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Chamoli News: सात घंटे तक नहीं उठाया फायर वाॅचर का शव, डीएफओ को घेरा
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Thu, 21 May 2026 08:44 PM IST
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फोटो
मुआवजा और नौकरी देने की मांग पर अड़े पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी और जनप्रतिनिधि
डीएफओ के लिखित आश्वासन मिलने के बाद उठाया शव, फिर हुआ पोस्टमार्टम
संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। जंगल में आग बुझाने गए फायर वाॅचर की मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने प्रभावित परिवार को 50 लाख मुआवजा राशि देने और मृतक की पत्नी को नौकरी देने की मांग को लेकर शव उठाने से इन्कार कर दिया। उन्होंने मौके पर मौजूद बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ का घेराव भी किया। इसके बाद वन विभाग ने मृतक की पत्नी को आउटसोर्सिंग से नौकरी देने और विभिन्न माध्यमों से परिजनों को 30 लाख रुपये देने का लिखित आश्वासन दिया। करीब सात घंटे बाद परिजन शांत हुए और शव उठाया।
बृहस्पतिवार को जंगल में आग बुझाने के दौरान फायर वाॅचर राजेंद्र सिंह की मौत हो गई थी। उनका झुलसा हुआ शव करीब 70 मीटर गहरी खाई में मिला था। एसडीआरएफ की टीम शव लेकर बिरही में बदरीनाथ हाईवे पर पहुंची तो यहां सुबह सात बजे पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी, राज्य आंदोलनकारी केके डिमरी व स्थानीय ग्रामीण एकत्रित हो गए। उन्होंने पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा और मृतक की पत्नी को नौकरी देने की मांग को लेकर डीएफओ का घेराव किया। इस संबंध में डीएफओ ने उच्च अधिकारियों से वार्ता की जिसके बाद उन्होंने प्रभावित परिवार को विभिन्न स्रोतों से 30 लाख रुपये (10 लाख रुपये बीमा, चार लाख रुपये आपदा मद, एक लाख रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष और 15 लाख रुपये एक दिन का वन कर्मियों का वेतन) दिए जाने और मृतक की पत्नी को कुशल श्रमिक के रूप में आउटसोर्स पर नौकरी दिए जाने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद लोग शांत हुए और करीब सात घंटे बाद दोपहर दो बजे शव उठाया गया। शव का मौके पर ही पोस्टमार्टम हुआ।
इंसेट
चार माह के लिए नियुक्त होते हैं फायर वाचर
फायर सीजन के दौरान प्रतिवर्ष 15 से फरवरी से 15 जून तक फायर वऑचरों की तैनाती की जाती है। उन्हें प्रतिमाह 12844 रुपये मेहनताना दिया जाता है। चमोली जनपद में बदरीनाथ वन प्रभाग में 165 और केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग में 119 फायर वाचर वर्तमान में तैनात हैं। संवाद
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोपेश्वर। जंगल में आग बुझाने गए फायर वाॅचर की मौत हो गई थी। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने प्रभावित परिवार को 50 लाख मुआवजा राशि देने और मृतक की पत्नी को नौकरी देने की मांग को लेकर शव उठाने से इन्कार कर दिया। उन्होंने मौके पर मौजूद बदरीनाथ वन प्रभाग के डीएफओ का घेराव भी किया। इसके बाद वन विभाग ने मृतक की पत्नी को आउटसोर्सिंग से नौकरी देने और विभिन्न माध्यमों से परिजनों को 30 लाख रुपये देने का लिखित आश्वासन दिया। करीब सात घंटे बाद परिजन शांत हुए और शव उठाया।
बृहस्पतिवार को जंगल में आग बुझाने के दौरान फायर वाॅचर राजेंद्र सिंह की मौत हो गई थी। उनका झुलसा हुआ शव करीब 70 मीटर गहरी खाई में मिला था। एसडीआरएफ की टीम शव लेकर बिरही में बदरीनाथ हाईवे पर पहुंची तो यहां सुबह सात बजे पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र भंडारी, राज्य आंदोलनकारी केके डिमरी व स्थानीय ग्रामीण एकत्रित हो गए। उन्होंने पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजा और मृतक की पत्नी को नौकरी देने की मांग को लेकर डीएफओ का घेराव किया। इस संबंध में डीएफओ ने उच्च अधिकारियों से वार्ता की जिसके बाद उन्होंने प्रभावित परिवार को विभिन्न स्रोतों से 30 लाख रुपये (10 लाख रुपये बीमा, चार लाख रुपये आपदा मद, एक लाख रुपये मुख्यमंत्री राहत कोष और 15 लाख रुपये एक दिन का वन कर्मियों का वेतन) दिए जाने और मृतक की पत्नी को कुशल श्रमिक के रूप में आउटसोर्स पर नौकरी दिए जाने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद लोग शांत हुए और करीब सात घंटे बाद दोपहर दो बजे शव उठाया गया। शव का मौके पर ही पोस्टमार्टम हुआ।
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चार माह के लिए नियुक्त होते हैं फायर वाचर
फायर सीजन के दौरान प्रतिवर्ष 15 से फरवरी से 15 जून तक फायर वऑचरों की तैनाती की जाती है। उन्हें प्रतिमाह 12844 रुपये मेहनताना दिया जाता है। चमोली जनपद में बदरीनाथ वन प्रभाग में 165 और केदारनाथ वन्यजीव प्रभाग में 119 फायर वाचर वर्तमान में तैनात हैं। संवाद