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Bageshwar News: मौत के मुंह से लौटा ट्रेल पास ट्रेकिंग दल... बर्फीले तूफान और एवलांच को मात देकर मुनस्यारी पहुंचे जांबाज
संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
Updated Fri, 12 Jun 2026 01:07 AM IST
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बागेश्वर। हिमालय की सबसे दुर्गम और खतरनाक चोटियों में शुमार ट्रेल पास को फतह करने निकला साहसिक ट्रेकिंग अभियान दल प्रकृति के रौद्र रूप और मौत के मुहाने से जूझकर सकुशल लौट आया है। पिंडर घाटी से रवाना हुआ 9 ट्रेकर समेत 17 सदस्यों का दल कई दिनों तक बर्फीले तूफान, कमर तक जमी बर्फ और हिमस्खलन का सामना करते हुए मुनस्यारी पहुंचने में कामयाब रहा।
यह रोमांचक सफर 30 मई को खाती गांव से शुरू हुआ। शुरुआती दिनों में भारी बारिश और फिसलन भरी बर्फ के कारण टीम को आगे बढ़ने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। चार जून को किसी तरह 200 मीटर रोप (रस्सी) फिक्स कर टीम एडवांस बेस कैंप पहुंची, जहां पहुंचते ही 10 इंच तक नई बर्फबारी हो गई।
पांच जून को जब देवभूमि एडवेंचर के संस्थापक व मुख्य गाइड दिनेश सिंह दानू, साथी इंद्र सिंह और तारा सिंह के साथ कैंप-1 के लिए रूट खोलने निकले तो अचानक भीषण बर्फीला तूफान शुरू हो गया। इसी दौरान हवा के एक भयानक झोंके से मुख्य रस्सी का बंडल हाथ से छूटकर 400 मीटर गहरी खाई में जा गिरा। रस्सी गिरने से तीनों पर्वतारोही सीधे मौत के साए में आ गए।
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दल में शामिल सदस्य और स्टॉफ
दल में पश्चिम बंगाल के मोहनी मोहन पाल, स्पंदन मलिक, सुदीप सरकार, अरनब पाल, अरिंदम पात्र, सुचरिता धारा, दिशा घोष, बागेश्वर जिले के आरे के निवासी नवीन गढि़या, कपकोट के रवि देव थे। गाइड स्टॉफ में दिनेश सिंह दानू, इंद्र सिंह, तारा सिंह, कवींद्र सिंह, मनोज सिंह, गजेंद्र सिंह, खिलाप सिंह, पंकज सिंह, दान सिंह आदि थे।
आइस एक्स और पतली डोरी के सहारे रॉक वॉल लांघी
इस जानलेवा स्थिति में भी जांबाजों ने हौसला नहीं खोया। आखिरकार सिर्फ आइस एक्स और टेंट की महज 20 मीटर लंबी पतली डोरी के सहारे तीनों जांबाज रॉक वॉल लांघकर कैंप-1 पहुंचे। बाद में बर्फ में दबी रस्सी को मशक्कत से तलाश ढूंढ कर पूरी टीम को ऊपर चढ़ाया गया। इसके बाद नंदाखाट और पिंडारी ग्लेशियर के बीच खतरनाक हिम-दरारों (क्रेवास) को पार कर टीम ने मां नंदा के जयकारों के साथ ट्रेल पास तो फतह कर लिया लेकिन असली खतरा अभी आगे बाकी था।
पांच सेकंड की देरी होती तो आ जाती महाविपत्ति
