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Chamoli News: ज्योतिर्मठ में भरभराकर गिरा जर्जर मकान

संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली Updated Thu, 12 Mar 2026 07:40 PM IST
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A dilapidated house collapsed in Jyotirmath.
ज्योतिर्मठ के सिंहधार वार्ड में भरभरा कर गिरा जर्जर मकान। संवाद 
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फोटो--
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गनीमत रही परिवार था बाहर, बड़ा हादसा होने से बचा
आपदा के समय दरार आने से जर्जर हो गया था मकान, इसी में रह रहा था परिवार
संवाद न्यूज एजेंसी
ज्योतिर्मठ। नगर क्षेत्र ज्योतिर्मठ में बृहस्पतिवार को भू-धंसाव से जर्जर बना मकान भरभराकर गिर गया। गनीमत रही कि इस दौरान पीड़ित परिवार के लोग बाहर थे अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था। हादसे की सूचना पर स्थानीय लोग और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अब फिर से नगर क्षेत्र में जर्जर मकानों का सर्वेक्षण किया जाएगा।
ज्योतिर्मठ में भू धंसाव के समय सिंहधार वार्ड में मोहन लाल के पुश्तैनी मकान पर भी कई दरारें आ गई थीं। परिवार के लोग इसी घर में रह रहे थे। दोपहर करीब एक बजे मकान का एक हिस्सा अचानक से ढह गया। इस घर में मोहन लाल, उनकी पत्नी मुन्नी देवी, छोटा भाई संतोष कुमार और पुत्र आयुष रहते हैं। मगर जिस समय मकान गिरा उस वक्त घर के सदस्य बाहर थे। ऐसे में बड़ा हादसा होने से बच गया। हादसे की सूचना पर स्थानीय लोग और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची।
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मोहन लाल ने बताया कि 2023 में भू धंसाव के बाद से उनके घर में बड़ी-बड़ीं दरारें आ गई थीं। उन्होंने बार-बार प्रशासन को इसकी लिखित सूचना दी लेकिन उनकी बात को अनसुना किया गया। ऐसे में उनके पास इस घर में रहने के अलावा कोई चारा नहीं था और अब मकान ध्वस्त हो गया है। इधर उपजिलाधिकारी चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि प्रभावित परिवार को अन्यत्र निवास के लिए 50 हजार रुपये दिए गए थे। अब उन्हें फिलहाल एक विद्यालय के हट पर रहने के लिए कहा गया है।

इंसेट
पुराने जर्जर मकानों का होगा सर्वेक्षण
भूधंंसाव से जर्जर हालत में पहुंचे मकानों को छोड़कर प्रभावित परिवारों को अन्यत्र शिफ्ट होने के लिए कहा गया था। इसके लिए उन्हें धनराशि भी दी गई थी। मोहन लाल के परिवार को भी शिफ्टिंग के लिए धनराशि दी गई थी। इसके बावजूद वे जर्जर मकान में रह रहे थे। अब नगर क्षेत्र में जर्जर मकानों का फिर से सर्वेक्षण किया जाएगा कि कोई इन मकानों में रह तो नहीं रहा है। संवाद
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पत्थर के घरों का मुआवजा नहीं हुआ तय
- जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने मौके पर जाकर परिजनों से बात की। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से अभी तक पत्थरों के घरों का रेट निर्धारित नहीं किया गया है इससे मुआवजा तय नहीं किया गया। इस कारण आज तक इस तरह के घरों का पीड़ित परिवारों को मुआवजा नहीं मिल पाया है। गनीमत रही कि मकान दिन में गिरा, जिससे समय रहते परिवार के लोग बाहर निकल गए। रात के समय होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। अतुल सती का कहना है कि हम लगातार इस मांग को उठाते आ रहे हैं लेकिन सरकार इस पर ध्यान नहीं दे रही है।
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