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Bageshwar News: पंत को पद्श्री मिलने से खंतोली गांव में जश्न, बंटीं मिठाइयां
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Sun, 25 Jan 2026 11:09 PM IST
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बागेश्वर। कांडा तहसील क्षेत्र के खंतोली गांव के मूल निवासी कैलाश चंद्र पंत को पद्मश्री सम्मान मिला है। वर्तमान में मध्य प्रदेश के महू में रहने वाले पंत को पद्म सम्मान मिलने से क्षेत्र में खुशी की लहर है। उनकी उपलब्धि पर ग्रामीणों ने गांव में मिठाई बांटकर जश्न मनाया।
खंतोली के तल्ला गांव के मूल निवासी कैलाश चंद्र पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 को इंदौर के महू में हुआ था। उनका पूरा परिवार उनके जन्म से पहले ही गांव छोड़ गया था। हालांकि गांव से उनका लगाव बना रहा। 20 साल पहले तक कैलाश पंत अपने परिवार के साथ समय-समय पर गांव आते रहते थे। उनकी पुत्री प्रीति जोशी ने बताया कि उनके दादा लोग तीन भाई थे, तीनों मध्य प्रदेश में शिफ्ट हो गए थे। अंतिम बार वह 2006 में धौलीनाग मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए गांव आए थे। उम्र बढ़ने के कारण बाद में उनका गांव आना छूट गया, लेकिन गांव से आज भी उनका लगाव बना हुआ है। रविवार को उन्हें पद्मश्री मिलने की सूचना मिलते ही उनकी बिरादरी के लोगों ने खुशी मनानी शुरू कर दी। शाम को गांव में मिठाई बांटी गई। इस मौके पर दामोदर पंत, चंद्रप्रकाश पंत, मोहन पंत, संध्या पंत गिरीश पंत, विनोद पंत, महेश पंत, प्रभाकर पंत, सुशीला पंत, भगवती पंत समेत तमाम ग्रामीण मौजूद रहे।
पत्रकारिता और लेखन में रहे सक्रिय
बागेश्वर। पद्मश्री सम्मान पाने वाले कैलाश चंद्र पंत पत्रकारिता शिक्षा और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं । साप्ताहिक जनधर्म और मासिक अक्षरा के संपादक के रूप में उनकी अखिल भारतीय प्रतिष्ठा रही है। पंत की बहुआयामी सेवाओं के लिए अनेक संस्थाओं ने उनका सम्मान किया है। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का साहित्य भूषण सम्मान, भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ का नेहरू लिटरेसी अवार्ड, सप्रे संग्रहालय का लाल बलदेव सिंह सम्मान, केंद्रीय हिंदी संस्थान का पुरस्कार, हिंदी भाषा कुंभ बेंगलूरू का परम विशिष्ट हिंदी सम्मान, उत्तरांचल का संस्कृत गौरव सम्मान, श्रीनाथद्वारा साहित्य मंडल का हिंदी भूषण सम्मान, अभिनव कला परिषद का श्रेष्ठ कला आचार्य सम्मान और विश्व हिंदी सम्मान प्रमुख है। 85 वर्ष पूर्ण होने पर सप्रे संग्रहालय ने राज्यपाल मंगू भाई पटेल के हाथों उन्हें आजीवन सेवा सम्मान से सम्मानित किया। कौन किसका आदमी, ढूंढ के आर पार, शब्द का विचार पक्ष, साहित्य और समाज उनकी उल्लेखनीय कृतियां है। जन सहयोग से हिंदी भवन में निर्मित साहित्यकार निवास पंत की विशिष्ट कृति है। लोक संग्रह के गढ़ी कैलाश चंद्र पंत ने हिंदी भवन में पावस व्याख्यान माला वसंत व्याख्यान माला और शरद व्याख्यान माला की परंपरा कायम की है।
खंतोली के तल्ला गांव के मूल निवासी कैलाश चंद्र पंत का जन्म 26 अप्रैल 1936 को इंदौर के महू में हुआ था। उनका पूरा परिवार उनके जन्म से पहले ही गांव छोड़ गया था। हालांकि गांव से उनका लगाव बना रहा। 20 साल पहले तक कैलाश पंत अपने परिवार के साथ समय-समय पर गांव आते रहते थे। उनकी पुत्री प्रीति जोशी ने बताया कि उनके दादा लोग तीन भाई थे, तीनों मध्य प्रदेश में शिफ्ट हो गए थे। अंतिम बार वह 2006 में धौलीनाग मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए गांव आए थे। उम्र बढ़ने के कारण बाद में उनका गांव आना छूट गया, लेकिन गांव से आज भी उनका लगाव बना हुआ है। रविवार को उन्हें पद्मश्री मिलने की सूचना मिलते ही उनकी बिरादरी के लोगों ने खुशी मनानी शुरू कर दी। शाम को गांव में मिठाई बांटी गई। इस मौके पर दामोदर पंत, चंद्रप्रकाश पंत, मोहन पंत, संध्या पंत गिरीश पंत, विनोद पंत, महेश पंत, प्रभाकर पंत, सुशीला पंत, भगवती पंत समेत तमाम ग्रामीण मौजूद रहे।
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पत्रकारिता और लेखन में रहे सक्रिय
बागेश्वर। पद्मश्री सम्मान पाने वाले कैलाश चंद्र पंत पत्रकारिता शिक्षा और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं । साप्ताहिक जनधर्म और मासिक अक्षरा के संपादक के रूप में उनकी अखिल भारतीय प्रतिष्ठा रही है। पंत की बहुआयामी सेवाओं के लिए अनेक संस्थाओं ने उनका सम्मान किया है। उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का साहित्य भूषण सम्मान, भारतीय प्रौढ़ शिक्षा संघ का नेहरू लिटरेसी अवार्ड, सप्रे संग्रहालय का लाल बलदेव सिंह सम्मान, केंद्रीय हिंदी संस्थान का पुरस्कार, हिंदी भाषा कुंभ बेंगलूरू का परम विशिष्ट हिंदी सम्मान, उत्तरांचल का संस्कृत गौरव सम्मान, श्रीनाथद्वारा साहित्य मंडल का हिंदी भूषण सम्मान, अभिनव कला परिषद का श्रेष्ठ कला आचार्य सम्मान और विश्व हिंदी सम्मान प्रमुख है। 85 वर्ष पूर्ण होने पर सप्रे संग्रहालय ने राज्यपाल मंगू भाई पटेल के हाथों उन्हें आजीवन सेवा सम्मान से सम्मानित किया। कौन किसका आदमी, ढूंढ के आर पार, शब्द का विचार पक्ष, साहित्य और समाज उनकी उल्लेखनीय कृतियां है। जन सहयोग से हिंदी भवन में निर्मित साहित्यकार निवास पंत की विशिष्ट कृति है। लोक संग्रह के गढ़ी कैलाश चंद्र पंत ने हिंदी भवन में पावस व्याख्यान माला वसंत व्याख्यान माला और शरद व्याख्यान माला की परंपरा कायम की है।

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