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Chamoli News: मंदिर में विराजमान हुईं मां चंडिका, अब छह माह तक यहीं रहेंगी
संवाद न्यूज एजेंसी, चमोली
Updated Sun, 26 Apr 2026 06:55 PM IST
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गोपेश्वर के समीप खल्ला गांव में अपने भक्तों को आशीर्वाद देतीं माता अनसूया की डोली। संवाद
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जिलासू चंडिका देवी की दिवारा यात्रा संपन्न, नौ माह से थीं भ्रमण पर, नौ दिन बनातोली में हुई पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
कर्णप्रयाग। जिलासू की मां चंडिका देवी की दिवारा यात्रा का रविवार को विधि विधान के साथ समापन हो गया है। नौ माह तक भ्रमण पर रहीं मां चंडिका देवी रविवार देर शाम अपने जिलासू स्थित मंदिर में विराजमान हुईं। अब छह माह तक देवी मंदिर में ही रहेंगी। अनुष्ठान पर भक्तों की भीड़ उमड़ी और महिलाएं रो पड़ीं।
बीते नौ माह से चंडिका देवी अपनी दिवारा यात्रा पर थीं। गर्भगृह से बाहर आने के बाद देवी ने अपने 27 बानी गांवों के साथ ही चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी और देहरादून जनपद में विभिन्न गांवों का भ्रमण किया और सिवाई लौटीं। यहां 18 अप्रैल से शुरू हुए बन्याथ महोत्सव का समापन रविवार को हवन के साथ हुआ। इस दौरान बबूल सीरा का प्रसाद वितरित हुआ। इसके बाद देवी बनातोली से जिलासू मंदिर के लिए विदाई हुईं। विदाई के दौरान माहौल भावुक हो गया और महिलाएं रो पड़ीं। देर शाम देवी मां चंडिका जिलासू मंदिर पहुंचीं और विधि विधान के साथ मंदिर में विराजमान हुईं। कार्यक्रम में ब्रह्मगुरु हरिबल्लभ सती, सचिन सती, पुजारी गणेश तिवारी, आयोजन समिति के अध्यक्ष दिलबर सिंह चौहान, सचिव ईश्वर सिंह राणा, राजा चौहान, राजेंद्र सिंह रावत, गिरीश राणा, भरत रावत, सुनील पंवार, हरेंद्र सिंह सहित 27 बानी गांव और कालेश्वर, लंगासू, जिलासू, उमट्टा, सिरतोली, गिरसा, बेडाणू, चमाली, जयकंडी, स्वर्का, मैखुरा आदि गांवों के श्रद्धालु मौजूद थे।
अब 12 साल बाद ध्याणियों से मिलेंगी मां चंडिका
लक्ष्मी प्रसाद कुमेड़ी
कर्णप्रयाग। मेरी न भूल्या मेरी बैणयूं.... अर्थात मुझे मत भूलना मेरी बहिनों... जैसे की ब्रह्मगुरु पुजारी ने मां चंडिका देवी को विदाई देने के लिए यह जागर गाया तो पूरा माहौल ही भावुक हो उठा। कई देवी, देवताओं के पश्वाओं ने अवतरित होकर मां को विदाई दी तो लोग भावुक हो गए।
माना जाता है देवी हर 12 वर्ष में अपनी ध्याणियों को मिलने के लिए उनके पास जाती हैं। यह विशेष परंपरा है जिसका देवी के 27 बानी गांव निर्वहन करते आ रहे हैं। देवी की दिवारा यात्रा के साथ नौ माह से चल रहे पुजारी सचिन सती बताते हैं देवी नौ माह तक अपनी ध्याणियों के बीच रहीं। इसके बाद ब्रह्मगुरु की ओर से देवी 12 वर्ष की भाग बांधी गई अथवा अब देवी 12 वर्ष बाद अपनी ध्याणियों के बीच आएंगी। इससे पूर्व रविवार को सुबह से बन्याथ स्थल पर श्रद्धालु जुटने लगे। पंचपूजा, जागरण होने के बाद देव नृत्य हुआ। ऐरवालों के नृत्य के बाद हवन होने और ऐरवालों की विदाई दी। साथ देवी ने अपने नौ कोठों में प्रवेश किया। सीरा का प्रसाद ग्रहण करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। संवाद
इंसेट
कड़कड़ाती धूप में घंटों किया इंतजार
