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Chardham Yatra: ज्योतिर्मठ में गरुड़ छाड़ मेले का आयोजन; गरुड़ में बैठकर नृसिंह मंदिर पहुंचे भगवान विष्णु

संवाद न्यूज एजेंसी, ज्योतिर्मठ (चमोली) Updated Mon, 20 Apr 2026 06:34 PM IST
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सार

बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पूर्व नृसिंह मंदिर में भव्य तरीके से गरुड़ छाड़ मेले का आयोजन किया जाता है। यह परंपरा भी धाम के कपाट खुलने की परंपराओं में शामिल है।

Chardham Yatra:  Lord Vishnu reached Narsingh Temple sitting on Garuda
ज्योतिर्मठ में गरुड़ छाड़ मेले का आयोजन - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

नृसिंह मंदिर परिसर ज्योतिर्मठ में सोमवार को गरुड़ छाड़ मेले का आयोजन हुआ। इस दौरान प्रतिकात्मक तौर पर भगवान विष्णु को गरुड़ (वाहन से) में बैठाकर रस्सी के सहारे नृसिंह मंदिर प्रांगण तक पहुंचाया गया। मान्यता के अनुसार इस आयोजन के बाद भगवान बदरीनाथ अपने वाहन गरुड़ में बैठकर धाम के लिए प्रस्थान करते हैं।

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बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने से पूर्व नृसिंह मंदिर में भव्य तरीके से गरुड़ छाड़ मेले का आयोजन किया जाता है। यह परंपरा भी धाम के कपाट खुलने की परंपराओं में शामिल है। सोमवार को गरुड़ छाड़ मेले के लिए नृसिंह मंदिर को फूलों से सजाया गया। दोपहर बाद मेला शुरू हुआ। इस दौरान प्रतीकात्मक तौर पर भगवान विष्णु को गरुड़ (वाहन) से छावनी बाजार से रस्सी के सहारे नृसिंह मंदिर प्रांगण तक पहुंचाया गया।
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फिर भगवान विष्णु रस्सी के सहारे नृसिंह मंदिर प्रांगण तक पहुंचे। इसके बाद भगवान बदरीविशाल के जयकारे लगे। कपाट खुलने से पहले होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों के तहत गरुड़ छाड़ महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। इसके बाद ही अन्य धार्मिक अनुष्ठान होते हैं। गरुड़ छाड़ मेला देखने के लिए सैकड़ों की तादात में श्रद्धालु पहुंचे थे। इस दौरान देव पुजाई समिति के अध्यक्ष अनिल नंबूरी, बदरीनाथ धाम के मुख्य पुजारी रावल अमरनाथ नंबूरी, नायब रावल सूर्यराग नंबूदरी, धर्माधिकारी आचार्य स्वयंबर सेमवाल, प्रकाश सती, दीपक शाह, सुशील थपलियाल, अजीत कवाण, विनोद नंबूरी, सतीश भट्ट, अरुणा नेगी, आशीष सती, प्रेमलता बिष्ट आदि मौजूद रहे।  

आज रवाना होगी आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी
मंगलवार को नृसिंह मंदिर परिसर में स्थित मंदिर के सामने विशेष पूजा-अर्चना के बाद आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी और गाडू घड़ा तेल कलश बदरीनाथ धाम के लिए रवाना होगा। रात्रि विश्राम पांडुकेश्वर स्थित योग ध्यान बदरी में करने के बाद अगले दिन भगवान कुबेर व उद्धव की डोली, आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी व गाडू घड़ा तेल कलश यात्रा बदरीनाथ के लिए प्रस्थान करेगी। बदरीनाथ धाम के रावल भी साथ चलते रहेंगे। 23 अप्रैल को विधि विधान के साथ बदरीनाथ के कपाट खोल लिए जाएंगे।

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