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Champawat News: चंपावत जिला अस्पताल में अब नहीं मिलेंगी मनोचिकित्सक की सेवा
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Tue, 20 Jan 2026 10:40 PM IST
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चंपावत। जिला अस्पताल में अब मनोचिकित्सक की सेवाएं नहीं मिलेंगी। अस्पताल में पिछले साल तैनात विशेषज्ञ अब नहीं लौटने वाले हैं। ऐसे में अब संबंधित मरीजों की अब काउंसलिंग नहीं हो सकेगी। अस्पताल में पहले से ही एक मात्र चर्म रोग विशेषज्ञ के न आने से मरीज परेशान थे अब मनोरोग विशेषज्ञ के जाने से मरीजों की दिक्कतें और बढ़ गई हैं।
जिला अस्पताल में लंबे समय बाद मनोचिकित्सक डॉ. आशुतोष बहुगुणा की तैनाती फरवरी 2025 में हुई थी लेकिन वह एक साल भी अपनी सेवाएं नहीं दे सके और अब उनके आने की कोई संभावना नहीं है। इसकी तस्दीक पंजीकरण कक्ष के बाहर चस्पा पेपर कर रहा है जिसमें लिखा गया है कि मनोरोग और चर्म रोग विशेषज्ञ के आने की तिथि का पता नहीं है। मनोरोग विशेषज्ञ दो माह से अधिक समय से नहीं आ रहे हैं।
ऐसे में मानसिक रोग से परेशान मरीजों को अब इलाज नहीं मिल सकेगा। तनाव के चलते मनोरोगी को नींद न आना, भूख न लगना, चिड़चिड़ापन होना आदि समस्याएं हो जाती हैं। अब ऐसे रोगियों को इलाज के लिए पिथौरागढ़, हल्द्वानी या बरेली के अस्पताल ही जाना पड़ेगा। जिला अस्पताल में पीएमएस डॉ. हीरा सिंह ह्यांकी ने बताया कि अब मनोरोग विशेषज्ञ नहीं आएंगे। विभाग को उनके न आने की जानकारी दे दी गई है।
हर रोज आते थे करीब 10 मरीज
जिला अस्पताल में तैनात मनोरोग विशेषज्ञ के पास रोजाना करीब 10 मरीज आते थे। पारिवारिक परेशानी, पढ़ाई, रोजगार, बीमारी समेत कई समस्याओं से परेशान मरीज उनसे इलाज कराते थे। अब उनके जाने से इलाज कराने वालों की भी समस्याएं बढ़ गई हैं।
पढ़ाई के चलते काफी तनाव रहता था। नींद भी ठीक से नहीं आती थी। हर वक्त चिंता लगी रहती थी। जिला अस्पताल में तैनात मनोचिकित्सक से इलाज कराने पर लाभ मिला था। उन्होंने काउंसिलिंग कर सही परामर्श दिया था। - महिमा कुमारी, बनलेख।
परिवार में बच्चों की चिंता के चलते काफी तनाव में रहता था। इलाज के लिए पिथौरागढ़ भी गया लेकिन चंपावत में मनोचिकित्सक की तैनाती से बड़ी राहत मिली। अभी और काउंसलिंग की जरूरत थी लेकिन उनके दोबारा नहीं आने की जानकारी मिली है। - कैलाश सिंह
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जिला अस्पताल में लंबे समय बाद मनोचिकित्सक डॉ. आशुतोष बहुगुणा की तैनाती फरवरी 2025 में हुई थी लेकिन वह एक साल भी अपनी सेवाएं नहीं दे सके और अब उनके आने की कोई संभावना नहीं है। इसकी तस्दीक पंजीकरण कक्ष के बाहर चस्पा पेपर कर रहा है जिसमें लिखा गया है कि मनोरोग और चर्म रोग विशेषज्ञ के आने की तिथि का पता नहीं है। मनोरोग विशेषज्ञ दो माह से अधिक समय से नहीं आ रहे हैं।
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ऐसे में मानसिक रोग से परेशान मरीजों को अब इलाज नहीं मिल सकेगा। तनाव के चलते मनोरोगी को नींद न आना, भूख न लगना, चिड़चिड़ापन होना आदि समस्याएं हो जाती हैं। अब ऐसे रोगियों को इलाज के लिए पिथौरागढ़, हल्द्वानी या बरेली के अस्पताल ही जाना पड़ेगा। जिला अस्पताल में पीएमएस डॉ. हीरा सिंह ह्यांकी ने बताया कि अब मनोरोग विशेषज्ञ नहीं आएंगे। विभाग को उनके न आने की जानकारी दे दी गई है।
हर रोज आते थे करीब 10 मरीज
जिला अस्पताल में तैनात मनोरोग विशेषज्ञ के पास रोजाना करीब 10 मरीज आते थे। पारिवारिक परेशानी, पढ़ाई, रोजगार, बीमारी समेत कई समस्याओं से परेशान मरीज उनसे इलाज कराते थे। अब उनके जाने से इलाज कराने वालों की भी समस्याएं बढ़ गई हैं।
पढ़ाई के चलते काफी तनाव रहता था। नींद भी ठीक से नहीं आती थी। हर वक्त चिंता लगी रहती थी। जिला अस्पताल में तैनात मनोचिकित्सक से इलाज कराने पर लाभ मिला था। उन्होंने काउंसिलिंग कर सही परामर्श दिया था। - महिमा कुमारी, बनलेख।
परिवार में बच्चों की चिंता के चलते काफी तनाव में रहता था। इलाज के लिए पिथौरागढ़ भी गया लेकिन चंपावत में मनोचिकित्सक की तैनाती से बड़ी राहत मिली। अभी और काउंसलिंग की जरूरत थी लेकिन उनके दोबारा नहीं आने की जानकारी मिली है। - कैलाश सिंह

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