रविवार को मौसम साफ रहा। सिवाई में बन्याथ स्थल पर भारी भीड़ होने बाद बाद बाहर भी काफी संख्या में श्रद्धालु रहे। सीरा कटाई स्थल पर देवी के दर्शनों के लिए लोग घंटों कड़कड़ाती धूप में इंतजार करते दिखे। दिवारा यात्रा के समापन अवसर पर भारी संख्या में प्रवासी भी सिवाई बनातोली स्थल पहुंचे। राजा चौहान, गिरीश राणा आदि ने बताया कि देवी के दर्शनों के लिए दिल्ली, मुंबई सहित विदेश से भी काफी संख्या में प्रवासी और ध्याण यहां पहुंची और पूजा-अर्चना की। महोत्सव के दौरान दुकानें भी सजीं। इस दौरान लोगों ने कृषि उपकरण भी खरीदे। गरमी के चलते आइसक्रीम की भी डिमांड रही। कई दुकानों में शीतल पेय दोपहर में ही समाप्त हो गया।
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माता की डोली से लिपटकर रो पड़ीं ध्याणियां
गोपेश्वर। मंडल घाटी के खल्ला गांव में संतानदायिनी माता अनसूया के मंदिर में आयोजित लक्ष महायज्ञ के तहत रविवार को ध्याणी भत्ता (विवाहित बेटियों के लिए भोज) का आयोजन हुआ। इस दौरान माता की डोली ने अपनी ध्याणियों को आशीर्वाद और भेंट, प्रसाद भी दिया। कई ध्याणियां माता की डोली से लिपट कर रोने लगीं। इस आयोजन में बुजुर्ग ध्याणियों को भी न्योता दिया गया था। उन्होंने परिवार की कुशलता की कामना करने के साथ ही निसंतान दंपतियों की झोली भरने की कामना की।
बीते वर्ष 7 अक्तूबर को माता अनसूया की दिवारा यात्रा शुरू हुई थी। यात्रा संपन्न होने के बाद 19 अप्रैल से मंदिर में लक्ष महायज्ञ और श्रीमद् देवी भागवत कथा का आयोजन शुरू हुआ था। महायज्ञ में प्रवासी ग्रामीण भी पहुंचे हैं। महायज्ञ कुंड में आचार्य ब्राह्मणों की ओर से सैकड़ों मंत्रों की आहुतियां दी जा रही हैं। खल्ला गांव निवासी गोविंद सिंह का कहना है कि माता अनसूया के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। 28 अप्रैल को पूर्णाहुति के बाद माता की डोली अपने भक्तों से विदा लेकर मंदिर में विराजमान हो जाएगी। संवाद
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जिलासू चंडिका देवी की दिवारा यात्रा संपन्न, नौ माह से थीं भ्रमण पर, नौ दिन बनातोली में हुई पूजा
संवाद न्यूज एजेंसी
कर्णप्रयाग। जिलासू की मां चंडिका देवी की दिवारा यात्रा का रविवार को विधि विधान के साथ समापन हो गया है। नौ माह तक भ्रमण पर रहीं मां चंडिका देवी रविवार देर शाम अपने जिलासू स्थित मंदिर में विराजमान हुईं। अब छह माह तक देवी मंदिर में ही रहेंगी। अनुष्ठान पर भक्तों की भीड़ उमड़ी और महिलाएं रो पड़ीं।
बीते नौ माह से चंडिका देवी अपनी दिवारा यात्रा पर थीं। गर्भगृह से बाहर आने के बाद देवी ने अपने 27 बानी गांवों के साथ ही चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, टिहरी, उत्तरकाशी और देहरादून जनपद में विभिन्न गांवों का भ्रमण किया और सिवाई लौटीं। यहां 18 अप्रैल से शुरू हुए बन्याथ महोत्सव का समापन रविवार को हवन के साथ हुआ। इस दौरान बबूल सीरा का प्रसाद वितरित हुआ। इसके बाद देवी बनातोली से जिलासू मंदिर के लिए विदाई हुईं। विदाई के दौरान माहौल भावुक हो गया और महिलाएं रो पड़ीं। देर शाम देवी मां चंडिका जिलासू मंदिर पहुंचीं और विधि विधान के साथ मंदिर में विराजमान हुईं। कार्यक्रम में ब्रह्मगुरु हरिबल्लभ सती, सचिन सती, पुजारी गणेश तिवारी, आयोजन समिति के अध्यक्ष दिलबर सिंह चौहान, सचिव ईश्वर सिंह राणा, राजा चौहान, राजेंद्र सिंह रावत, गिरीश राणा, भरत रावत, सुनील पंवार, हरेंद्र सिंह सहित 27 बानी गांव और कालेश्वर, लंगासू, जिलासू, उमट्टा, सिरतोली, गिरसा, बेडाणू, चमाली, जयकंडी, स्वर्का, मैखुरा आदि गांवों के श्रद्धालु मौजूद थे।