ट्रेल पास फतह करने के बाद नंदा देवी ईस्ट बेस कैंप की अंतिम तीव्र ढलान पर अचानक एक विशाल एवलांच (हिमस्खलन) आ गया। मुख्य गाइड दिनेश सिंह दानू ने सूझबूझ दिखाते हुए टीम की महिला ट्रेकर्स सुचरिता और दीक्षा को ऐन वक्त पर सुरक्षित दिशा में भागने के लिए कहा। अगर सुरक्षित स्थान पर भागने में महज पांच सेकंड की भी देरी होती तो पूरी टीम इस भयानक एवलांच की चपेट में आ जाती। इस आपाधापी में टीम के कई बैग बर्फ में बह गए, मां नंदा की कृपा से सभी सदस्य सकुशल मुनस्यारी पहुंच गए हैं।
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यह रोमांचक सफर 30 मई को खाती गांव से शुरू हुआ। शुरुआती दिनों में भारी बारिश और फिसलन भरी बर्फ के कारण टीम को आगे बढ़ने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। चार जून को किसी तरह 200 मीटर रोप (रस्सी) फिक्स कर टीम एडवांस बेस कैंप पहुंची, जहां पहुंचते ही 10 इंच तक नई बर्फबारी हो गई।
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पांच जून को जब देवभूमि एडवेंचर के संस्थापक व मुख्य गाइड दिनेश सिंह दानू, साथी इंद्र सिंह और तारा सिंह के साथ कैंप-1 के लिए रूट खोलने निकले तो अचानक भीषण बर्फीला तूफान शुरू हो गया। इसी दौरान हवा के एक भयानक झोंके से मुख्य रस्सी का बंडल हाथ से छूटकर 400 मीटर गहरी खाई में जा गिरा। रस्सी गिरने से तीनों पर्वतारोही सीधे मौत के साए में आ गए।
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दल में शामिल सदस्य और स्टॉफ
दल में पश्चिम बंगाल के मोहनी मोहन पाल, स्पंदन मलिक, सुदीप सरकार, अरनब पाल, अरिंदम पात्र, सुचरिता धारा, दिशा घोष, बागेश्वर जिले के आरे के निवासी नवीन गढि़या, कपकोट के रवि देव थे। गाइड स्टॉफ में दिनेश सिंह दानू, इंद्र सिंह, तारा सिंह, कवींद्र सिंह, मनोज सिंह, गजेंद्र सिंह, खिलाप सिंह, पंकज सिंह, दान सिंह आदि थे।
आइस एक्स और पतली डोरी के सहारे रॉक वॉल लांघी
इस जानलेवा स्थिति में भी जांबाजों ने हौसला नहीं खोया। आखिरकार सिर्फ आइस एक्स और टेंट की महज 20 मीटर लंबी पतली डोरी के सहारे तीनों जांबाज रॉक वॉल लांघकर कैंप-1 पहुंचे। बाद में बर्फ में दबी रस्सी को मशक्कत से तलाश ढूंढ कर पूरी टीम को ऊपर चढ़ाया गया। इसके बाद नंदाखाट और पिंडारी ग्लेशियर के बीच खतरनाक हिम-दरारों (क्रेवास) को पार कर टीम ने मां नंदा के जयकारों के साथ ट्रेल पास तो फतह कर लिया लेकिन असली खतरा अभी आगे बाकी था।
पांच सेकंड की देरी होती तो आ जाती महाविपत्ति
ट्रेल पास फतह करने के बाद नंदा देवी ईस्ट बेस कैंप की अंतिम तीव्र ढलान पर अचानक एक विशाल एवलांच (हिमस्खलन) आ गया। मुख्य गाइड दिनेश सिंह दानू ने सूझबूझ दिखाते हुए टीम की महिला ट्रेकर्स सुचरिता और दीक्षा को ऐन वक्त पर सुरक्षित दिशा में भागने के लिए कहा। अगर सुरक्षित स्थान पर भागने में महज पांच सेकंड की भी देरी होती तो पूरी टीम इस भयानक एवलांच की चपेट में आ जाती। इस आपाधापी में टीम के कई बैग बर्फ में बह गए, मां नंदा की कृपा से सभी सदस्य सकुशल मुनस्यारी पहुंच गए हैं।