओं से रोजगार मांगने वाला बनने की बजाय रोजगार देने वाला बनने को कहा था।


बेहद सादगी से रहता है परिवार
भगत सिंह कोश्यारी ने राजनीति की बुलंदी तक का सफर तय किया, लेकिन आज भी उनका परिवार मिट्टी से जुड़ा हुआ है। कुछ साल पहले ही उनके गांव के पत्थरों वाले मकान का जीर्णोद्धार किया गया। उनके भाई जगत सिंह 80 साल की उम्र में भी खेतीबाड़ी कर जीवन यापन कर रहे हैं। दूसरे भाई पिथौरागढ़ में होटल-रेस्टारेंट चलाकर अपनी आजीविका चलाते हैं।
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