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अब 12 साल बाद ध्याणियों से मिलेंगी मां चंडिका
लक्ष्मी प्रसाद कुमेड़ी
कर्णप्रयाग। मेरी न भूल्या मेरी बैणयूं.... अर्थात मुझे मत भूलना मेरी बहिनों... जैसे की ब्रह्मगुरु पुजारी ने मां चंडिका देवी को विदाई देने के लिए यह जागर गाया तो पूरा माहौल ही भावुक हो उठा। कई देवी, देवताओं के पश्वाओं ने अवतरित होकर मां को विदाई दी तो लोग भावुक हो गए।
माना जाता है देवी हर 12 वर्ष में अपनी ध्याणियों को मिलने के लिए उनके पास जाती हैं। यह विशेष परंपरा है जिसका देवी के 27 बानी गांव निर्वहन करते आ रहे हैं। देवी की दिवारा यात्रा के साथ नौ माह से चल रहे पुजारी सचिन सती बताते हैं देवी नौ माह तक अपनी ध्याणियों के बीच रहीं। इसके बाद ब्रह्मगुरु की ओर से देवी 12 वर्ष की भाग बांधी गई अथवा अब देवी 12 वर्ष बाद अपनी ध्याणियों के बीच आएंगी। इससे पूर्व रविवार को सुबह से बन्याथ स्थल पर श्रद्धालु जुटने लगे। पंचपूजा, जागरण होने के बाद देव नृत्य हुआ। ऐरवालों के नृत्य के बाद हवन होने और ऐरवालों की विदाई दी। साथ देवी ने अपने नौ कोठों में प्रवेश किया। सीरा का प्रसाद ग्रहण करने के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। संवाद
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कड़कड़ाती धूप में घंटों किया इंतजार
रविवार को मौसम साफ रहा। सिवाई में बन्याथ स्थल पर भारी भीड़ होने बाद बाद बाहर भी काफी संख्या में श्रद्धालु रहे। सीरा कटाई स्थल पर देवी के दर्शनों के लिए लोग घंटों कड़कड़ाती धूप में इंतजार करते दिखे। दिवारा यात्रा के समापन अवसर पर भारी संख्या में प्रवासी भी सिवाई बनातोली स्थल पहुंचे। राजा चौहान, गिरीश राणा आदि ने बताया कि देवी के दर्शनों के लिए दिल्ली, मुंबई सहित विदेश से भी काफी संख्या में प्रवासी और ध्याण यहां पहुंची और पूजा-अर्चना की। महोत्सव के दौरान दुकानें भी सजीं। इस दौरान लोगों ने कृषि उपकरण भी खरीदे। गरमी के चलते आइसक्रीम की भी डिमांड रही। कई दुकानों में शीतल पेय दोपहर में ही समाप्त हो गया।
माता की डोली से लिपटकर रो पड़ीं ध्याणियां
गोपेश्वर। मंडल घाटी के खल्ला गांव में संतानदायिनी माता अनसूया के मंदिर में आयोजित लक्ष महायज्ञ के तहत रविवार को ध्याणी भत्ता (विवाहित बेटियों के लिए भोज) का आयोजन हुआ। इस दौरान माता की डोली ने अपनी ध्याणियों को आशीर्वाद और भेंट, प्रसाद भी दिया। कई ध्याणियां माता की डोली से लिपट कर रोने लगीं। इस आयोजन में बुजुर्ग ध्याणियों को भी न्योता दिया गया था। उन्होंने परिवार की कुशलता की कामना करने के साथ ही निसंतान दंपतियों की झोली भरने की कामना की।
बीते वर्ष 7 अक्तूबर को माता अनसूया की दिवारा यात्रा शुरू हुई थी। यात्रा संपन्न होने के बाद 19 अप्रैल से मंदिर में लक्ष महायज्ञ और श्रीमद् देवी भागवत कथा का आयोजन शुरू हुआ था। महायज्ञ में प्रवासी ग्रामीण भी पहुंचे हैं। महायज्ञ कुंड में आचार्य ब्राह्मणों की ओर से सैकड़ों मंत्रों की आहुतियां दी जा रही हैं। खल्ला गांव निवासी गोविंद सिंह का कहना है कि माता अनसूया के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। 28 अप्रैल को पूर्णाहुति के बाद माता की डोली अपने भक्तों से विदा लेकर मंदिर में विराजमान हो जाएगी। संवाद

गोपेश्वर के समीप खल्ला गांव में अपने भक्तों को आशीर्वाद देतीं माता अनसूया की डोली। संवाद

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